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दाल मिशन के एक साल बाद भी कोई रिसर्च नहीं

दाल मिशन में रिसर्च की मंज़ूरी न मिलने से लेकर मप्र में वन विभाग पर हमले तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें

दिल्ली में 2.5 लाख ई-रिक्शा की लिमिट, देशभर में परमाणु ऊर्जा पर अध्ययन, महाराष्ट्र में सूखा राहत के लिए आगे आए आईएस, प्रदर्शन कर रहे किसान हिरासत में। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा की कुल संख्या 2.5 लाख तक सीमित करने और डिजिटल ई-रिक्शा अनुपालन प्रमाणपत्र (ECC) अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। एक नागरिक अधिकतम 5 और कंपनियां/एंटिटी अधिकतम 100 ई-रिक्शा रख सकेंगी।


एनटीपीसी उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की संभावना का अध्ययन करने वाली है। कंपनी 2032 तक गैर-जीवाश्म क्षमता 2 GW और 2047 तक 30 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

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महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों ने स्वेच्छा से अपने एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला किया है। इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिवाली से पहले प्रत्येक सूखा प्रभावित किसान को ₹5,000 की अग्रिम सहायता देने की घोषणा की थी। राज्य की 358 में से 305 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।


राजस्थान में सिंचाई पानी की मांग कर रहे 10 किसानों को हिरासत में ले लिया गया. रबी फसलों के लिए सिंचाई पानी और इंदिरा गांधी नहर के पानी के वितरण नियमों में बदलाव की मांग को लेकर ‘खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति’ के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने बैरिकेड हटाने और सड़क जाम करने पर किसानों को हिरासत में लिया।


मध्य प्रदेश के पन्ना में विवादित वन भूमि पर पौधारोपण अभियान के दौरान ग्रामीणों ने वन, पुलिस और राजस्व की संयुक्त टीम पर हमला कर दिया। हमले में 6 वन कर्मी घायल हुए, जिनमें से एक को सिर में गंभीर चोट आई। ग्रामीण 7-हेक्टेयर भूमि पर वर्षों से खेती का दावा कर रहे हैं, जबकि वन विभाग का कहना है कि यहां 30-हेक्टेयर जमीन उसकी है।

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मध्य प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान को बाघ भेजने के लिए राज्यों से औपचारिक अनुरोध का इंतजार कर रही है। प्रस्ताव के तहत छत्तीसगढ़ को चार, ओडिशा को तीन और राजस्थान को एक बाघ दिया जाना है। वन विभाग के अनुसार, अनुरोध मिलने के बाद स्थानांतरण के लिए उपयुक्त बाघों की पहचान की प्रक्रिया शुरू होगी।

विस्तृत चर्चा

एक रिपोर्ट के अनुसार अलर्ट मिलने के बावजूद तीन में से एक व्यक्ति आपदा की चेतावनी पर कार्रवाई नहीं कर पाता। इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं पल्लव जैन।

दाल मिशन में रिसर्च की उपेक्षा

भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। हालांकि, देश का उत्पादन इसकी सालाना मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी स्थिति को देखते हुए, सरकार ने पिछले साल ‘दाल मिशन’ (पल्सेस मिशन) शुरू किया। इस मिशन के अन्य हिस्से तो शुरू हो गए हैं, लेकिन शोध परियोजनाएं अभी तक ज़मीन पर नहीं उतर पाई हैं।

इस मिशन के तहत  500 करोड़ रुपये के आवंटन के बावजूद अभी तक कोई भी रिसर्च प्रोजेक्ट मंजूर नहीं हुआ है। 

कैबिनेट सचिवालय की सख्ती

इस देरी की ओर इशारा करते हुए, कैबिनेट सचिवालय ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से कहा था कि वे रिसर्च प्रोजेक्ट्स की मंजूरी की प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी कर लें। रविवार को मंत्रालय ने कहा कि वह “प्रक्रिया में तेजी ला रहा है, और समिति द्वारा अनुशंसित पात्र प्रोजेक्ट्स को 15 नवंबर की समय-सीमा से पहले, यानी अक्टूबर 2026 के अंत तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है।”

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के सवालों का जवाब देते हुए, कृषि मंत्रालय ने कहा, “प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के बाद, देश भर के शोध संस्थानों और अन्य पात्र संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। कुल 419 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें स्क्रीनिंग और तकनीकी मूल्यांकन के लिए लिया गया है। प्राप्त प्रस्तावों में से 125 प्रस्ताव ICAR संस्थानों से हैं; 249 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से हैं; 14 अन्य सरकारी विश्वविद्यालयों, संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से हैं… और पांच निजी विश्वविद्यालयों से हैं।” 

बजट में हुई थी घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद, 11 अक्टूबर 2025 को इस मिशन की शुरुआत की। इस मिशन की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल 1 फरवरी को अपने बजट भाषण में की थी। वित्त मंत्री के बजट भाषण के अनुसार, यह मिशन पांच मुख्य बिंदुओं पर जोर देता है: जलवायु के अनुकूल बीजों का विकास और उनकी व्यावसायिक उपलब्धता, प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना, उत्पादकता में वृद्धि करना, फसल कटाई के बाद भंडारण और प्रबंधन में सुधार लाना, और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।

यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका लक्ष्य देश में दालों के कुल उत्पादन को 45% तक बढ़ाना है—यानी 2023-24 के 242 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2030-31 तक 350 लाख मीट्रिक टन करना है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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