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मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 10 घंटे तक बिजली कटौती, कई जिलों में विरोध प्रदर्शन

अक्टूबर के अंत में किसानों के रबी की फसल की बुवाई करनी है, राज्य में जारी बिजली कटौती ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बिजली कटौती के विरोध में राजगढ़ में प्रदर्शन | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी
बिजली कटौती के विरोध में राजगढ़ में प्रदर्शन | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी

मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के ग्रामीण इलाकों में रात के समय 2-10 घंटे तक अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। इससे परेशान ग्रामीण सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

सीहोर के कोठरी में किसानों ने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे जाम किया तो गुना में बिजली विभाग के दफ्तर पर ताले लगा दिए गए। राजगढ़, भोपाल, श्योपुर , ग्वालियर समेत 18 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन दर्ज किये गए।

ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले के मुताबिक राज्य में बारिश की अनियमितता और तापमान में वृद्धी से बिजली की मांग अचानक बढ़ी है, इस अतिरिक्त मांग को पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

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राज्य में बिजली कटौती और विरोध प्रदर्शन की वजहों को समझने की हमने कोशिश की है।

राजगढ़ में 3-4 घंटे बिजली कटौती

Water and electricity charges increased in Madhya Pradesh
बिजली सबस्टेशन, सांची, मध्य प्रदेश । फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

राजगढ़, खिलचीपुर ब्लॉक के नाटाराम गांव के किसान रामचंद्र बताते हैं कि पिछले आठ दिनों से गांव में रात के समय नियमित रूप से 3 से 4 घंटे बिजली काटी जा रही है। दिन की कटौती का तो कोई अंदाजा ही नहीं रहता। विद्युत विभाग लोड शेडिंग का मैसेज भेजकर सीधे सप्लाई काट देता है।

देवलिकला गांव के रहने वाले किसान संगठन के प्रदेश प्रभारी भगवान सिंह पटेल इस स्थिति पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहते हैं, “ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे में से महज 12 से 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। रात निकालना मुश्किल हो गया है।”

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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नियमों के मुताबिक लोड शेडिंग का मतलब ग्रिड की सुरक्षा के लिए की जाने वाली जानबूझकर बिजली कटौती है। जब राज्य में बिजली की मांग उपलब्ध आपूर्ति से ज्यादा हो जाती है, तो सिस्टम को ब्लैकआउट से बचाने के लिए फीडरों की सप्लाई कुछ समय के लिए बंद कर दी जाती है। लेकिन सवाल यही है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ रही है?

दरअसल मध्य प्रदेश में अक्टूबर में समान्यत: 11 हज़ार मेगावॉट बिजली की मांग रहती है, जो इस वर्ष 14-17 हज़ार मेगावॉट पर पहुंच गई है। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में इस समय 800 मेगवॉट बिजली की कमी है। ऊर्जा विभाग इस कमी को पूरा करने के लिए पावर एक्चेंज से बिजली खरीदने रही है और अन्य विकल्पों पर विचार कर रही है।

पूर्व ऊर्जा मंत्री के आरोप

राजगढ़ में पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह खींची के नेतृत्व में कांग्रेस ने विशाल विरोध प्रदर्शन । फोटो: फेसबुक/ प्रियव्रत सिंह
राजगढ़ में पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह खींची के नेतृत्व में कांग्रेस ने विशाल विरोध प्रदर्शन । फोटो: फेसबुक/ प्रियव्रत सिंह

इसी बीच 14 अक्टूबर को राजगढ़ में पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह खींची के नेतृत्व में कांग्रेस ने विशाल विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर उन्होंने राजगढ़ विद्युत विभाग के महाप्रबंधक देवेंद्र सिंह मेहरा को बुलवाकर जल्द व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम भी दिया।

प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मेहरा ने बताया कि प्रदेशभर में इस समय 35 प्रतिशत और राजगढ़ में 6 प्रतिशत डिमांड बढ़ी हुई है। कम वर्षा के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है और मॉनसून में मेंटेनेंस के कारण कोल पावर प्लांट भी देरी से शुरु हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से बात चल रही है और समस्या जल्द हल करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह खींची इन तर्कों से सहमत नहीं हैं। वे आरोप लगाते हुए कहते हैं कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में 26 हजार मेगावाट की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी है, जो 2021 में 21 हजार मेगावाट थी। राज्य में निजी और सरकारी दोनों पावर प्लांट हैं और मेरिट ऑर्डर डिस्पैच के आधार पर जरूरत पड़ने पर महंगी बिजली भी खरीदी जा सकती है। लेकिन जानबूझकर सरकारी जनरेटिंग कंपनी का उत्पादन रोका जा रहा है और कोयला भी नहीं खरीदा जा रहा। प्रियव्रत का आरोप है कि सरकार फ्री स्कीमों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, बिजली की चिंता कम है। वे याद दिलाते हैं कि जब वे खुद मंत्री थे, तब 15 से 16 हजार मेगावाट की डिमांड आसानी से पूरी की जाती थी, जबकि अब 17 हजार मेगावाट तक की डिमांड पूरी नहीं हो पा रही है।

पावर एक्सचेंज पर महंगी बिजली

विद्युत प्रवाह पर 14 अक्टूबर की स्थिति
विद्युत प्रवाह पर 14 अक्टूबर की स्थिति

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के ‘विद्युत प्रवाह’ पोर्टल के लाइव आंकड़ों के मुताबिक 14 अक्तूबर को दोपहर 1:15 से 1:30 बजे के बीच राज्य की मांग 16,294 मेगावाट थी और नेशनल पावर एक्सचेंज पर रेट सिर्फ 1.72 रुपये प्रति यूनिट चल रहा था। इसी वजह से सरकार 1,495 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद रही थी। लेकिन देर रात 11:00 से 11:15 बजे तक ग्रिड की स्थित पूरी तरह उलट गई देर रात तक राज्य की कुल मांग दिन के मुकाबले घटकर 13,980 मेगावाट पहुंच गई। लेकिन इसी समय एक्सचेंज रेट 10 रुपये प्रति यूनिट तक चढ़ गया। नतीजतन अतिरिक्त खरीद शून्य हो गई।

इन आंकड़ों के मुताबिक, रात में मांग घटने के बावजूद यह भारी वित्तीय अंतर ही ग्रामीण फीडरों पर लोड शेडिंग का मुख्य कारण बन रहा है। पूर्व ऊर्जा मंत्री खींची के मुताबिक राज्य का अपना घरेलू उत्पादन कम रहने और रात के समय ₹10 यूनिट की महंगी बिजली न खरीदे जाने के कारण ही ग्रामीण इलाकों में कटौती का दबाव बढ़ रहा है।

ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले के मुताबिक राज्य में बारिश की अनियमितता तापमान में कमी न आने के कारण अक्टूबर में मांग अचानक बढ़ी है। उनका कहना है कि अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने फ्री प्रेस जर्नल को बताया कि मानसून के दौरान कोयले से बिजली का उत्पादन 1% से 2% तक कम हो जाता है। कोयले से बिजली उत्पादन को अधिकतम करने और मेंटेनेंस (रखरखाव)से गुजर रहे बिजली संयंत्रों को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। तोमर ने कहा कि “राज्य में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। बिजली की मांग को पूरा करने के लिए जलविद्युत संयंत्रों (हाइडेल पावर प्लांट) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसानों को 10 घंटे बिजली देने और अन्य उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि राज्य में कई जिलों में किसान 10 घंटे बिजली न मिलने के आरोप लगा रहे हैं। रायसेन में किसानों का कहना है कि उन्हें केवल 2-4 घंटे ही बिजली मिल रही है। इधर राजगढ़ में खेती की बिजली तो पर्याप्त मिल रही है लेकिन ग्रामीण इलाकों में घरेलू बिजली कटौती जारी है।

राज्य में इस समय खरीफ की फसल की कटाई चल रही है, अक्टूबर के अंत में रबी की फसल की बुवाई शुरु होगी। ऐसे में किसानों को बुवाई के लिए पानी की ज़रुरत होगी। अगर जल्द बिजली संकट नहीं सुलझाया गया तो किसानों की फसलें प्रभावित हो सकती है। यह संकट और बड़ा बन सकता है क्योंकि राज्य के कई जिलों में अल नीनो की वजह से औसत से कम बारिश हुई है और कई जलाशयों में पानी कमी है।

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Author

  • Abdul Wasim Ansari is an independent journalist based in Rajgarh, Madhya Pradesh, bringing nearly a decade of experience in journalism since 2014. His work focuses on reporting from the grassroots level in the region.

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