यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-157 है। गुरुवार, 05 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ आज के पॉडकास्ट में जानिए पंजाब में खेती के आश्चर्जनक आंकड़ों के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
एक रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी उद्योगों जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, खनिज खनन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में प्रवासी मजदूरों के शोषण के कई मामले सामने आए हैं। 2025 में ऐसे 747 आरोप दर्ज हुए, जिनमें खराब कार्यस्थितियां, अत्यधिक काम के घंटे और सुरक्षा उल्लंघन शामिल हैं।
गुजरात सरकार ने किसानों की शिकायतों के बाद पारंपरिक यूरिया के साथ नैनो लिक्विड यूरिया की अनिवार्य बिक्री पर रोक लगा दी है। एक वर्ष में ऐसी 41 शिकायतें मिलीं, जिसके बाद 23 मामलों में नोटिस और 12 डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
तमिलनाडु सरकार ने किसानों को उच्च मूल्य वाले पेड़ जैसे सागौन, चंदन, रेड सैंडर्स और महोगनी की खेती बढ़ाने के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री नीति तैयार की है। इस नीति के तहत पेड़ों की कटाई और परिवहन से जुड़े नियमों में ढील तथा रोपण-रखरखाव के लिए सहायता दी जाएगी।
आंध्र प्रदेश ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए “प्रोजेक्ट HANUMAN” शुरू किया है। परियोजना के तहत GPS-सुसज्जित त्वरित प्रतिक्रिया वाहन, वन्यजीव एम्बुलेंस, रेस्क्यू व उपचार केंद्र और AI आधारित चेतावनी प्रणाली शुरू की जा रही है, ताकि जानवरों की गतिविधि पर नजर रखकर समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।
बुधवार को मध्य प्रदेश में दिन का तापमान अधिकतम 37 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं रात का तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहा। यह सामान्य से 4 डिग्री अधिक है।
मध्य प्रदेश में अबकी बार गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। वन विभाग ने 3 दिन का सर्वे पुरा कर लिया है। पिछली गणना में 12 हजार 981 गिद्ध मिले थे।
विस्तृत चर्चा
पंजाब में कृषि विकास के चौकाने वाले आंकड़े
पंजाब में उर्वरक के उपयोग को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती रही है, लेकिन हालिया डेटा एक अलग तस्वीर पेश करता है।
उच्च उत्पादकता: पंजाब में उर्वरक का उपयोग अत्यधिक उत्पादक है। यहां 1 किलोग्राम फर्टिलाइजर से लगभग 16.24 किलोग्राम अनाज पैदा होता है, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 11.5 किलोग्राम है।
भारत का अन्न भंडार: पंजाब को भारत का ‘ब्रेड बास्केट’ कहा जाता है। हरित क्रांति के बाद से यहां बीजों, मशीनरी और उर्वरकों के सही तालमेल ने उत्पादन को काफी बढ़ाया है।
फसल सघनता और पैदावार
पंजाब की जमीन का उपयोग अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक कुशलता से किया जा रहा है।
फसल सघनता: पंजाब में फसल सघनता लगभग 189% है, जो राष्ट्रीय औसत (145%) से काफी ज्यादा है। इसका मतलब है कि किसान एक ही जमीन पर साल में एक से अधिक फसलें ले रहे हैं।
प्रमुख फसलों की उपज: पंजाब में गेहूं की पैदावार 5 टन प्रति एकड़ से अधिक है (राष्ट्रीय औसत 3.5 टन), और धान (चावल) की उपज 6 से 7 टन प्रति एकड़ है, जो देश में सबसे अधिक स्तरों में से एक है।
मिट्टी की सेहत और जैविक कार्बन
आलोचकों का मानना है कि अधिक उर्वरक से मिट्टी खराब हो रही है, लेकिन लंबी अवधि का डेटा सुधार की ओर इशारा करता है।
SOC में सुधार: मिट्टी की उर्वरता का मुख्य सूचक ‘सोइल ऑर्गेनिक कार्बन’ (SOC) है। पंजाब में 1981-90 के दौरान यह 0.33% था, जो 2011-2023 के बीच बढ़कर 0.53% हो गया है।
श्रेणी में बदलाव: पहले केवल 1% मिट्टी ‘उच्च जैविक कार्बन’ श्रेणी में थी, जो अब बढ़कर 15.4% हो गई है।
सरकारी पहल और मृदा स्वास्थ्य कार्ड
मिट्टी के पोषण के प्रबंधन के लिए सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड: अब तक 30 लाख से ज्यादा किसानों को सोइल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं, जो उन्हें मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरक डालने की सलाह देते हैं।
सैंपल जांच: वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2.71 लाख सैंपल लिए गए, जिनमें से 1.91 लाख का विश्लेषण किया जा चुका है। इससे यूरिया के अनावश्यक उपयोग में कमी आई है।
जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर कदम
पंजाब धीरे-धीरे रसायनों से हटकर प्राकृतिक विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
प्रमाणित जैविक खेती: राज्य में 18,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र प्रमाणित जैविक खेती के अंतर्गत आ चुका है।
प्राकृतिक खेती मिशन: 2025-26 तक हजारों किसान ‘नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग’ से जुड़ रहे हैं और लगभग 5368 एकड़ भूमि को प्राकृतिक खेती में बदला गया है।
उर्वरक खपत में गिरावट के रुझान
‘पीएम प्रणाम’ (PM PRANAM) योजना के तहत उर्वरकों की खपत में कमी देखी गई है:
कुल खपत में कमी: पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में कुल फर्टिलाइजर खपत 2.82% कम हुई है।
यूरिया और DAP: यूरिया के उपयोग में 4.97% और डीएपी (DAP) के उपयोग में 12.49% की गिरावट दर्ज की गई है।
यह आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के किसान न केवल उत्पादन बढ़ा रहे हैं, बल्कि वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं की मदद से अपनी खेती को अधिक टिकाऊ और संतुलित बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।
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