यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 81वां एपिसोड है। बुधवार, 03 दिसंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भोपाल गैस त्रासदी के 41 साल बाद क्या-क्या बदला और सूचना आयोग ने चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन को क्यों भेजा नोटिस।
मुख्य सुर्खियां
अप्रैल 2026 से होगी जनगणना। केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि अगली जनगणना 2 चरणों में होगी। पहला चरण अप्रैल से सितम्बर 2026 के बीच और दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा। पहले चरण में आवास और दूसरे चरण में आबादी की गणना होगी।
वहीं 2020 से अब तक 2.49 करोड़ राशन कार्ड डिलीट किए जा चुके हैं। फिलहाल देश में 20.29 करोड़ राशन कार्ड सक्रीय हैं।
बुधवार सुबह दिल्ली का न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आज, अधिकतम तापमान के 23 डिग्री के आसपास रहने के आसार हैं।
संसद में महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों को कोट करते हुए केंद्र सरकार ने बताया कि 2025 में बाढ़ और भारी बारिश की वजह से 26 नवंबर, 2025 तक 224 लोगों की जान गई है और 599 जानवरों की मौत हुई है, जबकि 3,598 घर और 7.54 मिलियन हेक्टेयर फसल वाले इलाके को नुकसान हुआ है।
संसद में ही दिए गए आंकड़ों के अनुसार 31 अक्टूबर, 2025 तक, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानि PM-KUSUM स्कीम के सभी हिस्सों के तहत कुल 9,466 मेगावाट इंस्टाल्ड कैपेसिटी के सोलर पैनल्स लगाए जा चुके हैं।
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में बताया है कि VIT में 18 में से 4 वाटर डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट्स दूषित मिले हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि बीते 2 सालों में प्रदेश में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विकास हुआ है।
विस्तृत चर्चा
भोपाल गैस त्रासदी: 41 वर्ष बाद की स्थिति (अब्दुल वसीम अंसारी के साथ)
41 साल पहले मध्य प्रदेश के भोपाल में दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी घटित हुई। 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड नाम की फैक्ट्री से 40 टन मिथाइल आइसोसाइनेट निकला, जिससे कम से कम 5,000 लोगों की तुरंत मौत हो गई और पांच लाख से ज़्यादा लोग गैस के बुरे असर से प्रभावित हुए। 41 साल बाद क्या हैं हालत बता रहे हैं अब्दुल वसीम अंसारी।
जहरीला कचरा: यूनियन कार्बाइड की जहरीली गैस से लाशें बिछने के बाद, जहरीला कचरा भोपाल के सीने पर एक बोझ बनकर बैठ गया। लोग 40 साल तक इंतजार करते रहे कि कोई आएगा, इस ज़हर को उठाएगा और दफना देगा। आखिरकार, 2 जनवरी 2025 को यह कचरा 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर के लिए भेज दिया गया। इस सामग्री में फैक्ट्री का 337 टन कचरा, 19 टन दूषित मिट्टी, और 2.2 टन पैकेजिंग मटेरियल शामिल था, यानी कुल 358 टन सामग्री। पीथमपुर में स्थानीय लोगों ने इसे जलाए जाने का विरोध शुरू किया, और यह मामला हाई कोर्ट तक जा पहुंचा। इसके बाद, सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से जलाकर राख बना दिया गया। यह प्रक्रिया जुलाई तक चली और इससे लगभग 900 टन राख निकली।
वर्तमान चुनौती: अब इस राख का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसे फिलहाल प्लांट के लीक-प्रूफ स्टोरेज शेड में रखा गया है। यह सवाल अभी भी जिंदा है कि यह राख कब दफन होगी, क्योंकि नाम तो भोपाल का ही आता है। पहले लोगों ने त्रासदी देखी, फिर इस कचरे को लेकर लोगों में भय व्याप्त हुआ। कचरा हटाए जाने और जलाकर राख बनाए जाने के बाद भी, उस राख के संशय को लेकर लोग अभी भी असमंजस की स्थिति में हैं कि इसका निस्तारण किस तरह से किया जाएगा?
प्रोजेक्ट चीता और आरटीआई विवाद (चंद्रप्रताप तिवारी के साथ)
यह विवाद प्रोजेक्ट चीता परियोजना के प्रबंधन और सूचना के अधिकार अधिनियम की एक विशिष्ट धारा के दुरुपयोग के रुझानों पर केंद्रित है।
आरटीआई आवेदन: वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने जुलाई 2024 में प्रोजेक्ट चीता की पूरी परियोजना के मैनेजमेंट और इसमें शामिल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से जुड़े दस्तावेज़ों की मांग की थी, जो अलग-अलग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से संबंधित थे। वन विभाग का इनकार: वन विभाग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(a) का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से इनकार कर दिया।
विभाग ने तर्क दिया कि यदि ये जानकारियाँ सार्वजनिक की गईं, तो इससे भारत की सार्वभौमिकता, अखंडता, राष्ट्रीय सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध आदि को खतरा हो सकता है। विभाग ने लॉजिक दिया कि जानकारी साझा करने से दक्षिण अफ्रीका, केन्या, नामीबिया जैसे देशों के साथ स्थापित अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों को नुकसान पहुंच सकता है, और इससे प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी।
आयोग की कार्रवाई: अजय दुबे ने इस इनकार के खिलाफ राज्य सूचना आयोग में शिकायत की, और यह मामला एनटीसीए (NTCA) तक भी पहुंचा। राज्य सूचना आयोग ने मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन रंजन सेन को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। उन्हें 12 दिन का समय दिया गया है, और अगली सुनवाई 12 तारीख को होगी, जिसमें उन्हें जवाब देना होगा। यदि वे अपने जवाबों से आयोग को संतुष्ट नहीं कर पाते हैं, तो जुर्माना या विभागीय जांच (departmental inquiry) भी हो सकती है।
आरटीआई अस्वीकृति के रुझान और धारा 8(1)(a) का दुरुपयोग
डेटा और शोध से पता चलता है कि सूचनाओं को अस्वीकार करने के लिए सुरक्षा से संबंधित धाराओं का उपयोग बढ़ रहा है। ऑनलाइन वेबसाईट rti.com के एक ब्लॉग के अनुसार, केंद्रीय सरकारी संस्थाओं ने 1,607 बार क्लॉज़ 8(1)(a) (अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा वाला क्लॉज़) का उपयोग करके जानकारी रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया। 2022-23 के दौरान, सबसे ज्यादा सूचनाएं व्यक्तिगत सूचना (Personal Information) से जुड़े क्लॉज़ 8(1)(j) का उपयोग करके निरस्त की गईं, जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर वृद्धि: हिंदुस्तान टाइम्स की 2019-20 की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना के आवेदनों को अस्वीकार करने में 83% की बढ़ोतरी हुई है। यह क्लॉज़ उन महकमों द्वारा भी इस्तेमाल किया गया है जो सीधे सुरक्षा या अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से संबंधित नहीं हैं, जैसे कि उपभोक्ता मामले के मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय।
दो शोध—”पैटर्न ऑफ द मिसयूज़ ऑफ़ सेक्शन 8(1)(a) ऑफ़ द आरटीआई एक्ट” और “एग्ज़िस्टेंस एंड मिसयूज़ ऑफ सेक्शन 8(1)(a) ऑफ़ द आरटीआई एक्ट ए क्रिटिकल एनालिसिस”—धारा 8(1)(a) के दुरुपयोग के कुछ रुझानों पर इशारा करते हैं:
यदि किसी दस्तावेज़ का केवल एक हिस्सा गोपनीय होना चाहिए, तब भी पूरे के पूरे दस्तावेज़ को गोपनीय घोषित कर दिया जाता है।
जानकारियां अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त या संतोषजनक कारण नहीं दिए जाते।
ऐसे मामलों में भी सुरक्षा के खतरे का दावा किया जाता है जहाँ असल में कोई खतरा नहीं होता।
ये शोध बताते हैं कि कई बार यह अस्वीकृति (डिनायल) अपील के बाद उलट जाता है (रिवर्स हो जाता है) और जानकारियाँ दी जाती हैं। यह दर्शाता है कि यह क्लॉज़ कई बार गलत तरीके से लागू किया गया है।
सबसे दिलचस्प यह है कि आरटीआई अस्वीकृति के कारणों की सूची में एक “अन्य” (Others) का सेक्शन है, जिसके तहत बहुत सी आरटीआई एप्लीकेशनेशंस बिना किसी स्पष्ट कारण के रिजेक्ट कर दी जाती हैं।
यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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