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मेंस्ट्रुअल हेल्थ भी मौलिक अधिकार, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा? 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-129 है। शनिवार, 31 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सुप्रीम कोर्ट ने मेंस्ट्रुअल हेल्थ को लेकर और मध्य प्रदेश में गेंडे लाने को लेकर सीएम ने क्या-क्या कहा?


मुख्य सुर्खियां

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने एक आकलन में बताया है कि इस साल जनवरी में दिल्ली में प्रदूषण पिछले साल की तुलना में ख़राब रहा। इस साल एवरेज AQI 307 था जबकि पिछले साल यह 305 था। 


केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने हाइड्रो पंप्ड-स्टोरेज परियोजनाओं के लिए पर्यावरण और वन स्वीकृतियों को आसान करने का प्रस्ताव दिया है। CEA का कहना है कि जटिल मंजूरी प्रक्रियाएं PSP के विकास में बड़ी बाधा हैं, जबकि ये परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। 


AIIMS दिल्ली के ट्रांसजेंडर क्लिनिक में पिछले दो वर्षों में 139 जेंडर-अफर्मिंग और रिफाइनिंग प्रक्रियाएं की गईं। यहां हर साल करीब 200 नए मरीज पंजीकरण करा रहे हैं। यह आंकड़े ट्रांसजेंडर समुदाय में बढ़ती जागरूकता, पहचान की स्वीकार्यता और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को दर्शाते हैं।


पूर्वी डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो (DRC) में रुबाया कोल्टन खदान में धंसने से 200 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है। यह हादसा बुधवार को हुआ था जहां अब तक राहत कार्य जारी है।


एनजीटी के आदेश के बाद भी भोपाल की कलियासूत नदी के किनारे से अतिक्रमण न हटाए जाने पर ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार को फटकार लगाई। नदी किनारे 97 अवैध निर्माण हैं जिनको हटाने के लिए 1100 से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं।


इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मरने वालों के परिजनों ने शहर के रीगल चौराहे पर प्रदर्शन किया। उन्होंने 30 मृतकों का आंकड़ा स्वीकार करते हुए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग की। इस बीच यहां मारने वालों का आंकड़ा 31 पहुंच गया है।    

विस्तृत चर्चा

स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और अनिवार्य सुविधाएं सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड प्रदान करें। इसके साथ ही, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाना अनिवार्य होगा। जो स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिव्यांगों के अनुकूल (डिसेबल्ड फ्रेंडली) शौचालय बनाने का भी आदेश दिया है।

जनहित याचिका और पृष्ठभूमि यह मामला 2022 में समाज सेविका जया ठाकुर द्वारा दायर एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था। याचिका में मांग की गई थी कि पूरे देश में ‘मेंस्ट्रुअल हाइजीन पॉलिसी’ लागू की जाए, क्योंकि मासिक धर्म के दौरान सुविधाओं की कमी और पैड खरीदने के लिए पैसे न होने के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। 12 नवंबर 2024 को केंद्र सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि एक राष्ट्रीय नीति तैयार कर ली गई है।

स्कूल में अब निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:

छात्राओं को सस्ते और सुरक्षित सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना।

इस्तेमाल किए गए पैड के निपटान (डिस्पोजल) के लिए उचित व्यवस्था करना।

मासिक धर्म को लेकर समाज में व्याप्त शर्म और गलत धारणाओं को खत्म करने के लिए जागरूकता बढ़ाना।

सरकारी योजनाओं, जैसे नेशनल हेल्थ मिशन के तहत रियायती दरों पर पैड वितरण को सुदृढ़ करना।

संवैधानिक अधिकार और सम्मान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की हैं:

अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार): स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय न होना समानता के अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि इसके अभाव में वे लड़कों की तरह शिक्षा में समान रूप से हिस्सा नहीं ले पातीं।

अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार): मासिक धर्म के दौरान गरिमापूर्ण सुविधाएं मिलना जीवन के अधिकार का हिस्सा है। उचित सुविधा न मिलने से लड़कियों की निजता और गरिमा प्रभावित होती है।

कोर्ट की कार्रवाई में उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे क्षेत्रों की रिपोर्ट का भी उल्लेख है, जहां आज भी मासिक धर्म के दौरान लड़कियों को गौशाला (काऊ शेड) में रहना पड़ता है। उन्हें कड़ाके की ठंड में सुबह नदी पर जाकर अपने कपड़े और बिस्तर धोने पड़ते हैं, जो दर्शाता है कि समाज में इसे आज भी एक शर्मनाक विषय माना जाता है।


मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण

गैंडों को लाने का प्रस्ताव भोपाल में आयोजित आईएफएस मीट और वानगी सम्मेलन के दौरान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि राज्य सरकार मध्य प्रदेश में गैंडों (Rhinos) को लाने की योजना पर काम कर रही है। उनका तर्क है कि जिस तरह चंबल में घड़ियाल और नर्मदा में मगरमच्छों का संरक्षण सफल रहा है, वैसे ही उचित माहौल मिलने पर गैंडे भी यहां बस सकते हैं।

पर्यावरण और आवास संबंधी चुनौतियां हालांकि, विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, गैंडे सामान्य जंगलों में नहीं रहते। उन्हें चौड़े फ्लड प्लेन, घास के मैदान और नम वातावरण की आवश्यकता होती है, जैसा असम के काजीरंगा में पाया जाता है। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश के जंगल मुख्य रूप से शुष्क और पर्णपाती (Dry and Deciduous) हैं, जो बाघ, तेंदुए और हिरणों के लिए तो उपयुक्त हैं, लेकिन गैंडों के लिए शायद नहीं। ऐतिहासिक रूप से भी गैंडे हाल के समय में मध्य भारत के परिदृश्य का हिस्सा नहीं रहे हैं।

वन कर्मचारियों के साथ विडंबनापूर्ण व्यवहार इसी सम्मेलन के दौरान एक नकारात्मक पहलू भी सामने आया। जहां एक ओर बड़े वन्यजीव प्रोजेक्ट्स की बात हो रही थी, वहीं ड्यूटी पर तैनात 100 से ज्यादा फॉरेस्ट गार्ड्स को पूरे दिन भोजन नहीं दिया गया। वन कर्मचारी संघ ने इस पर नाराजगी व्यक्त की है कि उच्च अधिकारियों के लिए व्यवस्था थी, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की उपेक्षा की गई।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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