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बाघों के अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिकिंग पैटर्न में क्या बदलाव आया? 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 77वां एपिसोड है। शुक्रवार, 28 नवंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए टाइगर की अंतर्राष्ट्रीय ट्रैफिकिंग में आए बदलावों और खाद वितरण केंद्र में आदिवासी महिला की मौत के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ग्रेट निकोबार होलिस्टिक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से संबंधित केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की सीलबंद हाई-पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि वह इस बारे में सिर्फ़ पब्लिक में मौजूद दलीलों पर ही विचार करेगा।


दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर अब सुप्रीम कोर्ट नियमित सुनवाई करेगा। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हर साल दिवाली के बाद यह मामला कोर्ट में आता है और सर्दी के बाद गायब हो जाता है।


IMD ने शुक्रवार को बताया कि चक्रवाती तूफ़ान ‘दितवाह’ तमिलनाडु, पुदुच्चेरी, और साउथ आंध्र तट की ओर बढ़ रहा है। इसके यहां 30 नवंबर तक पहुंचने की संभावना है। इसके चलते तमिलनाडु के 4 ज़िलों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।


होंग कोंग में इमारत में आग के लगने के बाद अब तक कम से कम 83 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 300 लापता हैं। स्थानीय पुलिस ने 3 कंस्ट्रक्शन फर्म के अधिकारीयों को गिरफ्तार किया है।


केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी औद्योगिक क्षेत्र (industrial estate) ने पहले से पर्यावरणीय मंज़ूरी प्राप्त कर रखी है, तो उसके भीतर आने वाली व्यक्तिगत औद्योगिक इकाइयों को अलग से पर्यावरणीय मंज़ूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को अतिवृष्टि, बाढ और पीला मौजेक कीट व्याधि से हुई फसल क्षति से प्रभावित 3 लाख 5 हजार 410 किसानों के बैंक खातों में 238 करोड़ 78 लाख रूपये की राशि अंतरित की। 

विस्तृत चर्चा

बाघों की अवैध तस्करी (चंद्रप्रताप तिवारी के साथ)

यह चर्चा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्था एबीसी न्यूज़ द्वारा उजागर की गई एक महत्वपूर्ण खबर पर आधारित है, जो टाइगर की ट्रैफिकिंग को लेकर है और भारत के लिए चिंताजनक है। 

ट्रैफिकिंग के आंकड़े और डेटा

हालिया आंकड़े (2020-2025): ट्रैफिक रिपोर्ट बताती है कि 2020 से लेकर 2025 तक जानवरों की ट्रैफिकिंग में काफी उछाल आया है, खासकर बाघों की ट्रैफिकिंग में। इस अवधि के बीच कुल 765 जब्तियां (Seizures) हुई हैं, जिनमें से 573 बाघों की जब्तियां थीं।

दीर्घकालिक आंकड़े (सन 2000 से): यदि इसकी तुलना सन 2000 के डेटा से की जाए (यानी पिछले 25 साल का अनुमान), तो ढाई हजार से अधिक ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें कम से कम 3,800 टाइगर शामिल रहे हैं।

पीक वर्ष: यह मामला 2019 में अपने उच्चतम स्तर पर था (जहां 141 जब्तियां हुईं थीं), और 2023 में भी 139 जब्तियां हुई थीं।

ट्रैफिकिंग के पैटर्न में बदलाव

रिपोर्ट में तस्करी के तरीके में आए बदलावों को भी उजागर किया गया है।

पुराना ट्रेंड (सन 2000 का दशक): उस समय आमतौर पर जानवरों के पार्ट्स जब्त होते थे—जैसे बाघों के जबड़े, नाखून आदि।

नया ट्रेंड (2019 के बाद): अभी जो जब्तियां हो रही हैं, उनमें यह सामने आया है कि जिंदा एनिमल (Live Pet) जब्त किए गए हैं। जिंदा जानवरों की बरामदगी के खासतौर पर दो संकेत हैं: या तो उन्हें कहीं कैप्टिव ब्रीडिंग में रखा जा रहा है, या फिर उन्हें एग्जोटिक पेट्स के शौकीनों के लिए लिया जा रहा है।

भारत के लिए निष्कर्ष

भारत 13 टाइगर रेंज कंट्रीज में शामिल है, और इन 13 देशों में भारत में सबसे ज्यादा ट्रैफिकिंग के इंसिडेंट्स हुए हैं। रिपोर्ट में इंडिया और बांग्लादेश के टाइगर रिजर्व्स को की हॉटस्पॉट्स के रूप में पहचाना गया है। इन हॉटस्पॉट्स पर ट्रैफिकिंग को कम करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप (Interventions) बहुत जरूरी हैं।


खाद वितरण केंद्र में महिला की मौत (अब्दुल वासिम अंसारी के साथ)

यह खबर मध्य प्रदेश के गुना जिले से संबंधित है, जहां खाद खरीदने के लिए लाइन में लगी एक महिला की मौत हो गई। घटना गुना जिले के बमोरी क्षेत्र के बागेरी डबल लाख खाद वितरण केंद्र की है।

घटना का विवरण: यह घटना एक आदिवासी महिला से जुड़ी है। मीडिया ख़बरों में महिला का नाम भूरी बाई बताया गया है। यह महिला लगातार कई दिनों से खाद खरीदने के लिए लाइन में लग रही थी। मीडिया खबरों के अनुसार, जब तक महिला का नंबर आता था, तब तक खाद वितरण बंद हो चुका होता था। तीसरे दिन उसका स्वास्थ्य बिगड़ा। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

प्रशासनिक लापरवाही: इस हादसे ने खाद की पर्याप्त उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के सरकारी दावों की पोल खोल दी है। तबीयत बिगड़ने के बाद जब महिला को बमोरी स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल ले जाया गया, तो उसे एंबुलेंस भी नहीं मिली। यह खबर एक साथ उन तीन प्रशासनिक नाकामियों को उजागर कर रही है, जिनमें बीमार होने पर अस्पताल पहुंचाने और मृत होने के बाद शव वाहन उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।

घटना के बाद व्यवस्थाओं में सुधार: महिला की मौत के बाद व्यवस्थाओं में सुधार किया गया है। बदलाव यह है कि हर दिन शाम को 4:30 बजे तक खाद वितरण हो रहा था, लेकिन गुरुवार को 6:30 बजे तक खाद बांटी गई। व्यवस्थाओं के लिए पुलिस और राजस्व अमला भी मौजूद रहा।

मृतक महिला के बेटे मनोज को घर पर ही खाद पहुंचाने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही अब किसानों को 10-10 कट्टे खाद बांटी जा रही है।

यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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