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राजस्थान में ट्रांसमिशन की कमी से 2 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी फंसी

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-124 है। शनिवार, 24 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स के बारे में जिनके पास नहीं है पर्याप्त ट्रांसमिशन लाइन और दिल्ली व कश्मीर में हुए हालिया मौसमी बदलावों के बारे में।

मुख्य सुर्खियां

दिल्ली में तेज़ बारिश के बाद तापमान एक ही दिन में करीब 11 डिग्री गिर गया। कई इलाकों में ठंड अचानक बढ़ी और दिन भर बादल छाए रहे। हवा साफ़ हुई, लेकिन ठंड ने लोगों को परेशान किया।


जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और बर्फबारी से सड़कें बंद हो गईं। श्रीनगर एयरपोर्ट पर उड़ानें रुकीं और कई स्कूल बंद करने पड़े। बिजली और पानी की सप्लाई भी कई जगह प्रभावित हुई।


बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदूषण आदेश न मानने पर नगर आयुक्त की सैलरी रोकने को कहा। कोर्ट ने साफ कहा कि चेतावनियों के बाद भी कोई ठोस काम नहीं हुआ। अगली सुनवाई में और सख्त कदम उठ सकते हैं।


केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने माना कि बिजली लाइनों की कमी से सोलर और पवन ऊर्जा रोकी जा रही है। बिजली उत्पादन तेज़ है, लेकिन उसे ले जाने की तैयारी पीछे है। नई ट्रांसमिशन लाइनें बनेंगी, तब हालात सुधरेंगे।


दिल्ली की जहरीली हवा से खिलाड़ियों की ट्रेनिंग प्रभावित हो रही है। कई एथलीट सर्दियों में शहर छोड़कर बाहर अभ्यास करते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण दिल और फेफड़ों दोनों को नुकसान पहुंचाता है।


बालाघाट में प्रशासन ने अवैध खनन में लगे कई वाहन जब्त किए। बिना अनुमति खनन से सरकारी नियमों की खुली अनदेखी हो रही थी। मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।


रातापानी के कैमरा ट्रैप में दुर्लभ वन्य जीव ढोल की मौजूदगी दर्ज हुई है। साल 2026 में अब तक यह छठी वन्य प्राणी प्रजाति है, जो कैमरे में कैद हुई है।


विस्तृत चर्चा

रिन्यूएबल एनर्जी करटेलमेंट की असली वजह

मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बताया है कि देश में 2 गीगावाट से अधिक रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं जिनके पास अभी ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी नहीं है और इनमें से ज्यादातर राजस्थान में हैं। उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी करटेलमेंट की असली वजह प्रोजेक्ट्स के तेजी से चालू होने और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के बनने में लगने वाले समय के बीच तालमेल की कमी है। जहां कोयला आधारित पावर प्लांट को शुरू होने में पांच से छह साल लगते हैं, वहीं सोलर और विंड प्रोजेक्ट एक से दो साल में तैयार हो जाते हैं, जबकि ट्रांसमिशन लाइनों को बनने में अब भी तीन से पांच साल लग रहे हैं। इसी वजह से कई बार डिस्कॉम कोयला आधारित बिजली को प्राथमिकता देते हैं और रिन्यूएबल एनर्जी को सीमित कर दिया जाता है, जिसका सीधा नुकसान उन डेवलपर्स को होता है जिन्होंने भारी निवेश किया है।

सारंगी ने बताया कि करीब चार गीगावाट क्षमता बिना कनेक्टिविटी के पड़ी थी, जिसमें से कुछ हिस्सा दिसंबर में खेतड़ी नरेला ट्रांसमिशन लाइन चालू होने के बाद इस्तेमाल होने लगा है और बाकी दो गीगावाट बिजली फतेहगढ़ ट्रांसमिशन लाइन शुरू होने के बाद निकाली जा सकेगी, जो अगले एक महीने में चालू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि नवंबर 2025 तक भारत ने 44.51 गीगावाट नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी है, और कुल इंस्टॉल क्षमता 253.96 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि नेशनल ट्रांसमिशन नेटवर्क के पांच लाख सर्किट किलोमीटर पूरे होने से आगे चलकर रिन्यूएबल पावर की निकासी आसान होने की उम्मीद है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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