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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: जनजातीय परिषद क्यों कर रही विरोध?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-123 है। शुक्रवार, 23 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर जनजातीय परिषद और प्रशासन के बीच क्या है विवाद और कश्मीर में हुए हालिया मौसमी बदलावों के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

छत्तीसगढ़ के एक स्टील प्लांट में फ्लाई ऐश रिसाव से छह मजदूरों की मौत हो गई और पांच की हालत गंभीर है। हादसा अत्यधिक तापमान के कारण हुआ।


पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना शुरू की है, जिसके तहत लगभग 65 लाख परिवारों को ₹10 लाख तक कैशलेस इलाज मिलेगा। योजना सरकारी और कुछ निजी अस्पतालों में लागू होगी।


नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के ड्राफ्ट में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने, टैरिफ सुधार और क्रॉस-सब्सिडी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसका लक्ष्य ऊर्जा सुरक्षा और कम-कार्बन उत्सर्जन करना है।


भारतीय कैबिनेट ने राशन कार्ड का इंतज़ार कर रहे 11.65 लाख लोगों और वेरिफिकेशन के दौरान बनी 82.27 लाख खाली जगहों को भरने के लिए नए फ़ूड सिक्योरिटी नियमों को मंज़ूरी दी है। यह पॉलिसी एक मल्टी-टियर शिकायत सिस्टम बनाएगी और नए सेंसस डेटा का इस्तेमाल करके यह सुनिश्चित करेगी कि योग्य परिवारों को अनाज मिले, साथ ही अयोग्य कार्डहोल्डर्स को हटाया जाए।


ओडिशा सरकार ने गुटखा समेत तंबाकू और निकोटीन वाले सभी खाद्य उत्पादों के निर्माण, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह रोक लगा दी है। 


उत्तर-पश्चिम दिल्ली के जलभराव प्रभावित इलाकों को लेकर दिल्ली सरकार ने 18 महीनों में सीवर और जल निकासी की समस्या खत्म करने का दावा किया है। इसके लिए नई ड्रेनेज लाइनों और सीवेज ट्रीटमेंट की योजना बनाई गई है।


दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और कोच चिंतित हैं, कई खेल शिविर शहर से बाहर शिफ्ट किए गए हैं। खिलाड़ियों की शिकायत पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने मामले पर संज्ञान लिया है।

विस्तृत चर्चा

जनजातीय अधिकार और विकास परियोजना का विवाद

ग्रेट निकोबार की जनजातीय परिषद ने आरोप लगाया है कि प्रशासन उन पर सरेंडर सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बना रहा है। यदि वे इस पर हस्ताक्षर करते हैं, तो 2004 की सुनामी से प्रभावित उनकी पुश्तैनी जमीनों पर उनके दावे समाप्त हो जाएंगे। आदिवासियों का कहना है कि उन्हें इस बैठक के एजेंडे के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

सुनामी के बाद का विस्थापन और पुनर्वास की मांग

2004 की सुनामी के बाद, निकोबारी समुदाय को उनके पैतृक गांवों से हटाकर राजीव नगर और न्यू चिंगेन जैसी बस्तियों में बसाया गया था।

पिछले कई वर्षों से ये लोग अपने पैतृक गांवों में वापस बसने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

निकोबारी लोग पारंपरिक रूप से इन जमीनों पर नारियल और स्क्रूपाइन उगाते हैं और मछली पकड़ने के लिए तटीय पानी का उपयोग करते हैं।

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का प्रभाव

परियोजना का विवरण: लगभग 81,000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एक सिविल-मिलिट्री एयरपोर्ट, एक टाउनशिप और 450 MVA का गैस और सोलर पावर प्लांट शामिल है।

पर्यावरणीय क्षति: इस प्रोजेक्ट के लिए 130 वर्ग किलोमीटर घने जंगल को हटाने की मंजूरी दी गई है।

आदिवासी रिजर्व का मुद्दा: परिषद का आरोप है कि उनसे 84 वर्ग किलोमीटर के आदिवासी रिजर्व को डीनोटिफाई करने के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) लिया गया था, लेकिन उन्हें प्रोजेक्ट के पूर्ण प्रभाव के बारे में नहीं बताया गया। बाद में परिषद ने इस NOC को रद्द कर दिया।


कश्मीर में मौसम का प्रकोप और संकट

तेज हवाएं और बुनियादी ढांचे को नुकसान कश्मीर के उत्तरी, दक्षिणी और मध्य इलाकों में अचानक आए भीषण तूफान ने भारी तबाही मचाई है।

हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रति घंटा और श्रीनगर एयरपोर्ट पर 85 किमी प्रति घंटा तक दर्ज की गई।

इस तूफान के कारण घरों की छतें उड़ गईं, पेड़ गिर गए और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। कई परिवार अपने घर छोड़कर बाहर भागने को मजबूर हो गए।

बिजली और संचार संकट

तूफान के कारण कश्मीर के लगभग 80% से 90% इलाकों में बिजली गुल हो गई।

बिजली की माँग 1900 मेगावाट थी, जबकि आपूर्ति केवल 300 मेगावाट रह गई। दक्षिण और मध्य कश्मीर के इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।

यातायात और परिवहन में बाधा

विमान सेवा: श्रीनगर एयरपोर्ट पर लगभग 17 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिससे कई यात्री फंस गए।

सड़क और रेल: भारी बर्फबारी और फिसलन के कारण श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे, मुगल रोड और सोनमर्ग रोड बंद कर दिए गए हैं। बनिहाल से बारामूला तक ट्रेन सेवा भी पूरी तरह बंद कर दी गई है।

प्रशासनिक चेतावनी और आगामी पूर्वानुमान

गुलमर्ग और ऊपरी इलाकों में डेढ़ से दो फीट तक बर्फबारी दर्ज की गई है।

श्रीनगर प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी के बाद एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस आने की संभावना है, जिससे फिर से बारिश और बर्फबारी हो सकती है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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