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रायगढ़ में जिंदल कोयला परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध

Production: Himanshu Narware

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-103 है। सोमवार, 29 दिसंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए रायगढ़ में कोल माइंस के खिलाफ उग्र होते प्रदर्शन के बारे में।


मुख्य सुर्खियां

राजस्थान सरकार ने शहरों के आसपास पहाड़ियों को लेकर नए नियम बनाए हैं। इन नियमों में अरावली की कुछ पहाड़ियों को “अर्बन हिल एरिया” मान लिया गया है। जिन पहाड़ियों की ढलान 8 से 15 डिग्री है, वहां अब फार्महाउस, रिसॉर्ट जैसे हल्के निर्माण की इजाज़त दी गई है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं को डर है कि इससे नाज़ुक अरावली इलाकों में निर्माण को कानूनी जामा पहनाया जा रहा है। सरकार कह रही है कि ज़रूरत पड़ी तो नियमों की समीक्षा की जा सकती है।


रायगढ़ के तमनार इलाके के 14 गांवों के लोग दो हफ्ते से ज़्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। वजह है एक बड़ी कोयला खदान, जो खेती की ज़मीन और रोज़ी-रोटी छीन सकती है। प्रदर्शन हिंसक हो गया, गाड़ियां जलाई गईं और पुलिस से झड़प हुई। इसके बाद प्रशासन ने जनसुनवाई के नतीजे रद्द कर दिए। कंपनी कह रही है कि बातचीत जारी रखेगी, और सरकार ने हिंसा की निष्पक्ष जांच का वादा किया है।


अमेरिका से भारत को एथेनॉल का आयात तेज़ी से बढ़ा है। 2025 के शुरुआती 9 महीनों में ही रिकॉर्ड के करीब पहुंच गया। भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति पर काम कर रहा है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि हम बाहर से एथेनॉल पर ज़्यादा निर्भर होते जा रहे हैं, जबकि देश में भी उत्पादन बढ़ाने की बात हो रही है।


केंद्र सरकार ने कहा है कि खनन के लिए जंगल की ज़मीन देने से पहले सिर्फ एक ही सर्वे होगा। सरकार का कहना है कि बार-बार सर्वे कराने से देरी और खर्च बढ़ता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे जंगल की सुरक्षा के लिए ज़रूरी चेक-पॉइंट होते हैं, जिन्हें हटाना खतरे भरा हो सकता है।


श्रीनगर में ठंड बढ़ते ही हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़े हैं। डॉक्टरों ने कहा है कि बहुत ज़्यादा ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है।


सलाह दी गई है कि लोग खुद को गर्म रखें, दवाएं नियमित लें, ठंड में अचानक मेहनत न करें और सीने में दर्द या सांस की दिक्कत हो तो तुरंत अस्पताल जाएं।


दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा फिर से बेहद जहरीली हो गई है। कई जगह AQI 400 से ऊपर चला गया है। मौसम विभाग ने ठंड और घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरा ज्यादा बताया जा रहा है। सरकार प्रदूषण रोकने के सख्त कदमों पर विचार कर रही है।


सागर जिले के जंगल में एक पूरा जवान बाघ मृत अवस्था में मिला। शरीर पर कोई साफ चोट नहीं दिखी है। अब पोस्टमार्टम से पता चलेगा कि मौत प्राकृतिक थी, ज़हर से हुई या करंट से। यह मामला गंभीर इसलिए भी है क्योंकि 2025 में MP में अब तक 50 से ज्यादा बाघ मर चुके हैं। 


भोपाल मेट्रो की शुरुआत वाले दिन यात्रियों की संख्या अच्छी थी, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे कम होती चली गई। अभी रोज़ औसतन करीब 3,000 लोग ही सफर कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में ऐसा होना आम है, जब तक पूरी लाइन और पार्किंग जैसी सुविधाएं नहीं जुड़तीं।


विस्तृत चर्चा

छत्तीसगढ़ में जिंदल कोयला खदान के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल ग्रुप की प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ 14 गांवों के हजारों ग्रामीण पिछले दो हफ्तों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने पुरखों की ज़मीन और खेती छोड़ने को तैयार नहीं हैं। शनिवार को यह विरोध उस वक्त हिंसक हो गया, जब पुलिस ने सड़क पर बैठी महिलाओं को जबरन हटाने की कोशिश की। इससे भीड़ भड़क गई और तीन गाड़ियों में आग लगा दी गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई, जिसमें इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि 8 दिसंबर को इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने के लिए हुई जनसुनवाई निष्पक्ष नहीं थी और उसे रद्द किया जाना चाहिए। इस परियोजना के तहत 3,020 हेक्टेयर क्षेत्र में सालाना 15 मिलियन टन कोयला खनन की योजना है, जिसमें ओपन कास्ट के साथ अंडरग्राउंड माइनिंग भी शामिल है। यह खदान 14 गांवों में फैली है, जिनके लोगों को विस्थापित किया जाना है। कंपनी की ओर से मुआवजा पैकेज की पेशकश की गई है, लेकिन ग्रामीण ज़मीन के बदले ज़मीन की मांग कर रहे हैं और अधिकतर लोग अपना गांव छोड़ने को तैयार नहीं हैं। जिंदल ग्रुप का कहना है कि यह परियोजना उसे नीलामी के जरिए मिली है और वह स्थानीय लोगों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश जारी रखेगा।

दिल्ली में खतरनाक स्तर पर पहुंचा वायु प्रदूषण

दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। सोमवार सुबह औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 403 तक पहुंच गया, जिसका मतलब है कि हवा सांस लेने के लिए खतरनाक स्तर पर है। रविवार को दिनभर घना कोहरा और प्रदूषण एक साथ छाए रहे, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई और लोग घर से बाहर निकलने से बचते नजर आए। कुछ इलाकों में AQI 400 के पार चला गया, जैसे आनंद विहार में 458, जहांगीरपुरी में 439 और चांदनी चौक में 426 दर्ज किया गया। यह स्तर बच्चों, बुजुर्गों और दिल या सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए खास तौर पर खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग बाहर निकलना कम करें और मास्क का इस्तेमाल करें। मौसम विभाग ने 29 दिसंबर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया हुआ है और आईएमडी के मुताबिक यह स्थिति 31 दिसंबर तक बनी रह सकती है। दिल्ली में फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के स्टेज-3 के उपाय लागू हैं, जिसके तहत निजी निर्माण कार्य बंद हैं और पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही फिटनेस टेस्ट स्टेशनों की संख्या भी बढ़ाई गई है ताकि ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाया जा सके।

सर्दी में कश्मीर में हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा

बीच जम्मू-कश्मीर में सर्दी के चलते स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज ने एक हेल्थ एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि ठंड के मौसम में दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। कार्डियोलॉजी विभाग के अनुसार जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर या किडनी की समस्या है, उन्हें सर्दियों में खास सावधानी बरतनी चाहिए। बुजुर्गों और बच्चों को ठंड में बाहर निकलने से बचाने की सलाह दी गई है। स्मोकिंग करने वाले लोगों और सुबह अचानक ठंड में एक्सरसाइज करने वालों को भी ज्यादा जोखिम बताया गया है, क्योंकि ठंड में दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। एडवाइजरी में गर्म कपड़े पहनने, छाती, सिर और हाथ-पैर ढककर रखने, दवाइयां नियमित लेने और बीपी व शुगर की जांच करते रहने की सलाह दी गई है। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना या ज्यादा पसीना आना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


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