...
Skip to content

सर्दियों में भी क्यों सूखे पड़े हैं हिमालय के पहाड़? 

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-119 है। सोमवार, 19 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सर्दियों में भी क्यों सूखे पड़े हैं हिमालय के पहाड़ और मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों कैसा रहेगा मौसम?

मुख्य सुर्खियां

मध्य चिली में भीषण जंगल की आग के कारण कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 50,000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति गैब्रियल बोरिक ने आपदा की स्थिति घोषित की है। 


देश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) ने वित्त वर्ष 2024-25 में सामूहिक रूप से ₹2,701 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया है। यह कई वर्षों के घाटे के बाद एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 


मौसम विभाग ने 26 जनवरी तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लंबे समय तक बारिश का अनुमान लगाया है, कई इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी है और यात्रियों और किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।


दिल्ली में एक बार फिर AQI 400 पार पहुंच गया। सोमवार को यहां ओवरआल AQI 418 दर्ज किया गया। शनिवार से ही दिल्ली में ग्रैप 4 लागू कर दिया गया है। 


उत्तरप्रदेश में कोहरे के कारण हुए 4 सड़क हादसों में कुल 7 लोगों की मौत हो गई। यह सभी हादसे रविवार को हुए हैं।


मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के बाद बंद पड़ी हुई यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री को एक मेमोरियल में बदलें का फैसला लिया है। यह मैमोरियल 1200 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा।


बलाघाट में प्रशासन ने 600 क्विंटल अवैध धान बरामद किया है। यह धान इल्लीगल तरीके से छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश लाया गया है ताकि MSP का लाभ लिया जा सके।

हिमालयी क्षेत्रों में सूखा शीतकाल

वर्तमान स्थिति और वर्षा की कमी हिमालयी क्षेत्र में इस वर्ष बर्फबारी न होना चिंता का विषय बना हुआ है, जिससे पहाड़ों की चोटियाँ असामान्य रूप से सूखी हैं। जनवरी के पहले पखवाड़े में पूरे भारत में उम्मीद से 1/4 से भी कम बारिश हुई है, जबकि उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में केवल 8% वर्षा ही दर्ज की गई है। उत्तराखंड में दिसंबर और जनवरी में बिल्कुल बारिश नहीं हुई, और हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद दिसंबर में यह छठी सबसे कम बारिश थी।

सूखे शीतकाल के कारण इसका मुख्य कारण यह है कि इस साल पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) इतने मजबूत नहीं थे कि वे बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाओं के साथ मिलकर बारिश या बर्फबारी कर सकें,। हालांकि इस बार आठ पश्चिमी विक्षोभ धाराएं गुजरीं (जो सामान्यतः छह होती हैं), लेकिन उनमें वर्षा करने की शक्ति नहीं थी। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक दशक में उत्तराखंड जैसे राज्यों में सर्दियाँ लगातार सूखी होती जा रही हैं।

कृषि और पर्यावरण पर प्रभाव

  • कृषि: सर्दियों की बारिश रबी की फसलों (जैसे गेहूं) के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है, जो इस बार प्रभावित हो रही है।
  • जंगल की आग: नमी की कमी के कारण जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। नंदा देवी नेशनल पार्क और वैली ऑफ फ्लावर के कुछ हिस्सों में आग की खबरें हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने उत्तराखंड में 1600 से ज्यादा और हिमाचल में 600 आग के अलर्ट रिकॉर्ड किए हैं।
  • ग्लेशियर और जल स्रोत: कम बर्फबारी से ग्लेशियरों के पिघलने और ‘ग्लेशियर लेक आउटबस्ट फ्लड’ (GLOF) का खतरा बढ़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप नदियों में पानी का बहाव भी कम हो सकता है, जो प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

मध्य प्रदेश में मौसम का हाल

सर्दी से राहत और वर्षा का पूर्वानुमान मध्य प्रदेश में अगले दो दिनों में लोगों को कड़ाके की सर्दी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य के पूर्वी जिलों में बादलों का असर है। 22 और 23 जनवरी को पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है।

कोहरे और तापमान की स्थिति

  • कोहरा: ग्वालियर, भिंड, दतिया और छतरपुर जैसे इलाकों में घना कोहरा (Moderate Fog) देखा गया है, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन में हल्का कोहरा रहा है।
  • तापमान: शहडोल जिले में न्यूनतम तापमान 3.6°C तक गिर गया। अन्य शहरों में जैसे भोपाल में 11°C, इंदौर में 12°C और ग्वालियर में 10°C तापमान दर्ज किया गया है।

रिकॉर्ड तोड़ सर्दी का ट्रेंड मध्य प्रदेश में यह शीतकाल ऐतिहासिक रहा है। नवंबर में 44 साल, दिसंबर में 25 साल और जनवरी में भोपाल में 10 साल का रिकॉर्ड सर्दी के मामले में टूट गया है,। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे मानसून में जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही विंटर में दिसंबर-जनवरी सबसे ज्यादा ठंड लाते हैं क्योंकि उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं मध्य प्रदेश के तापमान को काफी गिरा देती हैं। अगले कुछ दिनों में ठंड से राहत के बाद बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins