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कैलाश विजयवर्गीय ने भागीरथपुरा की तुलना धारावी से क्यों की?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-149 है। शनिवार, 21 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश के मंत्री ने क्यों कहा भागीरथपुरा में अशिक्षित लोग रहते हैं और कचरे की प्रोसेसिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ देशभर में ‘किसान सम्मेलन’ और विरोध अभियान शुरू करने की घोषणा की है। पहला सम्मेलन 24 फरवरी को भोपाल में होगा, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल होंगे। 


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में ग्रीन कवर बढ़ाना ही राजधानी के बिगड़ते एयर पॉल्यूशन से निपटने का एकमात्र टिकाऊ, लंबे समय का समाधान है। कोर्ट ने शहर में ग्रीनरी बढ़ाने के उपायों की मांग करने वाली एक आउट-ऑफ-टर्न पिटीशन पर सुनवाई करने के लिए सहमती भी जताई।


इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा मंज़ूर 1 लाख करोड़ रुपये के अर्बन चैलेंज फंड से रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को लोकल बॉडीज़ के साथ मिलकर प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव देने, उनके लिए फंडिंग सुरक्षित करने और पार्टनरशिप में सर्विसेज़ चलाने की इजाज़त मिलेगी।


NGT ने उत्तर प्रदेश सरकार को रेवेन्यू रिकॉर्ड और गजेटियर में सुआव का स्टेटस “नाले” से “नदी” करने का निर्देश दिया है। साथ ही, चेतावनी दी है कि ऐसा न करने पर कानून के तहत सज़ा हो सकती है।


शुक्रवार को मध्य प्रदेश के कई शहरों में आंधी और बारिश की स्थिति बनी रही। उज्जैन में सबसे ज्यादा 24 मिमी बारिश हुई तो वहीं भोपाल में 22.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया जो 7 साल में फरवरी में दर्ज किया गया सबसे कम तापमान है।

विस्तृत चर्चा 

Indore Contaminated Water Claims 25th Life: List of Victims Who Died So Far
विधानसभा में भागीरथपुरा पर चर्चा की गई। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी और राजनीतिक विवाद

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक गरमागरम बहस का विषय बन गया।

धारावी से तुलना और प्रशासनिक चुनौतियां: नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भागीरथपुरा की तुलना मुंबई के धारावी स्लम से की। उन्होंने तर्क दिया कि यह इलाका 80-90 साल पुराना है और अत्यधिक घनी आबादी वाला है, जिससे यहाँ साफ-सफाई और सीवर व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हुई।

विपक्ष के आरोप और ‘हेल्थ इमरजेंसी’: विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया और दावा किया कि मौतों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाई कोर्ट ने इस स्थिति को ‘हेल्थ इमरजेंसी’ जैसा बताया था। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि गंदे पानी की शिकायतों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई और अब इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है।

भोपाल की आदमपुर छावनी डंपिंग साइट पर कचरे के अंबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। फ़ोटो: पल्लव जैन/ग्राउंड रिपोर्ट

भोपाल में कचरा प्रबंधन और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

भोपाल की आदमपुर छावनी डंपिंग साइट पर कचरे के अंबार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन में लापरवाही के लिए अब केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि मेयर, पार्षद, अफसर और कलेक्टर तक सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। लापरवाही पाए जाने पर उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है और आपराधिक मामला भी दर्ज हो सकता है।

कचरे की वर्तमान स्थिति और निपटान की समस्या: आदमपुर छावनी में वर्तमान में लगभग 6 लाख टन पुराना कचरा जमा है, और प्रतिदिन शहर से 800-850 टन नया कचरा वहाँ पहुँचता है। समस्या यह है कि पुराने कचरे के वैज्ञानिक निपटान (प्रोसेसिंग) की गति बहुत धीमी रही है। विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पुराने कचरे को बायोमाइनिंग के जरिए पूरी तरह खत्म करने में कम से कम दो और साल लग सकते हैं।

नया प्रोटोकॉल और अनिवार्य नियम: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें कचरे का सेग्रगेशन (गीला, सूखा और अन्य श्रेणियों में अलग करना) अनिवार्य कर दिया गया है। हर वार्ड स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और कलेक्टर को इसकी नियमित निगरानी और रिपोर्ट पेश करनी होगी। इसके अलावा, डंपिंग साइट पर लगने वाली आग जैसी घटनाओं ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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