नगर पालिका, खरगोन से मात्र 3.5 किमी दूर गोपालपुरा गांव के पास ट्रेंचिंग ग्राउंड में पड़े कचरे में 8 मार्च को आग लग गई। देर रात होते-होते इसके धुंए से गोपालपुरा सहित अन्य गांव और शहरी रिहाइश में लोगों को दिक्कतें होना शुरू हो गईं। ग्रामीण शिकायत करते हैं कि उनके द्वारा बार-बार फोन करने के बाद भी ज़िम्मेदार अधिकारियों से तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई नहीं की।
नतीजतन धुंए से गोपालपुरा के अलावा डाबरिया फालिया और शहर की वृंदावन कॉलोनी के लोग भी परेशान हो गए। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने रात 1 बजे के करीब गांव से लगे खंडवा-बड़ौदा नेशनल हाइवे पर बैठकर अपना विरोध जाताना शुरू कर दिया। जिसके बाद नगर पालिका ने यहां आग बुझाने का काम शुरू किया फिर भी लगभग 3 दिनों तक धुंए से निजात पाने का काम चलता रहा।
इस दौरान गोपालपुरा में एक मासूम की श्वास की समस्या के चलते इंदौर ली जाते हुए मौत हो गई। इसके परिजनों का आरोप है कि उसकी तबियत धुंए के चलते ही बिगड़ी थी। हालांकि प्रशासन इस घटना को धुंए से सीधे तौर पर जोड़ने से बचता हुआ नज़र आया। वहीं स्थानीय लोग शहर की कचरे के मामले में लचर व्यवस्था पर सवाल खड़ते हैं। उनका कहना है कि अगर ट्रेंचिंग ग्राउंड को जल्द साफ़ नहीं किया गया तो भविष्य में इसी तरह की घटना की चपेट में उनके खेत भी आ सकते हैं।

तीन दिनों तक उठता रहा धुआं
गोपालपुरा के ही मनोज हम्मड़ कहते हैं कि 8 मार्च की सुबह से ही ग्राउंड में आग लग गई थी। उनके अलावा और भी कई ग्रामीणों ने यहां से धुंआ और आग की लपट उठते देखीं। रात होते-होते स्थिति और भी गंभीर हो गई। हम्मड़ कहते हैं कि जब तक ग्रामीणों द्वारा चक्काजाम नहीं किया गया तब तक प्रशासन हरकत में नहीं आया।
तड़के सुबह नगर पालिका द्वारा पहले एक फायर ब्रिगेड से आग बुझाने का काम शुरू किया गया। जब आग बढ़ी तो अन्य नगरीय निकायों से भी मदद बुलाई पड़ी।
खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि विभिन्न निकायों की 6 दमकल की गाड़ियां लगातार आग बुझा रही थीं। आग पर काबू पाने के लिए फाेम भी बुलवाया गया। उन्होंने बताया कि 8 से 10 मार्च के दौरान 100 से अधिक फेरे लगाकर पानी का छिड़काव किया गया।
गोपालपुरा के ही संतोष मुकाती घटना को याद कर बताते हैं कि 9 मार्च की सुबह होते-होते पूरा गांव धुएं से ढंक गया। धुएं में प्लास्टिक और सड़े कचरे की इतनी तेज बदबू थी कि लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया। वहीं शहर के वृंदावन कॉलोनी निवासी संजय पाराशर बताते हैं कि 8 अप्रैल की रात में आसमान में धुएं का गुबार छाया रहा। यहां भी लोग सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत करते दिखे। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को हुई है।

मासूम की गई जान, बुजुर्ग महिला बीमार
गोपालपुरा निवासी साजिद शेख ने आरोप लगाया कि गांव में लगातार धुंआ आने से दो साल के बेटे अली को श्वास लेने में समस्या आई। उसे 9 मार्च को जिला अस्पताल भर्ती किया था। जहां डाॅक्टर ने परेशानी बढ़ने के चलते इंदौर रेफर किया। वे अली को लेकर इंदौर के निजी अस्पताल पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। 9 मार्च की रात में ही अली का अंतिम संस्कार कर दिया।
जिला अस्पताल में अली का उपचार करने वाले डाॅ हितेष सोलंकी ने बताया कि बच्चे को पूर्व से अस्थमा की समस्या थी और धुंए से उसकी परेशानी बढ़ गई। जबकि अली के परिजनों ने पूर्व से कोई भी ऐसी समस्या होने से इनकार किया। वहीं स्थानीय कलेक्टर का कहना है कि धुएं से प्रदूषण हुआ लेकिन बच्चे की मौत धुएं के कारण हुई है, यह नहीं कहा जा सकता। उन्होंने ममाले पर सीएमएचओ डॉ दौलत सिंह चौहान को जानकारी लेने के निर्देश दिए। हालांकि परिजनों के घर का दौरा करने के बाद चौहान ने कहा कि प्रथम दृष्टया बच्चे की मौत अस्थमा से होना प्रतीत होता है।
साजिद शेख की गोगावां निवासी बुआ सईदा बी को भी 9 मार्च की रात करीब 10 बजे जिला अस्पताल भर्ती करना पड़ गया। सईदा बी ने बताया कि घर में धुंआ होने से श्चास लेने में समस्या आने लगी थी। थोड़ी देर के लिए वे अचेत सी हो गई, इसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया। हालांकि 10 मार्च को उनकी हालत में सुधार आ गया।

रैंकिंग और कागज़ी बातें
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में खरगोन ने टॉप 100 मीडियम सिटी (50 हज़ार से 3 लाख के बीच की जनसंख्या वाले) में 49वीं रैंक हासिल की थी। हालांकि इससे पहले 2020 में यह शहर पांचवे स्थान पर भी था। नगर पालिका के उपाध्यक्ष भोलू कर्मा ने दावा किया कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए भी बेहतर काम किया जा रहा है।
1,42,707 जनसंख्या वाला यह शहर हर रोज़ 41.03 टन ठोस अपशिष्ट उत्पादित करता है। इसमें प्रति दिन का 3.13 टन प्लास्टिक कचरा भी शामिल है। इन्हें इकठ्ठा करने के लिए नगर पालिका के पास 6 वेस्ट कलेक्शन ट्रॉली और 50 मिनी ट्रक हैं। मगर इस वेस्ट ख़ास तौर पर प्लास्टिक को अलग-अलग करके प्रोसेस के लिए भेजने हेतु केवल एक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी है। वह भी बदहाल हालत में। शहर में कोई भी वेस्ट टू एनर्जी प्लांट नहीं है। इसके अलावा केवल 3% ड्राई वेस्ट ही रिफ्यूज़ डेराईव्ड फ्यूल (RDF) में बदल पाता है।
जिले के पर्यावरण प्लान के अनुसार शहर में एक ही डंप साईट है जहां 94000 टन लेगेसी वेस्ट मौजूद है। हालांकि इसमें से 86000 टन कचरे का निपटारा किया जा चुका है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि 2023 में तो ट्रेंचिंग ग्राउंड की साफ़ सफाई की गई थी मगर उसके बाद से अब तक यहां ऐसा कोई भी काम नहीं हुआ।

डाबरिया फालिया क्षेत्र में स्थित यह ट्रेंचिंग ग्राउंड करीब 17 हेक्टेयर में फैला हुआ है। करीब एक दशक से यहां कचरे का ढेर लगा हुआ है। नगर पालिका ने करीब तीन एकड़ से कचरे का निपटान किया है। मगर घटना के बाद जब हम यहां पहुंचे तो अधिकांश हिस्से में अब भी कचरे के बड़े ढेर नज़र आए।
इस पूरे घटनाक्रम पर नगर पालिका के स्वास्थ्य अधिकारी प्रकाश चित्ते का कहना है कि गर्मी के मौसम में कचरे के ढेर में बनने वाली मीथेन गैस के कारण कई बार अपने आप आग लग जाती है। उन्होंने बताया कि यहां पहले भी इस प्रकार की घटना हो चुकी है। परंतु इस बार आग बड़े हिस्से में लगी थी। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कचरे के ढेरों के बीच गड्ढे खोदकर मिट्टी भरने की व्यवस्था की जाएगी।
वहीं कर्मा ने बताया कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के निपटान के लिए बड़ी मशीन लगाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द ही मशीन लगाने के बाद कचरे का निपटान किया जाएगा। उनके अनुसार इससे कचरे के ढेर में कमी आने के साथ ही कचरे से खाद और अन्य उत्पाद बनाए जा सकेंगे।
मुकाती कहते हैं कि नगर पालिका को ट्रेंचिंग ग्राउंड के कचरे को साफ़ करने का प्रबंध करना होगा। वह कहते हैं कि इस ग्राउंड के पास खेत भी मौजूद हैं ऐसे में फिर आग लगी तो किसान की फसल को नुकसान हो सकता है। उनका मानना है कि अधिकारियों द्वारा जो परियोजनाएं लाने की बात कही जा रही है उसका क्रियांवयन होता रहे यह सुनिश्चित करना सबसे ज़रूरी है।
बैनर ईमेज – ट्रेंचिंग ग्राउंड में आग बुझाती दमकल की गाड़ी | खरगोन | फ़ोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
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