यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-139 है। बुधवार, 11 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए ट्रेड डील को लेकर अमेरिका द्वारा जारी फैक्टशीट के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
केंद्र सरकार ने बजट में लद्दाख में दो नए बड़े टेलीस्कोप लगाने और एक पुराने को अपग्रेड करने की मंजूरी दी है, जिससे भारत की खगोल विज्ञान रिसर्च को बड़ा फायदा मिलेगा। ये टेलीस्कोप सूरज, अंतरिक्ष मौसम और ब्रह्मांड की उत्पत्ति जैसे विषयों पर नई जानकारी जुटाने में मदद करेंगे और भारत को वैश्विक रिसर्च में मजबूत करेंगे।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में चिंता जताई गई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से सस्ते आयात बढ़ सकते हैं, जिससे स्थानीय ड्राई फ्रूट उद्योग पर असर पड़ सकता है। कश्मीर के नेताओं ने सरकार से किसानों और कारोबारियों के हितों की सुरक्षा और स्पष्ट नीति की मांग की है।
इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए 20 गांवों के 662 किसानों को जमीन अधिग्रहण के बदले करीब 626.49 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा। परियोजना से एक्सप्रेसवे बनेगा और प्रभावित किसानों को सीधे भुगतान किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के 300 CNG स्टेशन में CNG की सही मात्रा जांचने के लिए विभाग के पास सिर्फ दो पुरानी टेस्टिंग किट हैं। इससे उपभोक्ताओं को कम गैस मिलने की शिकायतों की सही जांच नहीं हो पा रही है।
इंदौर में एक साल में 3384 सड़क हादसे और 252 मौतें हुईं, लेकिन किसी राहगीर ने ‘राहवीर’ बनकर मदद नहीं की। सरकार 25 हजार रुपये इनाम देती है, फिर भी लोगों में जागरूकता और पहल कम दिख रही है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक चंबल सेंचुरी में पनडुब्बी से रेत खनन जारी है। चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे दुर्लभ जीवों के अस्तित्व पर खतरा बताया गया है। पर्यावरण नियमों के बावजूद नदी क्षेत्र में मशीनों के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
बजट में एमपी सरकार ने 63 हजार आदिवासी घरों तक बिजली पहुंचाने और 8 हजार घरों को सौर ऊर्जा से रोशन करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही राज्य बजट करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
बेतवा नदी के उद्गम क्षेत्र में पंप से पानी निकालने पर मंत्री ने तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए। सरकार ने पर्यावरण और नदी के अस्तित्व पर खतरे को देखते हुए एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी गई है।
विस्तृत चर्चा
यूएस फैक्ट शीट से बढ़ा असमंजस
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर व्हाइट हाउस द्वारा सोमवार देर रात जारी की गई फैक्ट शीट ने नई असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। इस दस्तावेज़ में दावा किया गया है कि भारत ने रूस से तेल खरीदना सीमित या बंद करने, कुछ दालों पर टैरिफ घटाने और डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने जैसे कदमों पर सहमति जताई है। हालांकि, इन दावों की अब तक भारत सरकार ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, और 7 फरवरी को जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में भी ऐसे किसी वादे का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। इसी कारण यह सवाल उठ रहा है कि ट्रेड डील के बाद भारत की रूस से ऊर्जा खरीद नीति में वास्तव में कोई बदलाव होगा या नहीं।
फैक्ट शीट और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि 25% टैरिफ पेनल्टी हटाने के बदले भारत ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल आयात रोकने का आश्वासन दिया है। इसके विपरीत, विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने कहा कि तेल की खरीद मुख्यतः निजी कंपनियों द्वारा बाजार स्थितियों के आधार पर की जाती है और भारत के राष्ट्रीय हित ही अंतिम निर्णयों का मार्गदर्शन करेंगे। कॉमर्स और विदेश मंत्रालय की ओर से अब तक कोई औपचारिक स्पष्टीकरण न आने से स्थिति और धुंधली बनी हुई है।
मामले से जुड़े सूत्रों का मानना है कि अमेरिकी फैक्ट शीट अधिकतर अमेरिकी पक्ष की प्राथमिकताओं और व्याख्या को दर्शाती है, जबकि 7 फरवरी का संयुक्त बयान ही इस समझौते का मुख्य और आधिकारिक दस्तावेज़ माना जाएगा। इस बीच, नई दिल्ली में ब्रिक्स शेरपा बैठक में पहुंचे रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने उम्मीद जताई कि इस डील से भारत-रूस संबंधों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि भारत के लिए सभी साझेदारों के साथ संतुलित आर्थिक रिश्ते बनाए रखना ज़रूरी है।
कुल मिलाकर, पहले कृषि आयात को लेकर और अब रूसी तेल के मुद्दे पर सामने आ रही अलग-अलग व्याख्याओं ने ट्रेड डील की वास्तविक शर्तों और भारत की ऊर्जा नीति को लेकर अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर ड्राई फ्रूट सेक्टर की चिंता
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जम्मू-कश्मीर की सियासत में नया विवाद उभर आया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में खुलकर आशंका जताई कि यह समझौता राज्य के हॉर्टिकल्चर और ड्राई फ्रूट सेक्टर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। बजट 2026 पर चल रही बहस के दौरान उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी ट्री-नट्स और ड्राई फ्रूट्स को शून्य शुल्क पर भारतीय बाजार में प्रवेश मिलता है, तो सस्ते आयात से स्थानीय किसानों और व्यापारियों की प्रतिस्पर्धा क्षमता कमजोर पड़ सकती है।
उनका तर्क है कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सेब, बादाम, अखरोट और केसर जैसी फसलों पर निर्भर है। राज्य में लगभग 35 लाख लोगों की आजीविका हॉर्टिकल्चर से जुड़ी है, जबकि देश के कुल अखरोट उत्पादन का करीब 95% हिस्सा यहीं से आता है और सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये का निर्यात होता है। ऐसे में सस्ते आयात से स्थानीय उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ने और किसानों की आय घटने की आशंका जताई जा रही है।
इस मुद्दे पर विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिसके बाद कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि जहां कुछ राज्यों को ट्रेड डील से राहत मिल सकती है, वहीं जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों की विशिष्ट आर्थिक संरचना को ध्यान में रखते हुए कम से कम स्थानीय सेब और ड्राई फ्रूट्स को सुरक्षा दी जानी चाहिए थी।
स्थानीय व्यापारियों और किसानों के बीच पहले से ही आयातित ड्राई फ्रूट्स की वजह से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंता मौजूद है। उनका कहना है कि यदि बिना शुल्क के विदेशी उत्पाद बड़े पैमाने पर बाजार में आए, तो स्थानीय उत्पादों को बेच पाना और उनकी कीमत बनाए रखना और कठिन हो जाएगा। यही वजह है कि राज्य के व्यापारी केंद्र सरकार से इस समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में हॉर्टिकल्चर केवल कृषि गतिविधि नहीं बल्कि व्यापक रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का आधार है।
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