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केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-150 है। सोमवार, 23 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए क्यों केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर ग्रामीण और प्रशासन आया आमने-सामने।


मुख्य सुर्खियां

प्लास्टिक बोतलों के छोटे ढक्कनों से फैल रहे प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कोका-कोला, बिसलेरी, हिंदुस्तान यूनिलीवर व पेप्सिको जैसी बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी किया है। सुनवाई में कहा गया कि बोतलें तो किसी हद तक इकट्ठी हो जाती हैं, लेकिन अलग हो जाने वाले प्लास्टिक कैप कचरे में बिखरकर मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं।


भारत-अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के लीगल टेक्स्ट को फाइनल करने के लिए आज से वाशिंगटन डीसी में दोनों देशों के बीच बातचीत होने वाली थी। मगर अब इसे रीशेड्यूल कर दिया गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया था कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया है।  


दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने 17 श्रेणियों के उद्योगों को अक्टूबर तक सख्त प्रदूषण मानकों का पालन करने का निर्देश दिया है। आदेश के तहत उद्योगों को उत्सर्जन सीमा घटानी होंगी और चरणबद्ध तरीके से नई तकनीकें अपनानी होंगी।


हरियाणा में कचरा उठाने वाली गाड़ियों की औसतन 28% तक कमी है, जिससे डोर-टू-डोर कचरा उठाने में देरी हो रही है और रिहायशी इलाकों और पब्लिक जगहों पर कचरा बढ़ रहा है। यह बात खुद सीएम के आदेश पर हुए एक सर्वे की रिपोर्ट में कही गई है.


मंदसौर के गांधी सागर सैंक्चुअरी में कैराकल पर एक साइंटिफिक स्टडी शुरू हुई है। इस स्टडी को ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) कर रहा है। यह तीन महीने या मानसून का मौसम शुरू होने तक चलेगी।


नीमच जिले में 20 से 22 फरवरी तक विंटर वल्चर सेंसेस किया गया। इस दौरान कुल 507 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई।

विस्तृत चर्चा

केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवज़े पर असहमति और टकराव

केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका मुख्य हिस्सा दौधन बांध (Daudhan Dam) है। इस बांध के डूब क्षेत्र में छतरपुर के लगभग 20 गांव आ रहे हैं, जिनमें से कुछ गांव जंगल के कोर एरिया (Core Area) में स्थित हैं। हाल ही में यह मुद्दा तब और गरमा गया जब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने छतरपुर का दौरा किया और प्रभावित ग्रामीणों तथा सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने उन्हें अपनी समस्याओं का ज्ञापन सौंपा।

मुआवजे और पैकेज से जुड़ी विसंगतियां

ग्रामीणों का मुख्य विरोध मुआवजे की राशि को लेकर है। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

मौजूदा पैकेज: भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार, 18 वर्ष से ऊपर के प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग परिवार माना गया है और प्रति परिवार 12.5 लाख रुपये का पैकेज दिया गया है। जमीन के लिए 5 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर तय की गई है।

ग्रामीणों की मांग: ग्रामीणों का तर्क है कि आज के समय में 5 लाख रुपये में एक एकड़ जमीन कहीं नहीं मिलती, इसलिए वे कम से कम 25 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं।

महिलाओं की सुरक्षा की मांग: ग्रामीणों ने मांग की है कि पत्नियों के लिए अलग से राशि दी जाए। इसके पीछे तर्क यह है कि यदि पति पैसे खर्च कर देता है या किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है, तो पत्नी और बच्चों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

विरोध प्रदर्शन और संघर्ष का घटनाक्रम

मुआवजे को लेकर चल रही असहमतियों के बीच बांध का निर्माण कार्य तेज होने पर ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाया। 6 फरवरी को उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर बांध का काम रोक दिया। हालांकि प्रशासन ने एक महीने का समय मांगते हुए फिर से सर्वे करने और छूटे हुए लोगों के नाम जोड़ने का वादा किया।

मगर इसी बीच स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को एक फेसबुक लाइव के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने धरना दिया। आरोप है कि 10-11 फरवरी की रात पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग भी किया।

प्रमुख आरोप और अनिश्चितता

ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने इस पूरी प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। एक बड़ा आरोप यह है कि इस बांध का निर्माण ग्राम सभा की अनुमति के बिना शुरू कर दिया गया है। निचले स्तर के कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने सर्वे ठीक से नहीं किया और कई पात्र लोगों के नाम सूची से जानबूझकर काट दिए गए हैं।

वर्तमान में विरोध स्थगित है, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि नई सर्वे लिस्ट के बाद उन्हें पर्याप्त राहत राशि नहीं मिली, तो वे किसी भी कीमत पर बांध का काम शुरू नहीं होने देंगे।

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We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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