मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे 29 दिसंबर को तोते, कबूतर और गौरैया समेत करीब 200 पक्षी मृत अवस्था में पाए गए। ये पक्षी बड़वाह वन मंडल क्षेत्र के नावघाट खेड़ी में पुल के पास मिले।
फॉरेस्ट वार्डन टोनी शर्मा के अनुसार, कुछ पक्षी अचानक पेड़ों से गिरने लगे। शुरुआत में इसे ठंड या मौसम का असर माना गया, लेकिन जब लगातार पक्षियों की मौतें दिखीं, तो चिंता गहरा गई।
मामले की सूचना मिलते ही वाइल्ड लाइफ वार्डन टोनी शर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंचे, जहां करीब 25 से 50 तोते आसपास गिरे मिले—कुछ जीवित और कई मृत।
टोनी शर्मा बताते है की वन विभाग ने तुरंत सैंपल कलेक्ट कर जांच की। दो मृत तोतों को सैंपल के रूप में स्थानीय रेंजर की सूचना पर वेटनरी डॉक्टर के पास ले जाया गया। पोस्टमार्टम के लिए सीनियर डॉक्टर को बुलाया गया। जांच के दौरान जो बात सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया।
शर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम में पक्षियों के शरीर के भीतर मोटे चावल के दाने पाए गए। बाद में अन्य मृत पक्षियों की जांच में भी यही बात सामने आई। इसी दौरान सूचना मिली कि उसी पुल के आसपास करीब 50 और तोते मृत मिले हैं। वहां से लिए गए सैंपल के पोस्टमार्टम में भी चावल के दाने पाए गए।
पोस्टमार्टम के बाद तोते के शरीर के सैंपल को भोपाल और जबलपुर की लैब में जांच के लिए भेजा गया है।
शर्मा के अनुसार, जहां यह घटना हुई वह नर्मदा नदी का घाट है, जहां से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए जाते हैं। धार्मिक आस्था के चलते लोग यहां नदी किनारे पक्षियों को दाना डालते हैं।
मौत का कारण अब भी स्पष्ट नहीं
हालांकि अब तक पक्षियों की मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। शर्मा कहते है कि केवल तोतो की ज्यादा संख्या में मौत हुई है। अगर चावल का दाना ख़राब होता तो अन्य प्रजातियों के पक्षी भी बड़ी संख्या में मरते। फिलहाल सबसे अधिक संख्या तोतों की ही सामने आई है, जबकि अन्य पक्षियों की मौत अपेक्षाकृत कम है।
फारेस्ट वार्डन टोनी शर्मा कहते है की रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
इस सम्बन्ध में अंकित मालवीय (Birder Naturalsit Guide ) कहते है की इतनी बड़ी मात्रा में पक्षियों की मौत होना आमबात नहीं है। वे कहते है ये पक्षी ज्यादातर दाना खाते है।
इस समय खेत में फसल होती है, फसल पर कीटनाशक का छिड़काव हुआ हो और वहीं दाना इन पक्षियों ने खाया हो तब भी इन पक्षियों की जान जा सकती है।
ये पक्षी सूरज निकलने के बाद ही दाना खाते है। जब ये पक्षी अपना सामान्य खाना छोड़कर कोई अन्य दाना जैसे की यूरिया खाद का दाना खा लेते है, तब ज्यादा सम्भावना है की इनकी मौत हो जाती है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
देश के अलग-अलग हिस्सों में बीते कुछ वर्षों में पक्षियों की सामूहिक मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार जून 2023 में, असम के बारपेटा जिले के जानिया गांव में हजारों कबूतरों की मौत हो गई। इसकी वजह फसलों से पक्षियों को दूर रखने के लिए किए गए कीटनाशकों का छिड़काव था।
अन्य एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में अनजाने में विष खाने से लगभग 100 हिमालयी ग्रिफॉन गिद्धों और एक स्टेपी चील की मृत्यु हुई थी ।
वहीं राजस्थान की सांभर झील में वर्ष 2019 में भी पक्षियों की मौत का मामला सामने आया था, जिसमें लगभग 23000 पक्षियों की मौत हो गयी थी । जिसकी जांच करने पर पाया गया की इसका कारण एवियन बोटूलिज्म (avian botu।ism) है । यह पानी में बैक्टीरिया से पैदा होने वाला जहर होता है ।
नर्मदा किनारे मामले में तोते के सैंपल जांच के लिए भोपाल और जबलपुर की लैब में भेज दिए है। तोतो की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा।
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