एक नई रिपोर्ट “बियॉन्ड स्किन एंड बोन्स: ए 25 ईयर एनालिसिस ऑफ टाइगर सीजर्स फ्रॉम 2000 टू जून 2025” ने बाघों की अवैध तस्करी की भयानक तस्वीर सामने रखी है। पिछले 25 सालों में दुनिया भर में कुल 2,551 केसों में 3,808 बाघों या उनके हिस्सों को जब्त किया गया है। सिर्फ पिछले पांच सालों में हर महीने 9 बाघ पकड़े गए हैं। जबकि जंगली बाघों की संख्या दुनिया भर में अभी भी सिर्फ 3,700 से 5,500 के बीच है। यानी शिकार और तस्करी रोकने की कोशिशें अपराधियों की चालों से बहुत पीछे हैं।
बाघ तस्करी का फैलता जाल
यह संकट पूरी दुनिया में फैला है, लेकिन सबसे ज़्यादा असर 13 टाइगर-रेंज देशों में दिख रहा है। कुल जब्तियों में से 77 फीसदी इन्हीं देशों में हुई हैं। इनमें भारत सबसे आगे है, उसके बाद चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश हैं। यहां तक कि मेक्सिको, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे बाघ-रहित देशों में भी ज़िंदा शावक पालतू जानवरों के रूप में पकड़े गए हैं।
2020 से जून 2025 के बीच दुनिया भर में 765 छापों में 573 बाघ बरामद हुए। 2019 और 2023 में ये आंकड़ा सबसे ज़्यादा रहा। इस दौरान हर साल 130 से अधिक केस सामने आए हैं । अब तस्कर पूरा बाघ (जिंदा या मरा हुआ) भेजने लगे हैं। पहले जहां 2000 के दशक में सिर्फ 10 फीसदी केस ऐसे थे, अब ये बढ़कर 40% हो गए हैं। इसकी बड़ी वजह कैप्टिव फार्म्स, पालतू बाघों का फैशन, और टैक्सिडर्मी (स्टफ किए हुए जानवरों) की बढ़ती मांग बताई जा रही है।
बदलता ट्रेंड, बढ़ता खतरा
पहले तस्करी में खाल और हड्डियों की हिस्सेदारी 90 फीसदी तक थी, लेकिन अब नाखून और दांत की मांग तेजी से बढ़ी है, खासकर ज्वेलरी बनाने के लिए। कई बार एक ही केस में तेंदुए, पैंगोलिन या भालू जैसे और जानवर भी शामिल मिलते हैं। ये “स्पीशीज़ मिक्सिंग” का नया चलन इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है।
भारत-बांग्लादेश की सीमाओं के पास के रिज़र्व, इंडोनेशिया के जंगल, और वियतनाम-लाओस बॉर्डर अब इस गतिविधि के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बन चुके हैं। तस्करी के रूट भी छोटे हो गए हैं, यानी अब स्थानीय शिकारी सीधे खरीदारों तक माल पहुंचा रहे हैं। इससे बड़े नेटवर्क पकड़ में नहीं आते, लेकिन कारोबार जारी है, खतरनाक और चालाक तरीके से।
भारत की स्थिति
भारत के पास दुनिया के सबसे ज़्यादा जंगली बाघ हैं, इसलिए सबसे ज़्यादा केस भी यहीं पकड़े गए हैं। भारत में कुल 880 केसों में 981 बाघ जब्त किये गए हैं। गौरतलब है कि ये पिछले 25 सालों की सबसे बड़ी संख्या है।
भारत में सबसे ज़्यादा मामले महाराष्ट्र (142), मध्य प्रदेश (132), कर्नाटक (88), उत्तर प्रदेश (80) और पश्चिम बंगाल से हैं। इन इलाकों में अब भी जंगली बाघों का शिकार बढ़ रहा है।
साल 2025 के शुरुआती महीनों में ही 23 बाघ जब्त किए जा चुके हैं। एक तरफ तो यह मजबूत कार्रवाई दिखाता है, तो दूसरी तरफ ये भी साफ करता है कि शिकार अब भी बड़ी चुनौती है।
यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर जांच तंत्र, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मांग पर सख्ती नहीं बढ़ी, तो आने वाले सालों में बाघों की दहाड़ खामोश हो। भारत अभी भी इस जंग का किला और मोर्चा दोनों है। वक्त आ गया है कि देश अपनी कोशिशें दोगुनी करे, वरना जंगलों से बाघ सच में गायब हो जाएंगे।
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