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टाइगर कॉरिडोर में पंप स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने की सिफ़ारिश

टाइगर कॉरिडोर में बिजली परियोजना से लेकर मध्य प्रदेश की 'कवच योजना' तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें

ई-20 के खिलाफ मार्च और सरकार की जानकारी, केवल 30% शहरी घरों में ही सीवरेज कनेक्शन, झारखंड में बिजिली गिरने से 13 की मौत, मप्र के किसानों के लिए ‘कवच योजना’। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल केंद्र E20 ईंधन नीति के खिलाफ लाखों याचिकाओं की कॉपी लेकर पीएम आवास की ओर मार्च कर रहे थे। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें रोक लिया गया। इसी बीच सरकार ने बताया कि देश भर के 87,000 से अधिक आउटलेट्स पर दिन में 8-12 बार फ्यूल क्वालिटी चेक की जा रही है।


एक रिपोर्ट के अनुसार देश में केवल 30% शहरी घरों में ही सीवरेज कनेक्शन है। आंकड़ों में कहूं 11.32 करोड़ शहरी घरों में से केवल 3.44 करोड़ के पास यह सुविधा है। अमृत 2.0 मिशन की अवधि मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है।


झारखंड के गिरिडीह, दुमका और लातेहार जिलों में बिजली गिरने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। इस प्राकृतिक आपदा में 4 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।


उत्तराखंड में बद्रीनाथ हाईवे पर लैंडस्लाइड के कारण 200 यात्री फंस गए हैं। केरल के 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा के 22 जिलों में बाढ़ से 8.63 लाख लोग प्रभावित हैं।


कैबिनेट ने 5,000 किसानों के लिए ‘कवच योजना’ को मंजूरी दी है। इसके लिए ₹50 करोड़ का कोष बनाया जाएगा। यह योजना सहकारी समितियों के ऐसे किसानों के लिए है, जिनके ऋण खाते में गड़बड़ियां हुई हैं और वो सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

विस्तृत चर्चा

वाइल्डलाइफ बोर्ड की टाइगर कॉरिडोर में प्रोजेक्ट को मंज़ूरी

मध्य प्रदेश के पन्ना रानीपुर टाईगर कॉरिडोर में पनारी पंप्ड हायड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। यह जानते हुए कि इस प्रोजेक्ट से टाईगर मूवमेंट प्रभावित होगा नैशनल बोर्ड फॉर वाईल्डलाईफ की स्टैंडिंग कमीटी ने इसे क्लीयरेंस देने की सिफारिश की है। 

यह प्रोजेक्ट ऐसे इलाके में है जहां बाघ, तेंदुए और भालू लगातार और बिना किसी रुकावट के आते-जाते रहते हैं। 

पन्ना छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना का काम शुरु हो चुका है, बड़ी मात्रा में वहां जंगल कट रहे हैं जिससे वन्यप्राणियों का मूवमेंट रानीपुर कॉरिडोर पर बढ़ा है, और अब यहां भी नई परियोजना लेकर आ गए है।

क्या है प्रोजेक्ट?

प्रोजेक्ट को समझें तो 1,800 MW का पंप्ड हायोड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट है, जिसमें दो बांध अलग अलग ऊंचाई पर बनाए जाते हैं, इसका उपयोग एनर्जी स्टोरेज के लिए होता है। प्रोजेक्ट के लिए 411 हेक्टेयर वनभूमि की ज़रुरत है, जो पन्ना टाइगर रिज़र्व के अहम टाइगर कॉरिडोर और सैटेलाइट कोर एरिया में आती है।  

यह कॉरिडोर सतना और पन्ना ज़िलों में पन्ना रिज़र्व के आस-पास के जंगलों को चित्रकूट, यूपी में रानीपुर टाइगर रिज़र्व से जोड़ता है। ऐसे में प्रोजेक्ट के लिए वाईल्ड लाईफ क्लीयरेंस ज़रुरी है।

साइट इंस्पेक्शन में क्या कहा गया?

स्टैंडिंग कमीटी की 9 जुलाई, 2026 की बैठक में प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिलने से पहले, पैनल ने जनवरी में प्रोजेक्ट के इंपैक्ट्स जानने के लिए साइट का निरीक्षण करने का आदेश दिया था।

पर्यावरण मंत्रालय और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के अधिकारियों, वाइल्डलाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (WII) के एक वैज्ञानिक और मध्य प्रदेश के एक DFO वाली चार सदस्यों की टीम ने साइट का दौरा किया और कुछ शर्तों के साथ मंज़ूरी देने की सिफारिश कर दी। 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक डिस्ट्रिक्ट फॉरेस्ट ऑफिसर ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि यह प्रोजेक्ट ऐसे इलाके में है जहाँ बाघ, तेंदुए और भालू लगातार और बिना किसी रुकावट के आते-जाते रहते हैं। 

DFO ने यह भी बताया था कि इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट से कॉरिडोर के ब्लॉक होने की आशंका है। साथ ही,  केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के लागू होने से इस कॉरिडोर में वन्यजीवों की गतिविधि और आवाजाही बढ़ गई है, और वन्यजीवों के आने-जाने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

क्या हैं मिटिगेशन मेशर्स? 

लेकिन इसके बावजूद 9 जुलाई की बैठक में “वाइल्डलाइफ़ कॉरिडोर की अखंडता” बनाए रखने के लिए कुछ शर्तों के साथ इस प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने की सिफारिश की गई थी। इन शर्तों में कुछ मिटीगेशन मेशर्स शामिल हैं।

जैसे बघाइन नदी के ऊपर 30 मीटर चौड़े तीन वाइल्डलाइफ़ ओवरपास बनाना

जंगल में बनने वाली नई सड़क से बचने के लिए मलबे को डंप करने वाली जगह का अलाइनमेंट बदलने का भी निर्देश दिया गया। 

जहां तक संभव हो, मलबे को डंप करने वाली जगहों और काम से जुड़ी सुविधाओं वाली जगहों को टाइगर कॉरिडोर से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना चाहिए।

केंद्र की मीटिंग में क्या हुआ?

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के डायरेक्टर, मध्य प्रदेश के चीफ़ वाइल्डलाइफ़ वार्डन (CWLW) और नैशनल टाईगर कंज़रवेशन अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेटरी से राय मांगी थी।

एनटीसीए के मेंबर सेक्रेटरी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट और मिटिगेशन मेशनर्स को  ध्यान में रखते हुए क्लीयरेंस की सिफ़ारिश की जा सकती है। 

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के डायरेक्टर ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का एनिमल हैबिटैट कनेक्टिविटी पर “काफ़ी असर” पड़ेगा, साईंटिफिक मिटिगेशन मेशर्स इंपैक्ट कम कर लेंगे। 

मध्य प्रदेश के लिए बुरी खबर

तो ऐसे यह प्रोजेक्ट भी क्लीयरेंस की स्टेज पर आ चुका है। 

हाल में संसद में जानकारी दी गई है पर्यावरण मंत्रालय द्वारा की देश में मध्य प्रदेश सबसे अधिक जंगल खोने वाला राज्य बन गया है। राज्य की सड़कों पर मोहन यादव प्रचार कर रहे हैं विकास भी पर्यावरण संरक्षण भी। 

कुछ समय पहले एक आई एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि वाईल्ड लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंस्टीट्यूट जैसे संस्थाएं रबर स्टैंप बन गई हैं, पर्यावरण का विनाश दिखाई देने के बावजूद ये क्लीयरेंस दे रही हैं।

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

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