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जानिए भारत क्यों नहीं करेगा COP33 की मेजबानी?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-187 है। गुरुवार, 9 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भारत COP33 की मेजबानी से क्यों पीछे हटा और भोपाल के अयोध्या बायपास को लेकर अब कौन-सा नया अपडेट है? 


मुख्य सुर्खियां

भारत सरकार ने जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2027 के बाद हाइड्रोफ्लोरोकार्बन गैसों के उत्पादन के लिए नई मंजूरी न देने का निर्देश दिया है। सरकार 2032 तक इसे 10 प्रतिशत और 2047 तक 85% तक कम करना चाहती है.


14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इसमें जानवरों की सुरक्षा के लिए एशिया का सबसे लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है। 


उत्तर प्रदेश में 25 हिमालयन ग्रिफन गिद्धों की सेकेंड्री पॉइज़निंग से मौत हो गई, जबकि छह अन्य गिद्धों को बचा लिया गया। यह घटना लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व के सीमावर्ती क्षेत्र में हुई है।


असम और मेघालय ने सुबनसिरी लोअर हाइड्रो प्रोजेक्ट से अतिरिक्त बिजली लेने से इनकार कर दिया है। दरअसल परियोजना की निर्माण लागत बढ़ने से प्रति यूनिट दर भी 2 रुपये के शुरुआती स्तर से बढ़कर भविष्य में लगभग 7.70 रुपये होने की संभावना है।


जबलपुर हाई कोर्ट ने बैतूल-भोपाल फोरलेन प्रोजेक्ट में टाइगर रिजर्व के पास संकरे अंडरपास बनाने पर आपत्ति जताई है। साथ ही 10.5 किमी के एलिवेटेड कॉरिडोर की सिफारिश पर रिपोर्ट मांगी है।


मध्य प्रदेश के लगभग 1,000 गांवों में राजस्व और वन भूमि के नक्शों को लेकर विवाद है, जिसे सुलझाने के लिए मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किए हैं। सीएस ने दोनों विभागों को आधुनिक तकनीक और मोबाइल मैपिंग का सहारा लेकर साझा सीमांकन करने के निर्देश जारी किए हैं।

विस्तृत चर्चा

भारत का कॉप 33 की मेजबानी से पीछे हटना

दिसंबर 2023 में दुबई में आयोजित कॉप 28 (COP28) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में भविष्य के कॉप सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि भारत साल 2028 में होने वाले कॉप 33 (COP33) की मेजबानी के लिए बोली (bid) लगाएगा। सरकार ने इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक विशेष ‘कॉप 33 सेल’ का भी गठन किया था।

कॉप (COP) और ग्लोबल स्टॉक टेक (GST) का महत्व

कॉप क्या है: यह 1994 के यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) पर हस्ताक्षर करने वाले देशों की वार्षिक बैठक है, जिसमें जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक रणनीति तय की जाती है।

ग्लोबल स्टॉक टेक (GST): यह पेरिस समझौते के तहत एक तंत्र है जो हर 5 साल में यह आकलन करता है कि दुनिया ने तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लक्ष्यों में कितनी प्रगति की है। कॉप 33 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दूसरा जीएसटी होना निर्धारित है।

पीछे हटने के संभावित कारण

भारत के इस कदम के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

राष्ट्रीय हितों का टकराव: एक मेजबान और वैश्विक नेता के रूप में भारत से अपेक्षा की जाती कि वह कड़े जलवायु लक्ष्यों को प्राथमिकता दे। यह भारत के अपने राष्ट्रीय हितों और विकास के लक्ष्यों से टकरा सकता था।

कड़ी निगरानी: मेजबान देश के जलवायु कार्यों पर दुनिया की पैनी नजर रहती है। भारत शायद इस स्तर की वैश्विक जवाबदेही और दबाव से बचना चाहता है।


अयोध्या बाईपास प्रोजेक्ट: फिर कटाई का आरोप

भोपाल में अयोध्या बाईपास पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एक 10-लेन का हाईवे बनाना चाहता है। इस प्रोजेक्ट के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया, जिसके बाद नेशनल ग्रीन ट्राइबनल (NGT) ने इस पर रोक लगा दी थी।

अवैध कटाई के आरोप दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एनजीटी की रोक के बावजूद इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई जारी है:

अधिकारियों का तर्क: NHAI के अधिकारियों का दावा है कि पेड़ काटे नहीं गए हैं, बल्कि हाल ही में आई आंधी के कारण उखड़ गए हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट की सच्चाई: रिपोर्ट के अनुसार, 16 किमी के क्षेत्र में पेड़ कटे हुए पाए गए और उनके ठूंठों को छिपाने के लिए उन पर मिट्टी डाल दी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां लगातार पेड़ों को काटने वाली मशीनें (chainsaw) चल रही हैं।

जल्दबाजी: काम इतनी हड़बड़ी में किया जा रहा है कि पेड़ों को हटाने से पहले वहां की पानी और बिजली की लाइनों को भी शिफ्ट नहीं किया गया।

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के पीछे भारी वित्तीय कारण हैं। यदि प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं होता है, तो NHAI को ठेकेदार (contractor) को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का हर्जाना देना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, इसी आर्थिक नुकसान से बचने के लिए नियमों और कानूनी आदेशों की अनदेखी की जा रही है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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