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मध्य प्रदेश के बजट में किसान सबसे ऊपर

Soybean farmer mandi

मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार, 18 फ़रवरी को राज्य विधानसभा में 2026-27 का 4,38,317 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इसमें कृषि के लिए 39,448 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो कुल खर्च का 9 प्रतिशत है। पिछले साल यह हिस्सा 5.6 प्रतिशत था। यानी एक साल में कृषि का बजट हिस्सा लगभग दोगुना हो गया। हाल के वर्षों में यह सबसे बड़ा आवंटन है। सरकार ने 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” घोषित किया है और सिंचाई, फसल बीमा, सीधे नकद सहायता और प्राकृतिक खेती से जुड़ी योजनाओं की घोषणा की है। कुल बजट पिछले साल 12 मार्च 2025 को पेश किए गए 4,21,032 करोड़ रुपये के बजट से 4.1 प्रतिशत ज्यादा है।

लेकिन जैसे ही देवड़ा ने बजट पढ़ना शुरू किया, कांग्रेस विधायकों ने बीच में विरोध किया। उनका कहना था कि राज्य पर बढ़ता कर्ज और नया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों से किए वादों को कमजोर कर देगा।

बजट में क्या घोषणाएं की गईं?

देवड़ा ने अपने भाषण की शुरुआत “प्रजा सुखे सुखं राज्ञः” श्लोक से की और कहा कि बजट का मकसद किसानों की समृद्धि है।

उन्होंने कहा, “सरकार खेत में उत्पादन से लेकर फसल की बिक्री तक हर स्तर पर किसानों की मदद कर रही है।”

सबसे बड़ी घोषणा कृषक उन्नति योजना के तहत एक लाख सोलर सिंचाई पंप लगाने की है, जिस पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह योजना मुख्यमंत्री मोहन यादव की खेती में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की पहल से जुड़ी है। देवड़ा ने कहा कि योजना शुरू होने के बाद से अब तक 6.70 लाख किसान लाभ ले चुके हैं।

कृषक उन्नति योजना के लिए कुल 5,500 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसी योजना के तहत इस साल 6.69 लाख किसानों को 337 करोड़ रुपये की सीधी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

कहां खर्च होंगे पैसे?

किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना मिलाकर हर पात्र किसान परिवार को सालाना 12,000 रुपये सीधे दिए जाते हैं। सरकार का कहना है कि इससे छोटे और सीमांत किसानों को खाद और बीज खरीदने में मदद मिलती है।

प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 1,299 करोड़ रुपये रखे गए हैं। अल्पकालिक कृषि ऋण के लिए 25,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गरीब और कमजोर किसान परिवारों के लिए 793 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं।

देवड़ा ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना को और मजबूत किया गया है। इस योजना में बाजार भाव एमएसपी से कम होने पर किसानों को अंतर की राशि दी जाती है। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्य भी इस मॉडल में रुचि दिखा रहे हैं।

बजट दस्तावेज के मुताबिक राज्य के गैर-कर राजस्व में सिंचाई का योगदान 5 प्रतिशत और वन विभाग का 8 प्रतिशत है। कुल बजट का 14 प्रतिशत ग्रामीण और शहरी विकास पर खर्च होगा, जिसमें खेती से जुड़े बुनियादी ढांचे भी शामिल हैं।

मध्य प्रदेश की स्थिति

राज्य की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 39 प्रतिशत है। देवड़ा ने कहा कि मध्य प्रदेश दलहन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है और गेहूं व तिलहन उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

लेकिन बजट से एक दिन पहले जारी आर्थिक सर्वेक्षण में कुल दाल उत्पादन में 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। किसान नेता डॉ. सुनीलम का कहना है कि कम दाम और सरकारी आयात के कारण किसान दालों से दूर हो रहे हैं।

उन्होंने ग्राउंड रिपोर्ट से कहा, “एक तरफ सरकार कहती है दाल उगाओ। दूसरी तरफ आयात करती है। किसान को सही दाम नहीं मिलता।”

उनका कहना है कि ज्यादातर दलहन किसानों के लिए एमएसपी सिर्फ कागज पर है। “सरकार बहुत कम खरीद करती है, चाहे बाजार भाव गिरा हुआ हो,” उन्होंने कहा।

डॉ. सुनीलम के मुताबिक आयात का समय भी समस्या बढ़ाता है। “अप्रैल-मई में फसल बाजार में आती है। उससे पहले ही मार्च में आयात का आदेश दे दिया जाता है। इससे बाजार भाव गिर जाता है,” उन्होंने कहा।

उनका कहना है कि इसी वजह से किसान दाल छोड़कर गेहूं की ओर जा रहे हैं, क्योंकि सरकार राशन योजना के लिए गेहूं की खरीद ज्यादा भरोसेमंद तरीके से करती है।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार चाहती है कि किसान को लाभकारी दाम मिले तो आयात रोकना होगा और समय पर खरीद शुरू करनी होगी।”

बजट में 21.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक और प्राकृतिक खेती के तहत दर्ज किया गया है। प्राकृतिक खेती को एक लाख हेक्टेयर और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने कहा है कि किसान योजनाओं को मूल्य संवर्धन कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा ताकि खेत के बाहर भी आय बढ़े।

बजट में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम भी लाया गया है। इसके तहत ग्रामीण और कृषि मजदूरों को 125 दिन का मजदूरी रोजगार देने की गारंटी होगी। काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। इसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी और उनकी डिजिटल निगरानी होगी।

क्या बोला विपक्ष?

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाषण के दौरान पूछा, “जब राज्य घाटे में है तो सरकार इतने बड़े वादे कैसे पूरे करेगी?” कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने को कहा, लेकिन विरोध जारी रहा।

सत्र के बाद सिंघार ने कहा, “राज्य पर 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। बजट सत्र से पहले 5,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया गया। इससे साफ है कि राज्य कर्ज में और डूब रहा है।”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र पटवारी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की आलोचना की। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश के किसानों की मुख्य फसलें कपास, सोयाबीन और मक्का हैं। अब इन्हें अमेरिका से आयात किया जाएगा। इससे किसानों को नुकसान होगा।”

पटवारी ने एएनआई से कहा कि अगर मुख्यमंत्री सच में किसान वर्ष मनाना चाहते हैं तो उन्हें केंद्र से इस समझौते में बदलाव की मांग करनी चाहिए।

सरकार ने अभी तक व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है।


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