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Loksabha Election 2024: प्राकृतिक सम्पन्नता के बावजूद बदहाली झेलती शहडोल लोकसभा

Loksabha Election 2024: प्राकृतिक सम्पन्नता के बावजूद बदहाली झेलती शहडोल लोकसभा
Loksabha Election 2024: प्राकृतिक सम्पन्नता के बावजूद बदहाली झेलती शहडोल लोकसभा

Loksabha Election 2024: शहडोल लोकसभा मध्यप्रदेश के एक अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा है। इस सीट से दलबीर सिंह, अजीत जोगी जैसे बड़े नेता चुनाव हारे हैं। यहां बहुत ही कम देखने को मिला है की कोई पार्टी लगातार 3-4 बार जीती हो। आइये जानते है इस सीट की राजनीतिक कहानी और समझते हैं जनता के मुद्दे। 

शहडोल में शहडोल (जयसिंघ नगर, जैतपुर), अनूपपुर (कोतमा, अनूपपुर, पुष्पराजगढ़), उमरिया (बांधवगढ़, मानपुर) और कटनी की 1 विधानसभा बड़वारा को मिला कर यहां कुल 8 विधानसभाएं हैं जिनमे से 7 पर भाजपा जीती है। पुष्पराजगढ़ से जीतने वाले कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को, इस बार लोकसभा के उम्मीदवार हैं। 

क्या है शहडोल की राजनीतिक कहानी 

शहडोल सीट की कहानी जलेबी की तरह गुंथी हुई है। यहां अब तक हुए 13 लोकसभा चुनावों में से पांच बार दलपत सिंह परस्ते जीते है। दलपत सिंह ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय जीता था, उसके बाद वे जनता दल से जीते, फिर जनता पार्टी से जीते और आखिर में दो बार भाजपा से जीते। कांग्रेस के बड़े नेता और  केंद्रीय मंत्री दलबीर सिंह यहां से तीन बार, उनकी पत्नी राजेश नंदिनी सिंह भी एक बार कांग्रेस से चुनाव जीती हैं। यहां की वर्तमान भाजपा सांसद हिमाद्रि सिंह दलबीर और राजेश नंदिनी सिंह की पुत्री हैं। 

भाजपा ने एक बार फिर से हिमाद्रि सिंह पर भरोसा जताया है। हालांकि हिमाद्रि सिंह के माता पिता दोनों ही कांग्रेसी थे। हिमाद्रि ने अपना पहला चुनाव, जो की एक उपचुनाव था कांग्रेस से ही लड़ा था, लेकिन हार गईं थी। इसके बाद हिमाद्रि सिंह का विवाह भाजपा नेता नरेंद्र मारावी से हो गया, जिन्हे 2009 के लोकसभा चुनाव में हिमाद्रि सिंह की मां ने हराया था। अब एक बार फिर हिमाद्रि सिंह शहडोल से अपना दवा पेशा कर रहीं हैं। 

कांग्रेस ने हिमाद्रि सिंह के सामने फुंदेलाल मार्को को खड़ा किया है। फुंदेलाल पुष्पराजगढ़ विधानसभा से 2018 से लगातार जीतते आए हैं। उन्होंने 2018 के चुनाव में हिमाद्रि सिंह के पति नरेंद्र मारावी को भी हराया था। शहडोल की सिर्फ एक ही विधानसभा में कांग्रेस जीती है, और उसके नायक फुंदेलाल हैं। इस बार कांग्रेस ने उनपर अपना दांव खेला है।    

क्या हैं शहडोल की जनता के मुद्दे 

लोकसभा चुनाव के बाद ही हिमाद्रि सिंह मातृत्व अवकाश पर चली गईं। उसके बाद कोरोना काल में भी जनसंपर्क नहीं हो पाया। इन सब के बाद जब स्थितियां सामान्य हुईं तब भी जनता की उनके सांसद से मुलाकात मुश्किल ही रही। हालांकि हिमाद्रि सिंह ने जनता के लिए कार्य किये, उनके प्रयास से शहडोल से कुछ ट्रेनें चलीं, मसलन शहडोल से नागपुर की ट्रेन। उन्होंने अपने एमपीलैड (MPLAD) फण्ड जो की 15 करोड़ मिला था, उसका 98 फीसदी खर्च किया है। उन्होंने इससे सामुदायिक भवन, पुलिया, स्ट्रीट लाइट, इत्यादि में खर्च किया है। 

कटनी के बड़वारा का करौंदी (इसे भौगोलिक दृष्टि से भारत का केंद्र बिंदु भी माना जाता है) गांव को हिमाद्रि आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन वहां उपयुक्त विकास नहीं हुआ है। हिमाद्रि सिंह ने कहा था कि इस गांव को इस प्रकार विकसित किया जाएगा की इसकी राष्ट्रीय पहचान बनेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक अखबार के मुताबिक अब गांव वालों ने आदर्श ग्राम का बोर्ड भी हटा दिया है। 


भारत का भौगोलिक केंद्र, करौंदी

अनूपपुर में करपा मार्ग की सड़क, उमरिया में केंद्रीय विद्यालय और जैतपुर में मखरी जलाशय ये ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिन्हे स्वीकृति तो मिल गई है लेकिन इनका काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। वहीं जिले के धाधोकुई पंचायत के दाल गांव में सड़क, बिजली और पानी तीनों की किल्लत है। यहां के निवासी कई किलोमीटर के कठिन पथरीले रास्तों में चलकर, 200 मीटर गहरी खाई से पानी निकलते हैं।  

इन सब के अलावा शहडोल लोकसभा में नल-जल योजना का भी उचित क्रियांवयन नहीं हुआ है। शहडोल में 236, उमरिया में 72, और अनूपपुर में 204 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जहां नल जल योजना का पूरी तरह से क्रियांवयन नहीं हुआ है। पेय जल संकट यहां की जनता का बड़ा मुद्दा है। 

शहडोल में स्वास्थ्य व्यवस्था भी ठीक नहीं हैं, अक्सर खबर आती है की एम्बुलेंस के देरी से पहुंचने से किसी जान चली गई। शहडोल संभाग में एक 300 बेड का मेडिकल कॉलेज शहडोल में है। पिछले दिनों इस मेडिकल कॉलेज में बेड कम पड़ गए  व लोगों द्वारा 100 बेड बढ़ाने की मांग भी की गई। 

शहडोल के आदिवासी क्षेत्रों में दागने की कुप्रथा का प्रचलन भी अभी बंद नहीं हुआ है। आए दिन खबर आती है की 3-3 माह के बच्चों को गर्म सलाखों से कई बार दागा जाता है, इनमें से कई बच्चों की मृत्य भी हो जाती है। 2023 में महिला एवं बाल विकास विभाग के एक सर्वे में 11,774 ऐसे परिवार थे जो अभी भी बच्चों को दागना एक प्रकार की चिकित्सा समझते थे। इस कुप्रथा का उपाय निकलना और इन परिवारों को जागरूक करना प्रशाशन के लिए अत्यावश्यक है। 

इसके अलावा शहडोल में मेथेन गैस भी मिलती है। सोहागपुर में कोयला खदानें भी है, जिससे यहां की हवा प्रभावित है। शहडोल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 85 है, जो यहां के लोगों के लॉन्ग टर्म स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। 

शहडोल उद्द्योग, जंगल, प्राकृतिक महल सब कुछ है। कुछ विकास हुआ है लेकिन बहुत कुछ बाकी रह गया है। शहडोल में मतदान पहले चरण में, यानी 19 अप्रैल को होना है। अब यह नतीजों के बाद ही पता चलेगा की शहडोल की जनता बदलाव चुनती है या हिमाद्रि सिंह पर भरोसा जताती है।   

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  • Journalist, focused on environmental reporting, exploring the intersections of wildlife, ecology, and social justice. Passionate about highlighting the environmental impacts on marginalized communities, including women, tribal groups, the economically vulnerable, and LGBTQ+ individuals.

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