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जीएसटी 2.0 किसानों के लिए राहत की सम्भावना

मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?
मूंग की फसल पर लगा रसायनिक होने का दाग एमपी के किसानों के लिए बनेगा मुसीबत?

जीएसटी (Goods and Services Tax) की नई दरें केंद्र सरकार द्वारा 22 सितंबर को लागू कर दी गयी हैं। इसे जीएसटी 2.0 (GST 2.0) कहा जा रहा है। माना जा रहा है की इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा। इसके अंतर्गत  कृषि उपकरणों, सिंचाई साधनों, उर्वरकों और डेयरी उत्पादों पर टैक्स दरें घटा दी गई हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब खरीफ की फसल खेतों से निकल रही है और किसान रबी की बुवाई की तैयारियों में जुटे हैं। 

18% से घटाकर 12%

पहले जहाँ कृषि उपकरणों और ट्रैक्टर के पुर्जों पर 18% तक जीएसटी लगता था, वहीं अब इसे घटाकर 12% या 5% कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, ट्रैक्टर के टायर, ट्यूब और हाइड्रोलिक पार्ट्स पर पहले 18% टैक्स लिया जाता था, लेकिन अब यह दर 12% रह गई है। इसी तरह, ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर जैसे आधुनिक सिंचाई उपकरणों पर पहले 12% जीएसटी लागू था, जिसे घटाकर 5% कर दिया गया है।


जैव-कीटनाशकों और सूक्ष्म-पोषक तत्वों की बात करें तो पहले इन पर 12% टैक्स देना पड़ता था, लेकिन अब जीएसटी 2.0 के तहत यह दर घटकर 5% हो गई है। डेयरी उत्पादों में भी कुछ बदलाव किए गए है। दूध और पनीर जैसे दैनिक उपयोग के उत्पादों पर जीएसटी ख़त्म कर दिया गया है।


पिछले कुछ वर्षों से महंगे उर्वरक, कीटनाशक और उपकरणों ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाला हुआ था। जीएसटी की उच्च दरों की वजह से ट्रैक्टर या सिंचाई साधन खरीदना छोटे और मझोले किसानों के लिए कठिन हो गया था। जीएसटी 2.0 के नए ढांचे से उन्हें बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई किसान 9 लाख रुपये का ट्रैक्टर खरीदता है, तो पहले उसे लगभग 1.6 लाख रुपये जीएसटी देना पड़ता था। अब दरों में कटौती के बाद यही टैक्स लगभग 95 हजार रुपये के आसपास रह जाएगा। यानी किसान को सीधे 60–70 हजार रुपये की बचत होगी। इसी तरह, 35–50 एचपी (HP) क्षमता वाले ट्रैक्टरों पर भी अब 25–63 हजार रुपये तक की बचत होगी।

सरकार  ने दावा किया है कि जीएसटी 2.0 की दरों में कटौती से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण खरीदना आसान होगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और श्रम पर निर्भरता घटेगी। यही नहीं, सिंचाई साधनों के सस्ते होने से जल प्रबंधन बेहतर होगा और पानी की बर्बादी कम होने की भी संभावनाएं हैं।

इसके अतिरिक्त टिकाऊ और प्राकृतिक खेती को ध्यान में रखते हुए जैव-उर्वरकों और बायो-पेस्टीसाइड्स (जैव कीटनाशक ) पर टैक्स कटौती की गई है। पहले 12% जीएसटी किसानों को इन्हें अपनाने से रोकता था, लेकिन अब 5% पर मिलने से इनकी मांग बढ़ने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। इससे खेती को दीर्घकालिक टिकाऊ बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

डेयरी और पशुपालन को राहत

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। छोटे पशुपालकों के लिए डेयरी उपकरण और चारा महंगे साबित होते थे। पशुपालन क्षेत्र ग्रामीण आय का बड़ा स्रोत है, और इसमें राहत देने से किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी। दूध और पनीर जैसे उत्पादों पर टैक्स घटने से उनकी लागत भी कम होगी और उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा।

ट्रैक्टर और उनके पुर्जों पर टैक्स घटने से मरम्मत और संचालन लागत कम होगी। यानी किसानों को उपज मंडियों तक पहुँचाने में पहले से कम खर्च आएगा। इससे उनकी बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और उपज का दाम बेहतर मिलेगा।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स में कटौती अपने आप में पर्याप्त नहीं है। किसानों को असली राहत तभी मिलेगी जब मंडियों में उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर समय से भुगतान मिलेगा। इसके अलावा, उपकरण सस्ते होने के बावजूद छोटे किसान इन्हें खरीदने के लिए वित्तीय सहयोग चाहते हैं। ऐसे में सरकार को क्रेडिट और सब्सिडी योजनाओं को भी और मजबूत करना होगा। 

कुल मिलाकर, जीएसटी 2.0 किसानों के लिए राहत भरा पैकेज साबित हो सकता है। पुराने ढांचे में जहां 12% से 18% तक टैक्स की वजह से उपकरण और इनपुट महंगे हो जाते थे, वहीं नए ढांचे ने इन्हें 5% से 12% के बीच ला दिया है। इसका असर सीधे किसानों की जेब पर पड़ेगा और खेती की लागत घटेगी।

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