यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-125 है। मंगलवार, 27 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए गणतंत्र दिवस की परेड में दिखाए गए सेना के पशुओं के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
लद्दाख के दुष्कर मौसम और ऊँचाई में काम आने वाले डबल-हंपड बैक्ट्रियन ऊँट गलवान और नुब्रा पहली बार राजपथ पर परेड का हिस्सा बने हैं। यह भारतीय सेना के हाई-अल्टीट्यूड सप्लाई और लॉजिस्टिक रोल को उजागर करता है। इस बार सेना के पशु दस्ते में बैक्ट्रियन ऊँट, ज़ान्स्कर पोनियाँ, रैप्टर्स और भारतीय सेना कुत्तों को परेड में दिखाया गया है।
एयरलाइंस सरकार पर नए क्रू रेस्ट नियमों में ढील देने का दबाव बना रही हैं। पायलट संगठनों का कहना है कि सुरक्षा से समझौता हुआ तो इसकी कीमत यात्रियों को चुकानी पड़ेगी।
भारत में सड़क हादसों से मौतें दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं। सरकार V2V यानी ‘टॉकिंग कार’ तकनीक से टकराव और दुर्घटनाएं घटाने की उम्मीद कर रही है।
सोलर मैन्युफैक्चरिंग के अपस्ट्रीम सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कैपेक्स सब्सिडी पर विचार हो रहा है। सरकार मान रही है कि वेफर और पॉलीसिलिकॉन उत्पादन में भारत अभी पीछे है।
अमेरिका में भीषण बर्फीले तूफान ने जनजीवन ठप कर दिया है। खराब मौसम के चलते एक निजी जेट हादसे में सात लोगों की मौत हुई।
भारी बर्फबारी से मनाली और आसपास के इलाकों की सड़कें बंद हो गई हैं। प्रशासन ने पर्यटकों को गैर-ज़रूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
कोडीन सिरप की अवैध तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क के सरगना को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को बड़े ड्रग सप्लाई चैन का खुलासा होने की उम्मीद है।
राजस्थान के नागौर में 10 हजार किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया है। पुलिस इसे अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मान रही है।
पश्चिम बंगाल के दो गोदामों में भीषण आग से 16 लोगों के मारे जाने की आशंका है। राहत-बचाव कार्य जारी है और कई लोग अब भी लापता हैं।
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रिपब्लिक डे परेड में सेना के पशु योद्धा और बैक्ट्रियन ऊँटों की कहानी
आमतौर पर रिपब्लिक डे परेड में भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटनरी कॉर्प्स का प्रतिनिधित्व आर्मी डॉग स्क्वॉड करता रहा है। लेकिन इस साल पहली बार ऐसा हुआ जब डॉग्स के साथ-साथ बैक्ट्रियन ऊँट, ज़ांस्कर पोनियाँ और रैप्टर्स भी परेड का हिस्सा बने। यह बदलाव न सिर्फ प्रतीकात्मक था बल्कि भारतीय सेना में पशुओं की व्यापक और रणनीतिक भूमिका को भी सामने लाने वाला था।
रिमाउंट एंड वेटनरी कॉर्प्स भारतीय सेना का एक विशिष्ट कोर है, जो घोड़ों, खच्चरों और आर्मी डॉग्स समेत सेना में प्रयुक्त सभी पशुओं की ब्रीडिंग, देखभाल और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी निभाता है। इन्हीं पशुओं को लॉजिस्टिक, जासूसी और विभिन्न ऑपरेशनल जरूरतों के लिए तैयार किया जाता है। इस वर्ष की परेड में डबल हम्प वाले बैक्ट्रियन ऊँट नुब्रा और गलवान ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा और सबसे अधिक सराहना भी बटोरी।
बैक्ट्रियन ऊँट मुख्य रूप से लद्दाख क्षेत्र में पाए जाते हैं और आज एक गंभीर संकटग्रस्त स्थिति में पहुंच चुके हैं। ये ऊँट अत्यंत विषम परिस्थितियों में जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखते हैं। अत्यधिक ठंड, तेज अल्ट्रावायलेट रेडिएशन, भोजन और पानी की कमी जैसी परिस्थितियों में भी ये लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। इनके डबल हम्प ऊर्जा संग्रह में मदद करते हैं और इनकी विशेष लाल रक्त कोशिकाएं कम ऑक्सीजन वाले उच्च हिमालयी इलाकों में भी प्रभावी ढंग से काम करती हैं, जहां इंसान और मशीनें अक्सर जवाब दे देती हैं।
यही कारण है कि भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में आज भी इन ऊँटों का उपयोग सामान ढोने और रसद आपूर्ति के लिए करती है। हालांकि, इनकी संख्या में भारी गिरावट के पीछे कई ऐतिहासिक और पर्यावरणीय कारण रहे हैं। कभी सिल्क रूट के व्यापार में इन ऊँटों की अहम भूमिका थी, लेकिन 1962 के भारत चीन युद्ध के बाद सीमाएं सील हो गईं और पारंपरिक व्यापार मार्ग बंद हो गए। इसके साथ ही इनकी उपयोगिता घटती चली गई। आवास में बदलाव, सर्दियों में चारे की कमी और मांस व चमड़े के लिए शिकार ने भी इनकी आबादी को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
आज स्थिति यह है कि दुनिया में वाइल्ड बैक्ट्रियन ऊँटों की संख्या करीब एक हजार रह गई है, जबकि भारत में इनकी संख्या लगभग 365 के आसपास सिमट चुकी है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह आंकड़े जंगली बैक्ट्रियन ऊँटों के हैं, जबकि पालतू बैक्ट्रियन ऊँटों की संख्या विश्व में कहीं अधिक है। लद्दाख की नुब्रा घाटी में बचे ऊँट या तो पर्यटन गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे हैं या फिर सेना और संरक्षण प्रयासों के तहत देखरेख में रखे गए हैं।
रिपब्लिक डे परेड में पहली बार इन ऊँटों की भागीदारी न सिर्फ उनकी भव्य उपस्थिति का प्रदर्शन थी, बल्कि यह उनके संरक्षण और सैन्य उपयोग दोनों की अहमियत को रेखांकित करने का अवसर भी बनी। लद्दाख से दिल्ली तक लाए गए ये ऊँट अपनी गरिमामय चाल और शांत स्वभाव के साथ परेड में एक अलग ही प्रभाव छोड़ गए।
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अमेरिका से भारत तक सर्दी का कहर और मौसम की चेतावनी
अमेरिका में आए भीषण विंटर स्टॉर्म ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। अब तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका के अलग अलग राज्यों में कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी सर्दी की तस्वीर है जिसने सामान्य जीवन को पूरी तरह जकड़ लिया है। नॉर्थ ईस्ट से लेकर साउथ तक लाखों लोग बिना बिजली और हीटिंग के बेहद कम तापमान में रातें गुजारने को मजबूर हैं।
बर्फीले तूफान का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा। सड़कों पर आवाजाही ठप है, हवाई सेवाएं बड़े पैमाने पर रद्द की गई हैं और स्कूलों को बंद करना पड़ा है। न्यू इंग्लैंड से लेकर करीब 1300 मील लंबे इलाके में एक फीट से ज्यादा बर्फ जम चुकी है। नेशनल वेदर सर्विस के मुताबिक उत्तरी इलाकों में 20 इंच तक बर्फ रिकॉर्ड की गई है। तेज हवाओं और शून्य से नीचे चले गए तापमान ने हालात और खतरनाक बना दिए हैं।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। आर्कटिक क्षेत्र से आने वाली बेहद ठंडी हवाएं अमेरिका की ओर बढ़ रही हैं, जिससे बर्फ और आइस की समस्या और गहराने की आशंका है। इस वीकेंड ईस्ट कोस्ट के कुछ हिस्सों में एक और विंटर स्टॉर्म की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही मौतों का आंकड़ा बढ़ने की भी चेतावनी दी गई है। कई इलाकों में हिमस्खलन के कारण लोगों की जान गई है। कंसास में 28 वर्षीय एक शिक्षक की बर्फ में दबने से मौत हो गई, जबकि न्यूयॉर्क सिटी में अकेले इस वीकेंड आठ लोगों की सर्दी से मौत दर्ज की गई है।
बिजली आपूर्ति ठप होना संकट की बड़ी वजह बनकर सामने आया है। सोमवार शाम तक लाखों लोग बिजली के बिना थे। दक्षिणी राज्यों में हालात इसलिए और खराब हैं क्योंकि वहां की पावर लाइनें जम चुकी हैं या टूटकर गिर गई हैं। राहत एजेंसियों ने आपात केंद्रों में बेड, कंबल, गर्म पानी और जनरेटर भेजे हैं। कई विश्वविद्यालयों ने कक्षाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। कुछ शहरों के मेयरों का कहना है कि सड़कों पर सन्नाटा किसी लॉकडाउन के बाद जैसा महसूस हो रहा है।
हवाई यातायात पर इसका भारी असर पड़ा है। सोमवार को अमेरिका में 12 हजार से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि रविवार को लगभग 45 प्रतिशत फ्लाइट्स कैंसिल हुईं, जिसे कोविड के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान माना जा रहा है। डलास फोर्ट वर्थ जैसे बड़े एयरपोर्ट भी तूफान की चपेट में रहे। न्यूयॉर्क सिटी में कई साल बाद 8 से 15 इंच तक बर्फ देखी गई। स्कूल बंद हैं और करीब पांच लाख छात्र ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े हैं, हालांकि इतनी कड़ाके की ठंड में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बहस भी छिड़ी हुई है।
मौसम विभागों का कहना है कि अमेरिका के कई हिस्सों में ठंड का यह दौर अभी जारी रह सकता है। इसी बीच अगर भारत की बात करें तो यहां भी मौसम को लेकर चेतावनियां जारी की गई हैं। भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी जारी है। कश्मीर में लगातार हो रही बर्फ के कारण सड़कें बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में बिजली और अन्य बुनियादी सेवाएं भी बाधित हैं।
यानी एक तरफ अमेरिका रिकॉर्डतोड़ सर्दी से जूझ रहा है, वहीं भारत में भी मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है और आने वाले दिनों में सतर्क रहने की जरूरत साफ दिखाई दे रही है।
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