प्रदेश की सबसे बड़ी कपास मंडियों में शामिल आनंद नगर कपास मंडी में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) की खरीदी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। खरीदी लिमिट घटाए जाने के आरोपों को लेकर किसानों ने सोमवार को मंडी परिसर और मंडी गेट पर प्रदर्शन किया, जिससे मंडी की खरीदी प्रक्रिया करीब दो घंटे तक बाधित रही। हालात बिगड़ने पर किसानों ने ट्रैक्टर अड़ाकर मंडी गेट और बाद में चित्तौड़–भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाया।
किसानों का आरोप है कि प्रति एकड़ तय मानकों के अनुसार खरीदी नहीं की जा रही। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्य भारत मालवा–निमाड़ प्रांत संगठन मंत्री गोपाल पाटीदार ने कहा,
पहले कहा गया कि 5 क्विंटल खरीदी होगी, फिर 12 क्विंटल की बात आई और अब दोबारा 5 क्विंटल पर ले आए। स्लॉट में जितना दर्ज है, उतना भी नहीं लिया जा रहा। यह पूरी व्यवस्था किसानों को भ्रम में रखने वाली है।
उन्होंने रात में खरीदी शुरू किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा,
दिन में खरीदी नहीं हुई, आंदोलन के बाद रात में कपास खरीदी जा रही है। यह सिस्टम की नाकामी है। किसान अन्न और कपास देता है, लेकिन उसे अपनी बात रखने के लिए सड़क जाम करनी पड़ती है।
प्रदर्शन बढ़ने पर प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। अपर कलेक्टर रेखा राठौड़, उप संचालक कृषि एस.एस. राजपूत और मंडी प्रशासन ने किसानों से बातचीत की, जिसके बाद रात में खरीदी प्रक्रिया शुरू कराई गई।
उप संचालक कृषि एस.एस. राजपूत ने खरीदी में देरी का कारण बताते हुए कहा,
जिनिंग परिसरों में पहले से बड़ी मात्रा में कपास जमा है। अधिक माल होने के कारण उसकी प्रोसेसिंग में समय लग रहा है, इसी वजह से खरीदी प्रभावित हो रही है।
वहीं अपर कलेक्टर रेखा राठौड़ ने कहा कि खरीदी के आंकड़े पिछले वर्ष से अधिक हैं। उन्होंने कहा,
अब तक करीब 7 लाख क्विंटल कपास की खरीदी की जा चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में कई गुना ज्यादा है। किसानों के विरोध के बाद तय किया गया है कि नियमों के अनुसार पंजीकृत किसानों का कपास खरीदा जाएगा।
हालांकि किसानों का कहना है कि सीसीआई की खरीदी प्रक्रिया शुरू से ही जटिल रही है। शुरुआती दौर में ऑनलाइन पंजीयन और स्लॉट बुकिंग को लेकर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किसानों को समय पर स्लॉट नहीं मिला और जिन किसानों को स्लॉट मिला, वे खरीदी लिमिट घटने के कारण पूरी उपज नहीं बेच सके।

इस असंतोष का असर केवल खरगोन तक सीमित नहीं रहा। भीकनगांव मंडी में बड़ी संख्या में किसान पहले से कपास लेकर पहुंचे थे, लेकिन खरीदी स्थगित होने के कारण उन्हें बिना पूर्व सूचना के लौटना पड़ा। किसानों का आरोप है कि इससे उन्हें परिवहन भाड़ा, मजदूरी और समय का नुकसान हुआ, जिसके विरोध में उन्होंने खंडवा–बड़ौदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम किया।
इससे पहले सनावद, कसरावद और करही क्षेत्रों में भी स्लॉट बुकिंग और खरीदी प्रक्रिया को लेकर किसान आंदोलन कर चुके हैं। किसानों का आरोप है कि सीसीआई बार-बार नियम बदल रही है। कभी खरीदी लिमिट घटाई जाती है, तो कभी खरीदी अचानक रोक दी जाती है। इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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