मध्य प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया है। राज्य में सड़क हादसों की रोकथाम और समग्र जिम्मेदारी संभालने के लिए सरकार एक लीड एजेंसी के गठन की तैयारी कर रही है। इस एजेंसी के अंतर्गत रोड सेफ्टी कमिश्नर नामक नया पद सृजित किया जाएगा, जिसे अतिरिक्त सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी के रूप में तैनात किया जाएगा। यह फैसला सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय की समिति के उस निर्देश के अनुरूप है, जिसमें सभी राज्यों से एक समर्पित एजेंसी गठित करने की सिफारिश की गई थी।
सरकार के अनुसार, इस एजेंसी का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ते सड़क हादसों की प्रवृत्ति को नियंत्रित करना और परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग तथा शहरी निकायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। एजेंसी राज्य के ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करने, हेलमेट और सीट बेल्ट अनुपालन सुनिश्चित करने, नशे की हालत में वाहन चलाने की रोकथाम करने और सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर काम करेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, इस एजेंसी में लगभग 20 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव है। परिवहन विभाग इस पूरी योजना का नोडल विभाग होगा और कैबिनेट को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया में है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही एजेंसी औपचारिक रूप से कार्य शुरू कर देगी।
एजेंसी की प्रमुख प्राथमिकता सड़क दुर्घटना के बाद “स्वर्णिम घंटे” के भीतर घायल व्यक्ति को चिकित्सीय सहायता पहुँचाने की व्यवस्था में सुधार लाना होगी। इसके साथ ही दोपहिया चालकों में हेलमेट न पहनने, चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट की अनदेखी, तेज रफ्तार और नशे की हालत में वाहन चलाने जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण के लिए निगरानी तंत्र को सुदृढ़ किया जाएगा। सड़कों पर घूमते पशुओं से होने वाले हादसों की रोकथाम पर भी एजेंसी काम करेगी।
हालांकि यह पहल सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या यह एजेंसी जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला पाएगी? क्या पुलिस, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा? क्या ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और स्वर्णिम घंटे में मदद पहुंचाने की योजनाएं व्यवहार में सफल होंगी?ग्राउंड रिपोर्ट ने विगत माह ही राज्य में सड़क सुरक्षा पर विस्तृत डेटा रिपोर्ट प्रकशित की है। इनमें खामियों और कमी के बिंदुओं को उजागर किया गया था। रिपोर्ट के ठीक बाद सेफ्टी कमिश्नर की नियुक्ति एक सकारात्मक कदम है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई एजेंसी उन अधूरे प्रयासों को किस तरह आगे बढ़ाती है और उन्हें अमल में लाती है।
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