यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-158 है। शुक्रवार, 06 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ आज के पॉडकास्ट में जानिए अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग से भारत के चावल निर्यात पर पड़ रहे असर के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। जिससे भारत में खरीफ सीजन से पहले यूरिया उत्पादन पर असर पड़ सकता है। यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो उर्वरक और कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
नवी मुंबई के बेलापुर हिल्स में लगी बड़ी जंगल की आग के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अवैध निर्माण, अतिक्रमण और हरित आवरण की कमी को बार-बार लगने वाली आग का कारण बताया है।
दिल्ली सरकार ने धूल प्रदूषण कम करने के लिए करीब 1,000 स्ट्रीटलाइटों पर वॉटर-मिस्ट स्प्रिंकलर लगाने की योजना शुरू की है। यह प्रणाली प्रदूषण हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पानी की बारीक फुहार से धूल को नियंत्रित करेगी और हर घंटे लगभग 2,000 लीटर पानी छिड़क सकेगी।
गुरुग्राम में पुलिस ने फर्जी अस्पताल, नकली मरीज और झूठे मेडिकल बिलों के जरिए करीब 1 करोड़ रुपये के बीमा घोटाले का खुलासा किया है। छापे में करीब 60 संदिग्ध बीमा क्लेम फाइलें और कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए।
मध्य प्रदेश में एमएसपी पर गेहूं की खरीदी 16 मार्च से शुरू होगी। हालांकि जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में यह 23 मार्च से शुरू होगी।
प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू होगा। इस दौरान नदी, तालाब सहित सभी जल संरचनाओं से कब्ज़े हटाकर उनका पुनरुद्धार किया जाएगा।
विस्तृत चर्चा
इजराइल-अमेरिका और ईरान जंग का भारतीय चावल पर असर
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष को एक सप्ताह बीत चुका है, जिसका असर अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दिखने लगा है। भुगतान की अनिश्चितता के कारण खाड़ी देशों (गल्फ रीजन) को भेजे जाने वाले शिपमेंट भारतीय बंदरगाहों पर अटक गए हैं।
इस स्थिति से बासमती चावल का व्यापार विशेष रूप से प्रभावित हुआ है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र भारतीय चावल का सबसे बड़ा बाजार है। भारत के कुल 60 लाख टन बासमती निर्यात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इसी क्षेत्र को जाता है, जिसमें सऊदी अरब, इराक, यूएई और ईरान प्रमुख आयातक हैं।
यह संकट ऐसे समय में आया है जब रमजान का महीना चल रहा है और इस दौरान खाड़ी देशों में भारतीय चावल की मांग अपने चरम पर होती है। जहाजों की आवाजाही बाधित होने से भारतीय निर्यातकों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निर्यातकों के सामने परिचालन और वित्तीय चुनौतियां
बंदरगाहों पर जाम: अनुमान के अनुसार, लगभग 2 से 4 लाख टन चावल का स्टॉक और करीब 3000 कंटेनर्स वर्तमान में विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। कंटेनर्स न केवल भारतीय बंदरगाहों पर, बल्कि गंतव्य और ट्रांजिट बंदरगाहों पर भी अटके हुए हैं।
अतिरिक्त शुल्क का बोझ: व्यापारियों को भारी ‘डमरेज चार्ज’ (Demurrage charges) देना पड़ रहा है, जो कंटेनर को तय समय से अधिक समय तक टर्मिनल पर रखने के लिए शिपिंग लाइनों द्वारा वसूला जाता है। इसके अलावा, खाली कंटेनरों की रीपोजीशनिंग (वापस भेजने की प्रक्रिया) भी संभव नहीं हो पा रही है, जिससे बंदरगाहों पर इनका ढेर लग रहा है।
लागत में वृद्धि: बंकर ईंधन की कीमतें 520 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर 700 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बल्क फ्रेट चार्जेस (परिवहन भाड़ा) में भी 15 से 20% की वृद्धि देखी गई है।
बाजार और कानूनी जटिलताएं
घरेलू बाजार पर प्रभाव: निर्यात में बाधा आने के कारण घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतें 7 से 10% तक गिर गई हैं। व्यापारियों के लिए घरेलू बाजार में चावल बेचना संभव नहीं है क्योंकि इससे उन्हें भारी घाटा होगा।
संविदात्मक जोखिम: चावल निर्यात के सौदे तय समय सीमा वाले अनुबंधों (contracts) पर आधारित होते हैं। समय पर आपूर्ति न होने की स्थिति में निर्यातकों को कानूनी मुकदमों और वित्तीय दंड का सामना करना पड़ सकता है।
निर्यातकों की मांगें और सरकार की भूमिका
‘फोर्स मेज्योर’ की मांग: निर्यातक सरकार से ‘फोर्स मेज्योर’ लागू करने की घोषणा की मांग कर रहे हैं, जो एक आपातकालीन स्थिति है और व्यापारियों को अनुबंधों की शर्तों में ढील और अन्य रियायतें प्रदान करती है।
वित्तीय और पोर्ट राहत: व्यापारियों ने सरकार से पोर्ट शुल्क कम करने और बैंकों से ऋण चुकाने की समय सीमा बढ़ाने (जैसे कोविड के दौरान दी गई थी) की मांग की है। साथ ही, वे चाहते हैं कि भारतीय सरकार अन्य देशों की सरकारों से बात करके अटके हुए कंटेनरों के मामले में सहयोग मांगे।
इस पूरी स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम से उपजे संकट पर चर्चा करने के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सभी हितधारकों (stakeholders) की एक परामर्श बैठक बुलाई है। इस बैठक का उद्देश्य भारतीय व्यापारियों को इस अप्रत्याशित संकट से उबारने के लिए विभिन्न समाधानों पर चर्चा करना है।
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