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नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों से क्या-क्या बदलाव होंगे? 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-127 है। गुरुवार, 29 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भारत के नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक किसान ने आत्महत्या कर ली। खेड़ा जमुनिया के इस किसान की आत्महत्या को बारिश और ओलावृष्टि के बाद हुए फसल के नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है।  


श्रीनगर में 3 दिनों से लगातार जारी बर्फ़बारी के कारण 6 इंच तक बर्फ जम गई। जम्मू कश्मीर की वारवान घाटी में बुधवार को एक बड़ा हिमस्खलन देखा गया। वहीं हिमाचल प्रदेश में 4 नेशनल हाइवे समेत कुल 889 सड़कें बंद हैं। 


भोपाल में एक दिन में 9.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। जनवरी में एक दिन में यह सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड है।  


आवारा कुत्तों को कंट्रोल करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए ज़रूरी कदमों की कमी पर नाराज़गी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा, “राज्य सरकारें हवाई किले बना रही हैं।” आपको बता दें कि कोर्ट में बीते जुलाई से आवारा कुत्तों पर लगातार सुनवाई हो रही है।


PWD ने AMRUT 2.0 योजना के तहत भोपाल की सड़कों को खोदने और पुनर्स्थापित (restoration) करने के लिए लगभग ₹933 करोड़ का शुल्क पेश किया, जो इस पूरे प्रोजेक्ट के लगभग बराबर है। BMC ने कहा कि इतनी रकम देने से AMRUT योजना का बजट बिगड़ जाएगा और मुख्य जल/सीवरेज कार्य प्रभावित होंगे। अंत में यह तय हुआ है कि भोपाल नगर निगम ही सड़कों की मरम्मत करेगी।


इटली के सिसली में भारी बारिश के बाद आए भूस्खलन के बाद लगभग 1500 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। इन परिवारों के स्थाई पुनर्वास पर विचार शुरू कर दिया गया है। 

विस्तृत चर्चा

Many regions struggle to meet solid waste management goals

नए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को मंज़ूरी

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 को अधिसूचित किया है, जो वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। ये नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत बनाए गए हैं और 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह से प्रभावी हो जाएंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरा प्रबंधन प्रणाली में सर्कुलर इकोनॉमी और एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR) के सिद्धांतों को शामिल करना है। साथ ही, यह “प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करेगा” (Polluters Pay) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने पर भारी पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation) लगाने का प्रावधान है।

कचरे का स्रोत पर वर्गीकरण (Source Segregation)

नए नियमों के अनुसार, अब कचरा पैदा करने वालों को इसे चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा, जबकि पहले मुख्य रूप से केवल गीले और सूखे कचरे को ही अलग किया जाता था:

गीला कचरा: इसमें रसोई का कचरा, सब्जियां, फल, मांस और फूल शामिल हैं, जिन्हें कंपोस्टिंग या बायोमिथेनेशन के माध्यम से संसाधित किया जाएगा।

सूखा कचरा: इसमें प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी और रबर शामिल हैं, जिन्हें मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) में रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।

सैनिटरी कचरा: इसमें इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड, टैम्पोन और कंडोम शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित रूप से लपेटकर अलग रखना होगा।

विशेष देखभाल कचरा (Special Care Waste): इसमें पेंट के डिब्बे, बल्ब, मरकरी, थर्मामीटर और दवाएं जैसी चीजें आती हैं, जिन्हें अधिकृत एजेंसियों या कलेक्शन सेंटर पर जमा करना होगा।

बल्क वेस्ट जनरेटर की जवाबदेही

बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए विशेष नियमों पर जोर दिया गया है, जो कुल कचरे का लगभग 30% हिस्सा पैदा करते हैं।

परिभाषा: ऐसी संस्थाएं जिनका फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है, या जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करती हैं, या 400 लीटर से अधिक पानी का उपयोग करती हैं, उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है।

जिम्मेदारी: इन्हें अपने परिसर में ही गीले कचरे को प्रोसेस करना होगा या ईबीडब्ल्यूजीआर (EBWGR) सर्टिफिकेट लेना होगा। इनकी जिम्मेदारी होगी कि कचरे को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से इकट्ठा और ट्रांसपोर्ट किया जाए। इससे शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) पर बोझ कम होगा और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन (Decentralized Waste Management) को बढ़ावा मिलेगा।

लैंडफिल और कचरा प्रसंस्करण के सख्त नियम

नए नियम शहरों में लैंडफिल साइट्स पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करते हैं:

लैंडफिल पर पाबंदी: लैंडफिल का उपयोग केवल उसी कचरे के लिए किया जा सकेगा जिसे रीसायकल नहीं किया जा सकता या जिससे ऊर्जा नहीं बनाई जा सकती।

आर्थिक दंड: यदि स्थानीय निकाय बिना छंटनी किए हुए कचरे को लैंडफिल में भेजते हैं, तो उन पर भारी लैंडफिल शुल्क लगाया जाएगा, जो कचरा इकट्ठा करने और रीसाइक्लिंग करने की कुल लागत से भी अधिक होगा।

बफर ज़ोन: जिन प्रसंस्करण इकाइयों की क्षमता 5 टन प्रतिदिन से अधिक है, उनके आसपास एक बफर ज़ोन बनाना अनिवार्य होगा।

तकनीकी निगरानी और औद्योगिक बदलाव

प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई तकनीकी और औद्योगिक कदम उठाए गए हैं:

ऑनलाइन पोर्टल: कचरा पैदा होने से लेकर उसके निपटान तक की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करने के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा।

आरडीएफ (RDF) का उपयोग: सीमेंट प्लांट और ‘वेस्ट टू एनर्जी’ प्लांट जैसी औद्योगिक इकाइयों के लिए अब ठोस ईंधन के स्थान पर आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

कार्बन क्रेडिट: स्थानीय निकायों को कचरा प्रबंधन के माध्यम से कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पहाड़ी और पर्यटन क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान

पहाड़ी इलाकों और द्वीपों के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं, जहां पर्यटकों की संख्या के आधार पर कचरा प्रबंधन सुविधाओं को रेगुलेट किया जाएगा। पर्यटकों पर यूजर फीस (User Fee) लगाई जाएगी और कचरा संग्रहण के लिए अलग से पॉइंट बनाए जाएंगे ताकि इन संवेदनशील क्षेत्रों के पर्यावरण की रक्षा की जा सके।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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