यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-136 है। शनिवार, 7 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश में सिंचाई परियोजना के लिए कौन से टाइगर रिजर्व की ज़मीन मांगी गई और तमिलनाडु में क्यों मरे हज़ार कौवे?
मुख्य सुर्खियां
भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का एक फ्रेमवर्क जारी किया है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे कृषि और डेयरी उत्पादों पर अमेरिका को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है।
भारत ने अमेरिका से मक्का आयात को जीएम फूड संबंधी चिंताओं के चलते स्वीकार नहीं किया है। सरकार का कहना है कि इससे देश में जीएम फ़ूड प्रोडक्ट के लिए रास्ता खुल सकता है, जो किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम भरा है।
संयुक्त बयान के अनुसार भारत ने कुछ अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म या कम करने पर सहमति जताई है। इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु चारे के लिए रेड सोरघम, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।
भारत में बीते 4 साल में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 13% तक बढे हैं. वहीं ओरेवियन कैंसर सबसे अधिक खतरनाक साबित हुआ है. इसकी मृत्यु दर लगभग 61% है. वहीं यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल और राजस्थान में कैंसर के सबसे अधिक केस आए हैं.
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र के 75% खनिज विदर्भ में हैं, और दुनिया का सबसे अच्छा लौह अयस्क इस क्षेत्र में पाया जाता है, जिसमें इसे देश के स्टील हब में बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि यहां हजारों किसानों ने आत्महत्या की है, इसलिए यहां रोजगार के नए मौके बनाने की जरूरत है।
मध्य प्रदेश सरकार उज्जैन और जबलपुर में वाइल्डलाइफ-कम-रेस्क्यू सेंटर विकसित करेगी। उज्जैन में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘जंगल जू सफारी’ मॉडल पर परियोजना बनेगी, जिसमें रेस्क्यू सेंटर और इको-टूरिज्म सुविधाएं होंगी। पहला चरण 2026 से शुरू होकर 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य है।
विस्तृत चर्चा
नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (SC-NBWL) की स्टैंडिंग कमेटी ने मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व के लगभग 272 हेक्टेयर के डायवर्जन को मंज़ूरी देने की सिफारिश की है। ऐसा एक सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए किया जाना है। पूरी खबर बता रहे हैं पल्लव जैन।
मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व और सिंचाई परियोजनाओं का संघर्ष
कोपरा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से 272 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत ब्यारमा और कोपरा नदियों पर बांध बनाए जाएंगे, जिससे सागर जिले की 9900 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी, लेकिन इसमें 13 गांव डूब जाएंगे।
केन-बेतवा लिंक परियोजना से संबंध: यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व का निर्माण स्वयं केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व को हुए नुकसान की भरपाई (मुआवजे) के रूप में किया गया था। अब उसी मुआवजे वाले रिजर्व को भी नई सिंचाई परियोजना के लिए काटा जा रहा है।
वन्यजीवों के आवास पर प्रभाव: नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने चेतावनी दी है कि इस विकास कार्य से बाघों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यह क्षेत्र बाघों के अलावा तेंदुओं, भालू और अन्य प्रजातियों का भी घर है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों के हैबिटेट को बार-बार विस्थापित करने से उनका पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह बाधित होता है।
प्रशासनिक पक्ष और मुआवजा: सरकार ने डूबे हुए 272 हेक्टेयर जंगल के बदले टाइगर रिजर्व के अंदर ही 310 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर पेड़ लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, वन्यजीव अधिकारियों का एक तर्क यह भी है कि जलाशय एक “प्राकृतिक बाधा” (Natural Barrier) के रूप में काम करेगा, जिससे अवैध चराई (Grazing Pressure) कम हो सकती है और वन्यजीवों को फायदा हो सकता है।
चेन्नई और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लगभग 1500 कौवे मृत मिले हैं. इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने बर्ड फ्लू के लिए अलर्ट जारी कर दिया है. ख्हबर को विस्तार से जानते हैं वाहिद भट से.
तमिलनाडु में बर्ड फ्लू (H5N1) का प्रकोप
तमिलनाडु के चेन्नई में अचानक बड़ी संख्या में कौवों की मौत के बाद पूरे राज्य को अलर्ट पर रखा गया है।
कौवों की सामूहिक मृत्यु और वायरस की पुष्टि: जनवरी के आखिरी हफ्ते से फरवरी के शुरुआती दिनों तक चेन्नई के विभिन्न इलाकों में सड़कों, पेड़ों और छतों पर 1000 से 1500 कौवों की मौत दर्ज की गई। लैब रिपोर्टों ने पुष्टि की है कि यह H5N1 वायरस (बर्ड फ्लू) का मामला है।
सरकारी कार्रवाई और निगरानी: इस घटना को एक “अर्ली वार्निंग सिग्नल” मानते हुए तमिलनाडु सरकार ने पूरे राज्य में सर्विलांस बढ़ा दिया है। विशेष रूप से पोल्ट्री फॉर्म, बाजारों, वेटलैंड्स और वन्यजीव क्षेत्रों में मॉनिटरिंग तेज कर दी गई है। केंद्र सरकार ने भी बायोसिक्योरिटी और रिपोर्टिंग सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी है।
मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव और सावधानियां: स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, अब तक किसी इंसान में संक्रमण का मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इंसानों में H5N1 का संचरण दुर्लभ है, फिर भी लोगों को पोल्ट्री उत्पादों को अच्छी तरह पकाकर खाने की सलाह दी गई है।
आर्थिक और पारिस्थितिक चिंताएं: तमिलनाडु पोल्ट्री उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है, इसलिए यदि यह वायरस फार्मों तक पहुँचता है, तो आजीविका को भारी नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी पक्षी, जो अंतरराष्ट्रीय फ्लाईवे के माध्यम से चेन्नई के वेटलैंड्स में आते हैं, इस वायरस के वाहक हो सकते हैं।
इन चर्चाओं से स्पष्ट होता है कि जहां एक ओर तमिलनाडु स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए जैव-खतरों से जूझ रहा है, वहीं मध्य प्रदेश विकास की जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है।
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