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कैसे ‘टाईम ऑफ डे’ टैरिफ, से बिजली बिल में बचत कर रहे हैं एमपी के स्मार्ट मीटर उपभोक्ता?

स्मार्ट मीटर में सुबह 9 से शाम 5 बजे तक बिजली पर 20% छूट मिलती है। भोपाल की ऊषा जैन ने काम का समय बदलकर बिल घटाया। जानें पूरा गणित।
Smart Meter Time of day tarrif example bhopal
भोपाल की रहवासी ऊषा जैन रसोई में काम करते हुए | फोटो: पल्लव जैन

भोपाल, मध्य प्रदेश के शंकराचार्य नगर में रहने वाली गृहिणी ऊषा जैन के दिन की शुरुवात सुबह 6 बजे घर का बोरवेल पंप चालू कर पानी भरने से होती और सुबह 9 बजे तक वो अपने ज़रुरी घरेलू काम पूरे करती थी। इसमें हर तीसरे दिन कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन का उपयोग शामिल था। लेकिन अब उन्होंने अधिक बिजली खपत वाले घरेलू कामों को करने के समय में बदलाव किया है। ऐसा करने से उनका बिजली का बिल कम हुआ है। 

अकेले ऊषा ही नहीं मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPMKVVCL) के मुताबिक सितंबर माह में ‘टाईम ऑफ डे’ टैरिफ (ToD) के तहत 10 लाख 11 हज़ार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 10 करोड़ रुपए की छूट दी गई है।

विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) संशोधन नियम, 2023 के तहत केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2025 से देश भर में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) टैरिफ लागू किया था।

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‘टाईम ऑफ डे’ टैरिफ में 10 किलोवाट तक (सैंक्शन लोड) के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (Solar Hours) के दौरान इस्तेमाल की गई बिजली पर प्रति युनिट दरों में 20 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। बाकी के समय में बिजली की खपत पर सामान्य दरें लागू होती हैं। इसका उद्देश्य देश की बिजली की मांग को रात से दिन के समय (Solar Hours) में स्थानांतरित करना है। 

बिजली बिल में रियायत देकर उपभोक्ताओं को अपने सभी ज़रुरी काम दिन में पूरे करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उपभोक्ता के व्यवहार में बदलाव लाना है। ग्राउंड रिपोर्ट ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं से बात कर उनकी’टाईम ऑफ डे’ टैरिफ जैसे विकल्पों के प्रति जागरुकता को समझने का प्रयास किया है। कई उपभोक्ता ऐसे भी हैं जो सोलर आवर और पीक आवर जैसी शब्दावली से अंजान हैं। 

‘टाईम ऑफ डे’ टैरिफ से बचत 

वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करते हुए ऊषा जैन | फोटो: पल्लव जैन
वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करते हुए ऊषा जैन | फोटो: पल्लव जैन

सितंबर 2025 में जब ऊषा जैन के यहां स्मार्ट मीटर लगा तो वो इस बात से चिंतिंत थी की शायद स्मार्ट मीटर में बिजली का बिल अधिक आता है। उनकी इस आशंका को भोपाल और देश भर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन की खबरें और बढ़ा रही थी। लेकिन ऊषा को मीटर रीडिंग लेने वाले व्यक्ति ने बताया कि अगर वो अपना अधिक बिजली खपत वाला काम सोलर आवर्स, सुबह 9 से शाम 5 बजे के बीच करें तो उनका बिजली का बिल कम आएगा। 

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इस सलाह को मानकर उन्होंने अपने कुछ कामों का समय बदला जैसे कपड़ों को स्त्री करना, वॉशिंग मशीन लगाना, पानी भरना, मिक्सर एवं आटा चक्की का इस्तेमाल। इस बदलाव से पहले उनका औसत मासिक बिल 1700-1800 रुपए रहता था, अब वह घटकर 1400-1500 रुपए पर आ गया है। यानी उन्हें प्रति माह अब 200 से 300 रुपए की बचत हो रही है।  

मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के रिटेल सप्लाय टैरिफ ऑर्डर 2026-27 के मुताबिक घरेलू उपभोक्ता अगर प्रति माह 151 – 300 युनिट खर्च करते हैं तो उन्हें ₹7.40 प्रति युनिट का भुगतान करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, ऊषा की मासिक यूनिट खपत 200 से 250 के बीच रहती है। अगर किसी माह कुल 200 यूनिट खपत है और इसका 100 युनिट सोलर आवर्स में खर्च हुआ तो टाईम ऑफ डे टैरिफ के तहत 20 प्रतिशत छूट मिलने पर ₹5.9 प्रति यूनिट के हिसाब से उन्हें ₹590 और बाकी की 100 यूनिट के ₹7.4 की दर से ₹740 रुपए चुकाने होंगे। इस हिसाब से उनका कुल बिल ₹1330 (अन्य चार्ज शामिल नहीं) होगा। अगर टाईम ऑफ डे टैरिफ न होता तो उनका मासिक बिल ₹1480 होता। 

राजगढ़ में एक घर में लगे स्मार्ट मीटर | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी
राजगढ़ में एक घर में लगे स्मार्ट मीटर | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी

मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग कहते हैं कि स्मार्ट मीटर की मदद से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रखने और आर्थिक बचत करने का काम कर सकते हैं। 

वहीं केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक स्मार्ट मीटर के इंस्टॉलेशन के बाद ही दिन में अलग-अलग दरों पर बिजली बिल की गणना संभव हो पाई है। 

राजगढ़ में जागरुकता की कमी

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPMKVVCL) द्वारा 12 अक्टूबर को दी गई जानकारी के मुताबिक भोपाल एवं ग्वालियर रीजन के 16 जिलों में अब तक 10 लाख 11 हज़ार 2921 स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं। सितंबर माह में भोपाल रीजन के 8 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को करीब 7 करोड़, ग्वालियर संभाग के लगभग 2 लाख उपभोक्ताओं को करीब 2.5 करोड़ रुपए और राजगढ़ जिले के 25 हजार 201 उपभोक्ताओं को 21 लाख 36 हजार रुपये की ToD छूट का सीधा लाभ मिला है।  

राजगढ़ विद्युत विभाग के महाप्रबंधक देवेंद्र मेहरा बताते हैं कि “स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को यह रियायत सीधे बिजली बिल में दिखाई देती है।” लेकिन जब हम जमीनी हकीकत को देखते हैं, तो उपभोक्ताओं में जागरूकता की भारी कमी नज़र आती है। 

राजगढ़ के स्मार्ट मीटर उपभोक्ता वीरेंद्र सिंह उमठ | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी
राजगढ़ के स्मार्ट मीटर उपभोक्ता वीरेंद्र सिंह उमठ | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी

राजगढ़ के उपभोक्ता वीरेंद्र सिंह उमठ, जिनके घर और प्रतिष्ठान दोनों में स्मार्ट मीटर लगा है, वे कहते हैं, “20 प्रतिशत छूट की बात तो सुनी है, लेकिन किस समय मिलती है, यह नहीं पता। कभी ध्यान ही नहीं दिया।”

एक और उपभोक्ता अब्दुल समद कहते हैं कि उन्हें भी छूट के समय की कोई जानकारी नहीं है। “खर्च पहले जैसा ही है।” स्पष्ट है कि एक तरफ जहां विभाग के पास छूट देने के पुख्ता आंकड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ नियमों की सही जानकारी न होने के कारण कई उपभोक्ता इस योजना का पूरा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। 

पीक आवर्स में बिजली की कमी

मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) के टैरिफ आदेश 2026-27 के अनुसार, पीक आवर्स वो समय है जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है। राज्य में सुबह 6 से 9 बजे और शाम 5 से 10 बजे को पीक आवर्स माने गए हैं। इसके विपरीत, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक को सोलर आवर्स (Off-peak hours) कहा गया है। कमर्शियल और घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार पर 20 प्रतिशत की छूट दिये जाने का मुख्य उद्देश्य पीक आवर्स में बिजली मांग को ऑफ पीक आवर्स में स्थानांतरित करना है। लेकिन राज्य में व्याप्त बिजली संकट से यह साफ होता है कि पीक आवर्स में अभी भी बिजली की मांग बढ़ी हुई है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक 13 और 14 अक्टूबर 2025 को राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 11,874 MW से 11,906 MW के बीच थी। 2026 में इन्हीं तारीखों को यह बढ़कर 16,918 MW से 17,124 MW के बीच पहुंच गई, जो लगभग 5,000 MW की वृद्धि है। बारिश की कमी से बांधों में जल स्तर पर असर पड़ा, जिससे गांधी सागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर में जलविद्युत उत्पादन कम हो गया। इसके कारण 1,500 मेगावाट की कमी आई। वहीं थर्मल पावर उत्पादन पर भी असर पड़ा। कोयले की कमी और तकनीकी समस्याओं (जैसे बॉयलर से रिसाव) के कारण बिजली इकाइयां बंद हो गईं या ट्रिप हो गईं, जिससे 1,000 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ। 

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने दैनिक भास्कर को बताया कि सरकार बिजली की उपलब्धता में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है। इसमें पीक आवर्स (अधिक मांग वाले समय) के दौरान उत्तर प्रदेश से 500 मेगावाट बिजली प्राप्त करना भी शामिल है। 

ऊषा द्वारा अपनी दिनचर्या में किया गया छोटा सा बदलाव न सिर्फ उनके लिए आर्थिक बचत का ज़रिया बन रहा है बल्कि राज्य की पीक आवर्स डिमांड को कम करने में एक छोटा सा योगदान है। ज़रुरत है कि ज्यादा से ज्याद लोगों को इस बारे में जागरुक किया जाए।

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Authors

  • Abdul Wasim Ansari is an independent journalist based in Rajgarh, Madhya Pradesh, bringing nearly a decade of experience in journalism since 2014. His work focuses on reporting from the grassroots level in the region.

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  • Climate journalist and visual storyteller based in Sehore, Madhya Pradesh, India. He reports on critical environmental issues, including renewable energy, just transition, agriculture and biodiversity with a rural perspective.

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