यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 79वां एपिसोड है। सोमवार, 01 दिसंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए पीएम 1 से होने वाले नुकसान और मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में बाढ़ और भूस्खलन के चलते कम से कम 615 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं चक्रवाती तूफ़ान दितवाह के चलते श्रीलंका में कम से कम 334 लोगों की मौत हो चुकी है।
रविवार को दितवाह के चलते तमिलनाडु और पुदुचेरी में भी भारी बारिश दर्ज की गई। तमिलनाडु में बारिश से सम्बंधित घटनाओं में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई।
इंडियन एक्सप्रेस के निखिल घाणेकर ने अपनी एक खबर में बताया है कि प्रधानमंत्री ऑफिस ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) को नई एमिशन इन्वेंट्री और सोर्स-अपॉर्शनमेंट स्टडीज़ पर काम तेज़ करने का निर्देश दिया था। दरअसल बीते दिनों NGT में बताया गया था कि दिल्ली के प्रदूषण पर जो कार्यवाही की गई है वह प्रदूषण के पुराने डाटा को ध्यान में रखकर की गई है।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के फ्लाइंग स्क्वॉड ने शनिवार को दिल्ली भर में 321 सड़कों का इंस्पेक्शन किया, जिसमें ज़्यादा धूल जमा होने वाली 35 जगहों को मार्क किया गया है।
आज से संसद और मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। आज वित्त मंत्री द्वारा सिगरेट और पान मसाले पर सेस लगाने से संबंधित बिल पेश किया जा सकता है।
संसद के पहले दिन कुल 20 सवाल लोकसभा में पूछे जाएंगे इनमें से 4 सवाल पर्यावरण मंत्रालय से पूछे जाएंगे।
मध्य प्रदेश में छोटे-छोटे नगरीय निकायों को स्वच्छता, सड़क और पानी जैसे सभी कार्यों को करने के लिए वित्तीय मदद देने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग अब पूल्ड म्युन्सिपल बांड जारी करेगा। आसान भाषा में समझें तो कई छोटे-छोटे नगरीय निकाय मिलकर कम ब्याज़ पर उधार ले सकेंगे।
विस्तृत चर्चा
पीएम वन प्रदूषण कितना खतरनाक? (चंद्र प्रताप तिवारी के साथ)
डाउन टू अर्थ की प्रीथा बनर्जी ने अपनी एक रिपोर्ट में एयर पॉल्यूशन के एक अलग पहलू पर बात की है। आमतौर पर चर्चाएं पीएम 2.5 और पीएम 10 पर ही सिमटी रहती हैं मगर पीएम 1 उससे भी ज्यादा खतरनाक है।
पीएम वन क्या है?
पीएम वन एक प्रदूषक है जो स्वास्थ्य और हवा के लिए समान रूप से खतरनाक है। इसमें वे सभी पार्टिकल्स आते हैं जिनका व्यास एक माइक्रोन से कम है। अगर इसे दैनिक जीवन के हिसाब से समझा जाए तो ये हमारे बालों से भी 70% पतले होते हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट के अनुसार, ये पार्टिकल्स अक्सर पीएम 2.5 के मास का लगभग आधा हिस्सा होते हैं।
स्रोत और व्यवहार
इसके मुख्य स्रोतों में आधुनिक वाहनों के एग्जॉस्ट, औद्योगिक चिमनियां, ऑर्गेनिक कंपाउंड और धातुओं से बनने वाली वेपर शामिल हैं। नई तकनीक के वाहन भी इसके स्रोत हैं।
इनका वजन इतना कम होता है कि ये हवा में अधिक देर तक टिके रहते हैं।
खासकर दिल्ली जैसे शहरों की नम सर्दियों की धुंध में ये आसानी से घुल जाते हैं, जिससे इनकी यह विशेषता इसे और भी खतरनाक बना देती है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
पीएम वन का असर स्वास्थ्य पर काफी गंभीर है।
पीएम 10 हमारे नाक या गर्दन में रुक जाता है, पीएम 2.5 फेफड़ों तक पहुंचता है, लेकिन पीएम वन फेफड़ों की झिल्लियों (एल्वेओली) को पार कर सकता है।
यह ब्लड को दूषित (कंटैमिनेट) कर सकता है और हमारी स्किन के माध्यम से भी शरीर के अंदर जा सकता है।
इसके साथ लेड, कैडमियम, क्रोमियम और निकल जैसे जहरीले तत्व हमारी बॉडी में जाते हैं, जो ब्रेन, हार्ट, और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं।
यह शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकता है।
पीएम वन अगर 10 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर बढ़ता है, तो हॉस्पिटल में इमरजेंसी विजिट्स बढ़ जाती हैं। हार्ट डिजीज के खतरे में 29% का स्पाइक आता है, जो पीएम 2.5 से ज्यादा है।
बच्चों में यह हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम 61% तक बढ़ा देता है।
दीर्घकालिक संदर्भ में, यह स्ट्रोक, अस्थमा, कैंसर, समय से पहले जन्म और नींद संबंधी दिक्कतों के तौर पर भी मैनिफेस्ट हो सकता है।
निगरानी और चुनौतियां
दिल्ली में मौजूदा पीएम 2.5 मॉनिटरिंग पीएम वन पार्टिकल्स को 20% तक कम कैप्चर कर पाती है। इसकी वजह ‘हाइग्रोस्कोपिक ग्रोथ’ (नमी में कणों का फूल जाना) है, जिससे इसका पूरा स्ट्रेस छिप जाता है।
आईआईटी बॉम्बे के रिसर्च ने नेशनल मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क में पीएम वन के स्टैंडर्ड्स की कमी को स्थिति को और खतरनाक बताया है।
रिसर्च बताती हैं कि इसकी निगरानी संभव है।
भारत अगर अपने बुनियादी ढांचे में बदलाव करे और नए मानदंड तय करे, तो इसे एक से दो साल में राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है। अपग्रेडेड सैंपलर और लो कॉस्ट सेंसर जैसी तकनीकें मौजूद हैं।
वैश्विक स्तर पर, कई देश पीएम वन को मॉनिटर कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, यूरोपियन यूनियन ने 2014 में एम्बिएंट एयर क्वालिटी डायरेक्टिव पॉलिसी अपनाई थी, जिसके तहत मुख्य प्रदूषण क्षेत्रों में अल्ट्राफाइन पार्टिकल्स की निगरानी अनिवार्य है।
भारत में अभी सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पीएम 10 से लेकर पीएम 2.5 तक ही मॉनिटर कर पा रहे हैं।
धार में किसान आंदोलन (अब्दुल वसीम अंसारी के साथ)
मध्य प्रदेश के पांच जिलों के किसान अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले धार जिले के खलघाट में टोल नाके पर सोमवार को आंदोलन करेंगे।
किसानों की प्रमुख मांगें:
सरकारी खरीदी: मक्का, सोयाबीन और मुख्य फसल कपास की सरकारी खरीदी पूर्व की योजना के अनुसार की जाए।
कर्ज मुक्ति और एमएसपी: सभी किसानों को ऋण मुक्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी लागू की जाए।
गौ माता का दर्जा: आदि गुरु शंकराचार्य के संकल्प के अनुसार गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए।
आयात-निर्यात नीति: केंद्र सरकार अपनी आयात निर्यात नीति किसानों के हित में बनाए और दलहन, कपास तथा प्याज के निर्यात पर लगी रोक को हटाया जाए।
सरकार के साथ चर्चा और आंदोलन का फैसला:
शनिवार को सरकार ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था, जिसमें धार, बड़वानी, खरगोन और खंडवा जिले के प्रतिनिधियों ने भोपाल में कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना से मुलाकात की थी।
कृषि मंत्री ने आंदोलन ना करने का आग्रह किया था और आश्वासन दिया था कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने मांगों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाने की बात कही थी।
मंत्री ने मुख्यमंत्री के घर में शादी का हवाला देते हुए आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया था, लेकिन किसानों ने इसे इंकार कर दिया और आंदोलन करने का फैसला किया।
किसान प्रतिनिधि फसलों के एमएसपी और कर्ज मुक्ति सहित अपनी मांगों पर अड़े रहे।
किसानों का आरोप है कि कंपनियों की मिलीभगत से उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने बताया कि मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही हैं।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार इन सब मांगों को मान लेगी तो वह आंदोलन को स्थगित कर देंगे।
यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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