मध्य प्रदेश शासन द्वारा 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी शुभरंजन सेन को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं वन बल प्रमुख (HoFF) नियुक्त किए जाने के आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (Addl. PCCF) आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। डबास ने इस नियुक्ति में न केवल वरिष्ठता की अनदेखी का आरोप लगाया है, बल्कि नवनियुक्त वन बल प्रमुख पर वन्यप्राणी संरक्षण में घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या हैं आरोप?
पत्र के अनुसार, सेन की नियुक्ति उनसे वरिष्ठ चार अधिकारियों— एचयू खान (1989 बैच), बिभाष कुमार ठाकुर (1990 बैच), असित गोपाल (1990 बैच) और रेणु सिंह (1990 बैच) की वरिष्ठता को दरकिनार कर की गई है। डबास का तर्क है कि मध्य प्रदेश में अमूमन सबसे वरिष्ठ अधिकारी को ही वन बल प्रमुख बनाया जाता रहा है।
डबास ने डीपीसी (DPC) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सेन ने अपने सेवाकाल में कभी भी वन विभाग के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय पदों जैसे- क्षेत्रीय वन मंडलाधिकारी, क्षेत्रीय वन संरक्षक या मुख्य वन संरक्षक पर कार्य नहीं किया। उनका पूरा कार्यकाल अधिकांशतः वन्यप्राणी मुख्यालयों या नेशनल पार्कों तक ही सीमित रहा। मैदानी अनुभव के अभाव में उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठाना उचित नहीं है।
पत्र में एक बेहद गंभीर आरोप यह है कि श्री सेन के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रहते हुए वर्ष 2025 में 55 बाघों का शिकार हुआ, जो मध्य प्रदेश वन विभाग के इतिहास में सर्वाधिक है। डबास का आरोप है कि श्री सेन वन्यप्राणी क्षेत्र में अपनी पूरी सेवा देने के बावजूद कोई विशेष योगदान नहीं दे पाए।
रसूखदारों पर कार्रवाई न करना
डबास ने आरोप लगाया है कि पूर्व वन मंत्री और वर्तमान जनजातीय मंत्री विजय शाह द्वारा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के गंभीर उल्लंघनों (जैसे- सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में चिकन पार्टी करना और पन्ना टाइगर रिजर्व में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हाथी की सवारी करना) की बार-बार शिकायत करने के बावजूद सेन ने कोई कार्रवाई नहीं की और चुप्पी साधे रहे।
पत्र में पेंच टाइगर रिजर्व में बिना सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) की अनुमति के टाइगर सफारी के अवैध निर्माण का भी ज़िक्र है। इसके अलावा, टाइगर स्ट्राइक फोर्स की लापरवाही के कारण वर्ष 2024 में अंतर्राष्ट्रीय तस्कर अजीत पारदी के महाराष्ट्र से भाग जाने और अवैध रिसॉर्ट्स व दागी अधिकारियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। साथ ही कैम्पा (CAMPA) और विकास निधि के फंड्स के दुरुपयोग का भी आरोप है।
आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि जो अधिकारी अपने मूल वन्यप्राणी क्षेत्र में पूरी तरह विफल रहा हो और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ निर्णय लेने में अक्षम हो, वह प्रदेश के वनों का संरक्षण नहीं कर सकता। अतः प्रदेश हित में इस नियुक्ति आदेश पर तत्काल प्रभाव से पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
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