यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-185 है। मंगलवार, 7 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सुप्रीम कोर्ट ने कोझिकोट-वायनाड ट्विन टनल को मंज़ूरी देते हुए क्या कहा?
मुख्य सुर्खियां
सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक क्षेत्र के लिए गैस आवंटन को बढ़ाकर 90% कर दिया है। यह आश्वासन दिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की आपूर्ति पर्याप्त है।
केरल की एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर कर्नाटक के कोडागु जंगल में रास्ता भटक गई। तीन दिनों तक जंगली जानवरों के खतरे के बावजूद वह सुरक्षित रहीं और अंततः बचा ली गईं।
दिल्ली-NCR में एलपीजी (रसोई गैस) की बढ़ती कीमतों और कम आपूर्ति के कारण बिहार के प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस लौट रहे हैं। उनका कहना है कि शहरों में खाना पकाने का खर्च उठाना अब मुश्किल हो गया है।
राज्यसभा में सरकार ने बताया कि देश में 4,498 बहुत ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री हैं, जिनमें से 3,637 चालू हैं। चालू यूनिट में से 601 एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड के हिसाब से नहीं पाई गईं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में होने वाली 90% मौतों का कोई आधिकारिक मेडिकल कारण दर्ज नहीं होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सटीक डेटा की कमी के कारण स्वास्थ्य योजनाओं और रिसर्च की योजना बनाना कठिन हो रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनने वाली 377 नई सड़कों का काम पर्यावरणीय स्वीकृति के कारण नहीं रोका जाएगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है।
विस्तृत चर्चा
ट्विन टनल की पर्यावरण मंज़ूरी के खिलाफ याचिका
केरल के कोझिकोड से वायनाड तक प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबी सड़क और ट्विन टनल का निर्माण होना है। इसे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है।
यह प्रोजेक्ट पश्चिमी घाट (Western Ghats) के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। यहां दो-दो लेन की दो एकदिशीय (unidirectional) सुरंगें बनाई जानी हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इसके लिए दी गई ‘एनवायरमेंटल क्लीयरेंस’ के खिलाफ ‘वायनाड प्रकृति संरक्षणा समिति’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मगर अदालत ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है।
याचिकाकर्ताओं के मुख्य तर्क
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने याचिकाकर्ताओं की ओर से निम्नलिखित चिंताएं जताई थीं।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता: वायनाड का इलाका बेहद संवेदनशील है और यहां जानवरों, पक्षियों और पौधों की कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।
भूस्खलन का खतरा: यह क्षेत्र लैंडस्लाइड के प्रति संवेदनशील है। जुलाई 2024 में वायनाड में हुई भीषण लैंडस्लाइड का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि इस प्रोजेक्ट से ऐसी घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।
कानूनी खामियां: यह दलील दी गई कि ‘पर्यावरण प्रभाव आकलन’ (EIA) केंद्र सरकार द्वारा किया जाना चाहिए था, लेकिन इसे राज्य सरकार ने किया, जो एक गंभीर अवैधता है।
नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व: यह प्रोजेक्ट नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के 10 किलोमीटर के दायरे में आता है।
सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण और निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोजेक्ट के पक्ष में निम्नलिखित बातें कहीं:
केरल के लिए ‘लाइफलाइन’: केरल में उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण कठिन है। मौजूदा सड़कें यातायात के दबाव और मौसम के कारण अक्सर बंद हो जाती हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी होती है। ऐसे में यह सुरंग प्रोजेक्ट वहाँ के लोगों के लिए एक जीवनरेखा की तरह है।
विशेषज्ञों की निगरानी: अदालत का मानना है कि प्रोजेक्ट की योजना विशेषज्ञों की सलाह पर तैयार की गई है और इसमें पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय अपनाए गए हैं।
NGT जाने की स्वतंत्रता: हालांकि कोर्ट ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है, लेकिन याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी है कि यदि निर्माण के दौरान पर्यावरण संबंधी शर्तों का उल्लंघन होता है, तो वे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
अंततः, सुप्रीम कोर्ट ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बात करते हुए इस प्रोजेक्ट को जारी रखने का आदेश दिया है। जहां पर्यावरणविद पश्चिमी घाट की पारिस्थितिकी (ecology) को लेकर चिंतित हैं, वहीं सरकार और अदालत इसे परिवहन की समस्याओं के समाधान और जनहित के लिए आवश्यक मान रहे हैं।
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