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मनरेगा से जुड़े नए बिल के पास होने के बाद क्या-क्या बदल जाएगा?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-92 है। मंगलवार, 16 दिसंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सरकार के मनरेगा से संबंधित नए बिल और ठंड और प्रदूषण से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट। 


मुख्य सुर्खियां

यमुना एक्सप्रेस वे में मंगलवार सुबह 4 बजे कोहरे के चलते 7 बसें और 3 कारें टकरा गईं। दैनिक भास्कर के अनुसार हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई।


दिल्ली में मंगलवार सुबह AQI 377 रहा। राज्य सरकार ने कक्षा 5 तक के स्टूडेंट्स के लिए पूरी तरह ऑनलाइन क्लास शुरू करने का निर्देश दिया है।


केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने राज्य और केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को पेरी-अर्बन इलाकों में प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रीज़ की जांच करने और एमिशन को कंट्रोल में रखने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।


लोकसभा में SHANETI बिल यानि Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India बिल पेश किया गया। इसमें निजी कंपनियों को लाइसेंस लेकर काम करने की अनुमति देने की बात कही गई है। 


देश में 216 बांध ऐसे हैं जिनको तुरंत मरम्मत की ज़रूरत है। ये सभी डैम स्टेज 2 में रखे गए हैं यानि इनमें बड़ी संरचनात्मक कमी है जिसको नज़र अंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है।    


मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में पर्यटक अब कोर एरिया में फ़ोटो या वीडियो नहीं बना सकेंगे। प्रदेश में 1 दिसंबर से ही नाईट सफारी पर बैन है।

विस्तृत चर्चा

मनरेगा योजना में प्रस्तावित बदलाव

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) दो दशकों से भी पुरानी एक ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, जिसे वर्ष 2005 में मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने लॉन्च किया था। यह योजना ग्रामीण आबादी को कम से कम 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करती है। वर्तमान में, करीब 8.61 करोड़ परिवार इस योजना का लाभ ले रहे हैं और 12.16 करोड़ लोगों के पास मनरेगा का जॉब कार्ड है।

केंद्र सरकार इस योजना में कई बदलाव करने जा रही है, जिसके लिए संसद में एक बिल लाया जाएगा। एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट से “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन” किया जाए। इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है।

पीक फार्मिंग सीजन के दौरान रोजगार पर रोक

प्रस्तावित सबसे महत्वपूर्ण संभावित बदलावों में से एक यह है कि पीक फार्मिंग सीजन (जैसे हार्वेस्टिंग के समय) में यह योजना होल्ड पर चली जाएगी। इसका मतलब है कि ग्रामीण मजदूरों को इस योजना के तहत मजदूरी नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने आस-पास खेतों में ही काम ढूंढना पड़ेगा।

यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि किसानों की यह शिकायत रही है कि उन्हें खेती से जुड़े कामों के लिए मजदूर नहीं मिलते। रिपोर्टिंग के दौरान भी यह देखा गया है कि बड़े किसान मजदूरों की कमी के चलते काम करने में असमर्थता जताते रहे हैं (उदाहरण के लिए, खरगोन में मिर्च किसानों का मैनुअली काम होना)। इस कदम को एक समाधान के तौर पर देखा जा रहा है ताकि मजदूर खेतों में काम कर सकें और किसानों को मजदूर मिलने लगें।

रोजगार की गारंटी और ‘नो वर्क पीरियड’

योजना के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, पीक एग्रीकल्चर सीजन के दौरान 60 दिन का ‘नो वर्क पीरियड’ होगा।

वित्तीय भार में बदलाव

इस योजना का वित्तीय भार अब राज्य सरकारों को भी वहन करना होगा। पहले, वेजेस (मजदूरी) का 100% खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी। हालांकि, मटेरियल कॉस्ट राज्य सरकारें वहन करती रही हैं।

प्रस्तावित बदलाव के तहत:

11 नॉर्थ ईस्टर्न और हिल स्टेट्स में, राज्य सरकारें योजना का 10% वित्तीय भार वहन करेंगी।

बाकी के 19 राज्य और यूनियन टेरिटरीज में, राज्य सरकारें 40% वित्तीय भार वहन करेंगी, जबकि बाकी केंद्र सरकार फंड करेगी।

वर्ष 2024-25 में, इस योजना पर कुल 1.4 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जिसकी 100% सैलरी केंद्र सरकार ने दी थी। हालांकि, किस राज्य पर कितना बोझ बढ़ेगा, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है।

योजना का महत्व और आलोचना

मनरेगा ग्रामीण आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण योजना रही है। हालांकि, मोदी सरकार इसकी आलोचना करती रही है, इसे यूपीए सरकार की विफलताओं का एक पुलिंदा या स्मारक (मॉन्यूमेंट) बताती रही है। इसके बावजूद, नई सरकार भी नाम बदलकर इस योजना को जारी रख रही है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इसके महत्व को दर्शाता है।


मौसम और दुर्घटना अपडेट

मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा

मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक बहुत बड़ा एक्सीडेंट हुआ। यह हादसा रात के 2:00 बजे के आसपास हुआ, जब दृश्यता (विजिबिलिटी) लगभग जीरो थी। उस समय रोड पर 10 से 15 मिनट आगे तक कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।

इस धुंध के कारण एक के बाद एक गाड़ियां टकराती चली गईं (चेन कोलैप्स)। इस हादसे में सात बसें और तीन कारें शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक, सबसे पहले तीन कारें आपस में टकराईं, जिसके तुरंत बाद पीछे से आ रही एक स्लीपर बस उनमें घुस गई। ड्राइवर को ब्रेक लगाने का वक्त नहीं मिला; हालांकि स्पीड सामान्य थी, लेकिन धुंध ने सब कुछ छुपाकर रखा था।

हादसे की वजह और नुकसान

यह हादसा इतना तेज था कि बसों और कारों में टक्कर के बाद आग लग गई थी। अंदर फंसे पैसेंजर्स को बाहर निकलने में मुश्किल हो रही थी।

इस हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है।

करीब 25 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया है, और पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी की भी हालत गंभीर नहीं है।

मथुरा के एसएसपी ने बताया कि एक्सीडेंट की सबसे बड़ी वजह लो विजिबिलिटी और घनी धुंध थी।

सरकारी प्रतिक्रिया और सहायता

आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की 11 गाड़ियां मौके पर थीं। पुलिस और एंबुलेंस टीम भी पहुंची थी, जिन्होंने घायलों को बचाया और अस्पताल पहुंचाया। जली हुई बसों को रोड से हटा दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिनकी मौत हुई है, उनके परिजनों के लिए ₹2 लाख की मदद का ऐलान किया है। सरकार ने ड्राइवरों के लिए एडवाइजरी जारी की है ताकि वे सावधानी बरतें और अपने प्लांस उसी हिसाब से बनाएं।

हवाई सफर पर कोहरे का असर

घने कोहरे वाले मौसम का असर हवाई सफर पर भी देखा जा रहा है। 16 दिसंबर को इंडिगो एयरलाइन ने 50 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं, खासकर नॉर्थ इंडिया में सुबह के कोहरे की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट से कई फ्लाइट्स या तो रद्द कर दी गई हैं या देरी से चल रही हैं।

इंडिगो ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। दिल्ली एयरपोर्ट ने भी कहा है कि कई फ्लाइट्स बाधित हो रही हैं, और यात्रियों की सहायता के लिए ग्राउंड स्टाफ को टर्मिनल्स पर तैनात किया गया है।

आईएमडी (IMD) का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक सुबह और रात के वक्त घनी धुंध बनी रहेगी। आम जनता को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे धुंध को नजरअंदाज न करें। अगर आप सड़क से यात्रा कर रहे हैं, तो गति कम रखें, और यात्रा से पहले अपनी यात्रा के अपडेट्स जरूर ले लें।

यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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