यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-117 है। शुक्रवार, 16 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भोपाल में SNHC 2026 नेशनल कॉन्फ्रेंस में कम जानी जाने वाली प्रजातियों के संरक्षण और ग्रेटर नोएडा में दूषित पानी से 70+ लोगों के बीमार होने के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
ग्रेटर नोएडा अल्फा 2 सेक्टर में दूषित पानी की सप्लाई से 70+ निवासी बीमार पड़ गए, जिनमें एक 19 साल का स्टूडेंट भी शामिल है जो हॉस्पिटल में एडमिट हुआ। जंग लगी और डैमेज पाइप्स की वजह से गैल्वनाइज्ड आयरन सप्लाई लाइन्स में लीकेज हो गया। GNIDA अधिकारियों ने इमरजेंसी में पाइपलाइन रिपेयर और रिजर्वायर क्लीनिंग का ऑर्डर दिया है।
भारत ने इजराइल में रहने वाले शहरियों के लिए एडवाइजरी जारी की, रीजनल टेंशन के बीच होशियार रहने, सेफ्टी गाइडलाइंस फॉलो करने और नॉन-एसेंशियल ट्रैवल से परहेज करने की हिदायत।
इस सर्दी पीक पावर डिमांड ने पिछली गर्मियों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। जनवरी में बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर रही। ठंड, हीटिंग और घरेलू इस्तेमाल से डिमांड तेज हुई। दिल्ली में 2.9 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडी सुबह रिकॉर्ड हुई। सफदरजंग स्टेशन पर टेम्परेचर सीजन का लोएस्ट रहा। अगले कुछ दिन ठंड बरकरार रहने का अंदेशा।
CM डॉ मोहन यादव ने रायसेन और राजगढ़ के लिए 3 इरिगेशन प्रोजेक्ट्स मंजूर किए। हर खेत तक पानी पहुंचाने का वादा। किसानों ने शुक्रिया अदा किया।
भोपाल में Society of Nature Healers Conservators and Local Tourism Dev SNHC 2026 नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन। कम जाने जाने वाली प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा।
विस्तृत चर्चा
भोपाल में कम चर्चित प्रजातियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन
यह पॉडकास्ट भोपाल में आयोजित होने वाली “फोर्थ नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लेसर नोन स्पीशीज ऑफ सेंट्रल इंडिया लैंडस्केप” के बारे में विस्तृत जानकारी देता है। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 16 से 18 जनवरी तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य उन प्रजातियों का संरक्षण करना है जिनके बारे में डेटा की कमी है, जिनका वितरण बहुत कम है और जो लुप्तप्राय हैं, लेकिन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
स्रोतों के अनुसार, इस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: कॉन्फ्रेंस का एजेंडा: पहले दिन मध्य भारत की कम चर्चित और लुप्तप्राय प्रजातियों की वर्तमान स्थिति और उनके संरक्षण की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दूसरे दिन नदी पारिस्थितिकी तंत्र (River Ecosystem) के संरक्षण और पुनर्जीवन में समुदाय (Community) की भूमिका पर चर्चा होगी।
आयोजन और विजन: इसका आयोजन भोपाल की एसएचसी (SHC) सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है। इसका मुख्य विजन युवाओं और वन्यजीव संरक्षण में लगे लोगों को जागरूक करना है ताकि इन प्रजातियों के प्रबंधन के लिए प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकें।
अपेक्षित परिणाम: इस सम्मेलन के माध्यम से शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों द्वारा वन विभाग, वन्यजीव संस्थानों और एनजीओ को महत्वपूर्ण सिफारिशें भेजी जाएंगी ताकि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके। यदि किसी प्रजाति के संबंध में डेटा की कमी है, तो उसे उपलब्ध कराने और विस्तृत शोध का सुझाव देने का कार्य भी यहाँ किया जाएगा。
महत्व: यह आयोजन पर्यावरण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन प्रजातियों के बारे में ज्ञान प्रदान करता है जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। “ग्राउंड रिपोर्ट” इस पूरे कार्यक्रम की गतिविधियों को कवर करेगा।
किसानों हेतु सिंचाई की 900 करोड़ की योजनाएं
इस पॉडकास्ट चर्चा में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्री परिषद की बैठक के उन निर्णयों पर प्रकाश डाला गया है, जो मध्य प्रदेश के किसानों की समृद्धि और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जुड़े हैं,।
इस चर्चा का मुख्य विवरण निम्नलिखित है: भारी निवेश और नई परियोजनाएं: मुख्यमंत्री ने प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों के किसानों के लिए लगभग ₹900 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
• क्षेत्रवार विकास:
राजगढ़ (सारंगपुर): मोहनपुरा नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए ₹396.21 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इससे 26 गांवों की 1140 हेक्टेयर भूमि को लाभ होगा और लगभग 10,400 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। रायसेन (भोजपुर): सुल्तानपुर उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए ₹115.99 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, जो 20 गांवों की 5700 हेक्टेयर भूमि को सींचेगी। रायसेन (उदयपुरा): बारना उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए ₹386.22 करोड़ की मंजूरी दी गई है, जिससे बरेली तहसील के 36 गांवों की 15,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई संभव हो सकेगी,।
किसान कल्याण वर्ष और भविष्य का लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है, जिसका उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना है। नदी जोड़ो परियोजनाएं: सरकार का लक्ष्य पार्वती-कालीसिंध-चंबल और केन-बेतवा लिंक परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है ताकि राज्य का लगभग संपूर्ण कृषि क्षेत्र सिंचित हो सके। सिंचाई क्षमता में वृद्धि: स्रोतों के अनुसार, वर्तमान में मध्य प्रदेश में सिंचित रकबा 56 लाख हेक्टेयर है, जिसे सरकार विस्तारित करना चाहती है (हालांकि स्रोत में लक्ष्य ’16 लाख हेक्टेयर’ बताया गया है, जो वर्तमान आंकड़े से कम होने के कारण संभवतः एक तथ्यात्मक त्रुटि हो सकती है)।
पॉडकास्ट यह स्पष्ट करता है कि मध्य प्रदेश सरकार का मुख्य ध्यान अब सिंचाई के बुनियादी ढांचे का विस्तार कर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।
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