यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-148 है। शुक्रवार, 20 फरवरी को यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग में देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश के एमवाय अस्पताल में चूहों के बाद अब बिल्लियों के आतंक और अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड के जंगलों में लगी भीषण आग के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
भारत सरकार इस साल के अंत तक रेयर-अर्थ मैग्नेट का घरेलू उत्पादन शुरू करने की योजना बना रही है। निजी कंपनियों को स्वदेशी तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है ताकि चीन पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाई जा सके।
लंबे समय से चले मुकदमे के कारण अरुणाचल की डेमवे लोअर जलविद्युत परियोजना को पर्यावरण मंजूरी की अवधि 11 साल बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञ पैनल ने देरी को आधार बनाकर प्रोजेक्ट को 2037 तक वैधता दी है, जिससे निर्माण आगे बढ़ सकेगा।
इसरो ने पराली जलाने की घटनाओं का बेहतर पता लगाने के लिए नया फायर-डिटेक्शन एल्गोरिदम विकसित किया है। इसे रबी सीजन में टेस्ट किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के शहडोल में अवैध कटाई रोकने गई वन विभाग की टीम पर आरोपियों ने हमला कर दिया। बीते 2 दिनों में यह दूसरा ऐसा हमला है। इससे पहले सोहागपुर क्षेत्र में भी कोल माफियाओं ने वन विभाग के दल पर हमला किया था।
वहीं मध्य प्रदेश की विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों पर हंगामा हुआ। विपक्ष ने मौत के आंकड़ों को लेकर सरकार को घेरा वहीं सरकार ने माना कि मरीज़ों के स्टूल और पानी की जाँच में कॉलेरा और ई-कोलाई की पुष्टि हुई है।
साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से मध्य प्रदेश के कई ज़िलों में आंधी-बारिश की घटनाएं बीते 2 दिनों से जारी हैं। उज्जैन के घट्टिया, महिदपुर, उन्हेल सहित कई ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। यहां कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलें आड़ी हो गईं। मौसम विभाग ने 23 और 24 फरवरी को फिर बारिश का अलर्ट जारी किया है।
विस्तृत चर्चा
यह पॉडकास्ट मुख्य रूप से दो प्रमुख घटनाओं पर केंद्रित है: इंदौर के एक सरकारी अस्पताल में गंभीर लापरवाही और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों, अरुणाचल प्रदेश तथा नागालैंड के जंगलों में लगी भीषण आग।
इंदौर के अस्पताल में लापरवाही और अव्यवस्था
इंदौर के एमवाई अस्पताल की सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अस्पताल के पीआईसीयू (PICU) में छह महीने पहले चूहों द्वारा दो नवजात बच्चों को कुतरने से हुई मौत की घटना के बाद, अब वहां बिल्लियों का जमावड़ा देखा गया है। ये बिल्लियाँ ओपीडी (OPD) से लेकर ऑपरेशन थिएटर (OT) और एचआईवी (HIV) वार्ड जैसे संवेदनशील इलाकों में घूमती पाई गई हैं। ऑपरेशन थिएटर में जानवरों की मौजूदगी को एक बायोलॉजिकल हज़ार्ड (जैविक खतरा) माना जाता है।
बायोप्सी सैंपल का गायब होना: अस्पताल में लापरवाही का आलम यह है कि जांच के लिए मरीजों से लिए गए बायोप्सी सैंपल लैब से गायब हो गए हैं। इसके पीछे बिल्लियों का हाथ होने का शक जताया जा रहा है, जिसकी फिलहाल जांच चल रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई: इस मामले में दो जूनियर डॉक्टरों को नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव के अनुसार, पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर ₹500 का जुर्माना लगाया गया है, हालांकि उन्होंने दावा किया है कि दवाइयां और लैब सैंपल सुरक्षित हैं।
अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के जंगलों में भीषण आग
पॉडकास्ट का दूसरा हिस्सा उत्तर-पूर्वी राज्यों के जंगलों में लगी आग और उसे बुझाने के लिए किए जा रहे बचाव कार्यों के बारे में है।
भारतीय वायु सेना का ऑपरेशन: अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के विभिन्न हिस्सों में पिछले एक हफ्ते से आग लगी हुई है। भारतीय वायु सेना (IAF) ‘एरियल फायर फाइटिंग ऑपरेशन’ के जरिए इस पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। एमआई-17 वी5 (Mi-17 V5) हेलीकॉप्टरों का उपयोग दीमापुर की पदुम खोखरी झील से पानी भरकर आग बुझाने के लिए किया जा रहा है।
प्रभावित क्षेत्र और राहत कार्य:
अरुणाचल में आग 13 फरवरी को शुरू हुई थी, जिससे कई इलाकों को खाली कराना पड़ा।
लोहित घाटी में 12,000 लीटर से अधिक और वालोंग में लगभग 1,439,800 लीटर पानी गिराया गया है।
नागालैंड की जुकु घाटी (Dzukou Valley) और जामफू चोटी के पास भी ऑपरेशन जारी है।
इस कार्य में भारतीय सेना के जवान भी वायु सेना की मदद कर रहे हैं।
चुनौतियां और कठिनाइयां: बचाव दल को खराब मौसम, तेज हवाओं, कम दृश्यता (विजिबिलिटी) और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। हिमालय का यह इकोसिस्टम बहुत ही नाजुक (fragile) है, जिसे बचाने की कोशिश की जा रही है।
आग लगने के कारण: रक्षा प्रवक्ता के अनुसार, आग लगने के मुख्य कारण सूखा मौसम और स्थानीय जनजातियों द्वारा की जाने वाली ‘शिफ्टिंग कल्टीवेशन’ (झूम खेती) है। इस खेती पद्धति में फसल कटाई के बाद जमीन साफ करने के लिए आग लगाई जाती है, जो अक्सर जंगलों में फैल जाती है।
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