यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-183 है। शनिवार, 4 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए दिल्ली के नए एयर पॉल्यूशन प्लान में क्या-क्या है?
मुख्य सुर्खियां
उत्तर भारत सहित 9 राज्यों में धूल भरी आंधी और तेज हवाओं के साथ एक हफ्ते तक बारिश और ओले गिरने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर में भी धूल भरी आंधी से विजिबिलिटी कम हुई है।
नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज का निर्यात 90% तक गिर गया है। खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति और परिवहन लागत बढ़ने के कारण किसानों को उनकी फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने तेलंगाना की मुसि रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर याचिका को ‘प्रीमैच्योर’ बताते हुए खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि पर्यावरण मंजूरी के बिना काम शुरू किया गया है। जबकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि पर्यावरणीय मुद्दे पहले ही पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया में शामिल हैं।
कूनो नेशनल पार्क से निकला एक चीता घाटीगांव वन्यजीव अभयारण्य में पहुंच गया है। यह स्थान नेशनल हाईवे के पास है, जहां पहले भी एक चीते की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ के मरवाही वन क्षेत्र में एक 55 वर्षीय व्यक्ति की जंगली हाथी (टस्कर) द्वारा कुचले जाने से मौत हो गई। यह घटना तब हुई जब व्यक्ति जंगल में महुआ इकट्ठा करने गया था।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार को वेटलैंड्स के संरक्षण में देरी के लिए फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने प्राथमिकता के आधार पर वेटलैंड्स की सीमाएं तय करने का आदेश दिया है।
मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के थांदला जल वितरण प्लांट में क्लोरीन गैस के रिसाव के कारण 41 लोग बीमार हो गए। पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
विस्तृत चर्चा
दिल्ली सरकार का ‘नया’ प्रदूषण नियंत्रण प्लान
दिल्ली सरकार ने 2026 के लिए नए प्रदूषण नियंत्रण प्लान की घोषणा की है। इसमें “No PUC, No Fuel” नियम, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती और इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा जैसे कदम शामिल हैं।
योजना का मुख्य फोकस: सरकार का लक्ष्य केवल घोषणाएं करना नहीं, बल्कि डेटा-संचालित दृष्टिकोण (data-driven approach) के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना है। इसके लिए एक अलग बजट भी आवंटित किया गया है। यह योजना मुख्य रूप से वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, औद्योगिक कचरे और बायोमास जलने जैसे प्रदूषण के स्रोतों को लक्षित करती है।
वाहनों पर नियंत्रण और सख्त नियम:
‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ (No PUC, No Fuel) नियम को और सख्त बनाया जाएगा, जिसमें ऑटोमैटिक कैमरे नंबर प्लेट के जरिए बिना सर्टिफिकेट वाले वाहनों की पहचान करेंगे।
नवंबर से मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होगा; केवल BS-VI, सीएनजी या इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति मिलेगी।
गंभीर प्रदूषण के दौरान सरकार वर्क फ्रॉम होम (WFH) और ऑफिस के समय में बदलाव जैसे कदम भी उठा सकती है।
सार्वजनिक परिवहन और ईवी (EV) इन्फ्रास्ट्रक्चर:
2028-29 तक बस बेड़े को बढ़ाकर 13,760 करने का लक्ष्य है, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों पर जोर दिया जाएगा।
मेट्रो और आरआरटीसी (RRTS) को फीडर बसों, ई-रिक्शा और ई-ऑटो के साथ एकीकृत किया जाएगा ताकि ‘लास्ट मील कनेक्टिविटी’ में सुधार हो सके।
अगले चार वर्षों में 32,000 ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की योजना है।
धूल और अपशिष्ट प्रबंधन:
सड़कों की धूल कम करने के लिए मैकेनिकल स्वीपर, वॉटर वाइपर और एंटी-स्मॉग गन का बड़े पैमाने पर उपयोग होगा। जबकि निर्माण स्थलों पर स्प्रे सिस्टम अनिवार्य होगा।
लैंडफिल साइट्स को हटाने के लिए समयसीमा तय की गई है। जैसे ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026 तक, भलस्वा को दिसंबर 2026 तक और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक।
निगरानी और निगरानी प्रणाली: रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए ग्रीन वॉर रूम, कमांड और कंट्रोल सेंटर और वार्ड स्तर की टीमों को तैनात किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना की सबसे बड़ी चुनौती इसका जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन (implementation) है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें बहुत कुछ नया नहीं है और पुरानी योजनाओं जैसी ही बातें हैं। उनका तर्क है कि प्रदूषण में कमी तभी संभव है जब सरकार और जनता दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
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