यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-138 है। मंगलवार, 10 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए ताड़ोबा टाइगर कॉरिडोर में माइनिंग की चिंताएं और मध्य प्रदेश के मौसम का अपडेट।
मुख्य सुर्खियां
सरकार ने पीएमकेवीवाई योजना के तहत 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट किए और 41 एफआईआर दर्ज हुईं, जहां फर्जी अटेंडेंस और नियमों के उल्लंघन जैसे आरोप सामने आए। जमीनी रिपोर्ट में कई सेंटर खाली या बंद मिले, जिससे स्किल ट्रेनिंग मॉडल की गुणवत्ता और मांग पर सवाल उठे हैं।
कश्मीर में पहली बार दिसंबर में ही ट्यूलिप खिलने की घटना सामने आई है, जिसे वैज्ञानिक असामान्य मौसम और बदलते तापमान से जोड़ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे फ्लोरल टूरिज्म के लिए मौका भी मान रहे हैं, लेकिन जलवायु बदलाव की चिंता भी बढ़ी है।
जीरो आवर में ताड़ोबा टाइगर कॉरिडोर में माइनिंग की अनुमति पर सवाल उठे, जहां 18,000 पेड़ों की कटाई और 60+ बाघों के आवास पर खतरे की बात कही गई। विशेषज्ञ समिति की चेतावनी के बावजूद यह फैसला मानव-वन्यजीव संघर्ष और पारिस्थितिकी पर गंभीर असर डाल सकता है।
केंद्र ने बताया कि फसल नुकसान का डेटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता, लेकिन राज्यों की रिपोर्ट के मुताबिक 2024-25 में 13.12 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र आपदाओं से प्रभावित हुआ। पीएम फसल बीमा योजना बोआई से लेकर कटाई बाद तक जोखिम कवर देती है।
सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत एग्रीस्टैक, किसान रजिस्ट्री और जियो-मैपिंग जैसे सिस्टम बना रही है ताकि किसानों को समय पर जानकारी और सेवाएं मिलें। फरवरी 2026 तक 8.48 करोड़ से ज्यादा किसान आईडी और 28.5 करोड़ प्लॉट्स का डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया।
राज्यसभा में बताया गया कि 2020 के 674 से बढ़कर 2025 में एशियाटिक शेरों की संख्या 891 हो गई है। गुजरात में नए इलाकों तक विस्तार के साथ सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष और बीमारी जोखिम कम करने के उपाय भी कर रही है।
2025 के धान सीजन में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 2022 के मुकाबले 90 प्रतिशत तक घटीं। सरकार के मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल प्रयासों को इसका कारण बताया गया।
2020-21 से 2024-25 के बीच गैर-वन कार्यों के लिए 92,062 हेक्टेयर वन भूमि डायवर्ट करने के 6,188 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। यह आंकड़ा विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर नई बहस खड़ी करता है।
देश में 13,100 मेगावॉट क्षमता के 17 परमाणु रिएक्टर लागू करने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें कुछ निर्माणाधीन और कुछ प्री-प्रोजेक्ट स्टेज पर हैं। 2031-32 तक इन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विस्तृत चर्चा
ताड़ोबा कॉरिडोर में माइनिंग विवाद

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में प्रस्तावित एक माइनिंग प्रोजेक्ट ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह प्रोजेक्ट ऐसे वन क्षेत्र में मंजूर हुआ है जो ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से सीधे जुड़ा एक अहम टाइगर कॉरिडोर माना जाता है। यह कॉरिडोर बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक रास्ते का काम करता है, जिससे वे एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 35 हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट भूमि इस परियोजना में इस्तेमाल होगी, जिसके तहत 18,000 से अधिक पेड़ों और हजारों पौधों के प्रभावित होने की आशंका है। इस इलाके में मौजूद जलस्रोत, छोटी नदियां और स्थानीय औषधीय वनस्पतियां भी जोखिम में बताई जा रही हैं, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।
यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। ब्रह्मपुरी फॉरेस्ट डिवीजन में ही 60 से अधिक बाघों का आवास है, जबकि पूरे चंद्रपुर जिले में लगभग 250 बाघ पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माइनिंग गतिविधियों के दौरान मशीनरी, ब्लास्टिंग और जंगल कटाई से जानवरों का प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित होगा और वे गांवों की ओर बढ़ सकते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका है, खासकर तब जब इस कॉरिडोर के आसपास करीब 650 गांव बसे हुए हैं। 2025 में ही चंद्रपुर क्षेत्र में बाघ हमलों से कई लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जिससे इलाके में पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
यह परियोजना एक निजी कंपनी, सनफ्लैग आयरन एंड स्टील लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित है, जिसने रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास का दावा किया है। हालांकि रिपोर्ट्स में कहा गया है कि घोषित 120 नौकरियों में से केवल सीमित संख्या ही स्थायी हो सकती है और वे भी कुशल श्रेणी की होंगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य स्तर पर स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ से इस परियोजना को मंजूरी मिली है, जबकि उसी बोर्ड की विशेषज्ञ समिति ने पहले अपनी रिपोर्ट में इस क्षेत्र में माइनिंग को नुकसानदेह बताते हुए इसकी सिफारिश नहीं की थी। समिति ने हवा और पानी की गुणवत्ता पर असर और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने जैसी आशंकाएं भी जताई थीं।
लोकसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया, जहां इसे एक क्रिटिकल टाइगर कॉरिडोर बताते हुए परियोजना पर पुनर्विचार की मांग की गई। स्थानीय पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है कि विकास के नाम पर पारिस्थितिक संतुलन को खतरे में डाला जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ गांवों में डर का माहौल है और लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बढ़ते विरोध और सवालों के बीच इस परियोजना को आगे कैसे ले जाया जाता है।
मध्य प्रदेश में मौसम का मिज़ाज

अगर मौसम के संदर्भ में बात करें तो मध्य प्रदेश को अगले दो दिनों तक ठंड से हल्की राहत मिल सकती है, हालांकि यह राहत अस्थायी होगी। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में तेज सर्दी की स्थिति नहीं बनेगी और अगले 48 घंटों में तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। इसकी वजह पहाड़ी इलाकों में सक्रिय एक पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बन रहा साइक्लोनिक सर्कुलेशन बताया जा रहा है, जिससे पहाड़ों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है।
सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज धूप देखने को मिली। भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में अधिकतम तापमान बढ़ा, जिससे दिन में हल्की गर्मी महसूस हुई, हालांकि सुबह और रात के समय ठंड का असर अब भी बना रहेगा। मौसम विभाग का कहना है कि फरवरी भर मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फिलहाल बारिश की कोई ठोस संभावना नहीं है, लेकिन स्थितियां कभी भी बदल सकती हैं।
आईएमडी के अनुसार जैसे ही यह मौसमी सिस्टम पहाड़ों से आगे बढ़ेगा और वहां बर्फबारी तेज होगी, उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकती हैं। इसका असर 13, 14 और 15 फरवरी के बीच दिखने की संभावना है, जब तापमान में फिर गिरावट आ सकती है। खासकर ग्वालियर और चंबल अंचल में ठंड ज्यादा महसूस होने के आसार हैं।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीती रात प्रदेश के 13 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। भोपाल और ग्वालियर में 10 डिग्री, इंदौर और जबलपुर में 11 डिग्री, जबकि उज्जैन में 12 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ। अगले दो दिन मौसम साफ रहने की संभावना है। 11 फरवरी को न्यूनतम और अधिकतम दोनों तापमान बढ़ेंगे और दिन में तेज धूप महसूस हो सकती है। 12 फरवरी को तापमान में 3 से 4 डिग्री और इजाफा संभव है, हालांकि सुबह और शाम हल्की ठंड बनी रह सकती है।
देशभर के मौसम की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 10 फरवरी से बारिश और बर्फबारी की संभावना बढ़ गई है। कुछ इलाकों में मध्यम बर्फबारी हो सकती है, जबकि 14 फरवरी को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फ गिरने के आसार हैं। 17 फरवरी के आसपास एक और कमजोर सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे कहीं-कहीं बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इसके बाद फरवरी के शेष दिनों में किसी बड़े मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना कम है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से बनी मौसमी कमी को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन हालिया बर्फबारी से यह कमी कुछ हद तक कम हुई है। कुल मिलाकर फरवरी में मौसम का यह उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है।
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