Skip to content

बेतवा नदी में बढ़ रहा प्रदूषण, लोगों को डर ‘यह ज़हर बीमार न कर दे’

Betwa River Pollution in Vidisha
प्रदूषित बेतवा नदी, विदिशा, मध्य प्रदेश

विदिशा के माधवगंज चौराहे पर कुछ लोग हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें ‘नदियों की रक्षा है देश की सुरक्षा’ और ‘सबकी ज़रूरत सबकी बेतवा’ जैसे नारे लिखे हुए हैं। यह प्रदर्शन बेतवा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए किया जा रहा था। प्रदर्शनकारियों ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का हवाला देते हुए बेतवा को प्राथमिकता के साथ साफ करने की मांग की। उनके अनुसार शहर के 5 नाले इस नदी से मिल रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

विदिशा के माधवगंज चौराहे पर बेतवा के संरक्षण की मांग करते नगरवासी

बेतवा नदी मध्यप्रदेश के झिरी (कुमरा) गांव से निकलकर लगभग 590 किलोमीटर का सफर तय करते हुए उत्तर प्रदेश में यमुना नदी में मिलती है, लेकिन इसके पूर्व विदिशा में लगभग 7 किलोमीटर के सफर ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रदूषित नदी की श्रेणी में शामिल कर दिया है। इसका पानी कई घाटों पर नहाने के लायक भी नहीं है। इसकी वजह है यहां के गंदे नालों का सीधे नदी में मिलता हुआ पानी, जो जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

12 वर्षों से संरक्षण की लड़ाई

विदिशा के स्थानीय निवासी व पर्यावरण मित्र नीरज चौरसिया, जो लगभग 12 वर्षों से बेतवा नदी के संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं, कहते हैं

“विदिशा नगर की एकमात्र जीवनदायिनी नदी बेतवा है, लेकिन वर्तमान में बेतवा सर्वाधिक प्रदूषण का शिकार है। बेतवा के विभिन्न घाटों पर तीज, त्योहार एवं पर्वों पर स्नान के लिए हजारों लोग आते हैं। धार्मिक आस्था के चलते ये लोग बेतवा में स्नान करते हैं, लेकिन उन्हें इसका ज्ञान ही नहीं कि बेतवा का यह जल आचमन के भी लायक नहीं है। इस नदी का जल हरा, दुर्गंधयुक्त और जलीय जीव विहीन है। बेतवा नदी में आए दिन मछलियां और अन्य जलीय जीव मृत बहते दिखाई देते हैं।”

विदिशा स्थित जत्रापुरा में दो एसटीपी हैं। एक पुराने मुक्तिधाम के पास है, जो कि बंद पड़ा हुआ है। इसके माध्यम से भी सारा सीवेज नौलखी एवं बेतवा-बैस संगम पर मिलता है, जहां अवैध रूप से ईंट भट्टे संचालित होते हैं। दूसरा एसटीपी पीएम आवास के पास बनाया गया है। यह एसटीपी अक्सर बंद रहता है, क्योंकि वर्तमान परिवेश में विदिशा नगर पालिका ना तो नदी के अपस्ट्रीम के पीलिया नाले, चोरघाट नाले और नदी के मध्य में मिलने वाले गौशाला और कब्रिस्तान जैसे नालों को एसटीपी से जोड़ पाई, और ना ही अमृत योजना के तहत रखे गए 25,000 घरों के लक्ष्य को सीवेज कनेक्शन उपलब्ध कराया गया।

एनजीटी के आदेश का उल्लंघन

यहां एनजीटी के आदेश और निर्देश का खुला उल्लंघन हो रहा है। आज दिनांक तक बेतवा नदी के तल में जमा सिल्ट (गाद) और कचरे को नहीं हटाया गया, और ना ही किसी योजना या अभियान के दौरान मशीनों से नदी तल की गाद निकाली गई। जबकि वर्ष 2024 में एक समाचार को स्वतः संज्ञान में लेते हुए एनजीटी ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया था कि विदिशा में बेतवा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए शहर के चोरघाट और गौशाला जैसे गंदे नालों के पानी को रोककर अमृत 2.0 योजना के जरिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना था। इसके साथ ही नदी की तलहटी में जमी गंदगी और गाद को हटाकर गहराई बहाल करनी थी और घाटों की मरम्मत करनी थी, ताकि पानी की गुणवत्ता नहाने योग्य (BOD < 3 mg/l) बन सके।

बेतवा नदी में गाद और प्रदूषण का स्तर, विदिशा, मध्य प्रदेश

विदिशा नगरपालिका सीएमओ दुर्गेश सिंह के अनुसार, चोरघाट और गौशाला नालों को डायवर्ट करने की योजना पर काम चल रहा है, जबकि पीलिया नाले के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। हालांकि नदी की सफाई से जुड़े टेंडर अब तक प्रक्रिया में ही हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की 2025 की रिपोर्ट के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। बेतवा नदी (कानजिया से विदिशा तक का हिस्सा) अभी भी Priority II श्रेणी की प्रदूषित नदियों की सूची में शामिल है, जहां प्रदूषण का स्तर (BOD) 20.4 mg/l दर्ज किया गया है। हालांकि 2024 के कुछ आंकड़ों में सुधार (BOD 4.2 mg/l) दिखा है, लेकिन नदी का अभी भी प्रदूषित श्रेणी में होना यह दर्शाता है कि नालों को पूरी तरह मोड़ने और गंदगी साफ करने का काम ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है।

वर्ष 2022-23 में विदिशा के चरणतीर्थ घाट पर BOD स्तर 20.4 mg/l दर्ज किया गया था, जो गंभीर प्रदूषण की श्रेणी को दर्शाता है। हालांकि वर्ष 2024 में यह घटकर 4.2 mg/l हुआ, जो लगभग 80 प्रतिशत सुधार दिखाता है, लेकिन वैज्ञानिक मानकों के अनुसार नहाने योग्य पानी के लिए BOD 3 mg/l से कम होना जरूरी है। अन्य स्थानों पर स्थिति इस प्रकार है — कंजिया रोड ब्रिज पर 4.7 mg/l, रायसेन औद्योगिक क्षेत्र में 2.9 mg/l, इंटेक वेल के पास 2.9 mg/l और बेतवा-बेस संगम पर 3.2 mg/l BOD दर्ज किया गया। इससे साफ है कि कई स्थानों पर पानी अब भी स्नान योग्य मानकों से ऊपर है।

कागज़ी दावे

बेतवा नदी से मिलता स्थानीय नाला, विदिशा, मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वर्ष 2023-24 की रिपोर्ट में बेतवा को श्रेणी ‘बी’ में रखा गया था, जिसमें चरणतीर्थ घाट पर औसत BOD 3 mg/l बताया गया, जो स्नान के लिए सुरक्षित माना जाता है। लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के अगस्त 2024 के निरीक्षण ने जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए।

निरीक्षण में पाया गया कि जत्रापुरा स्थित 22.25 MLD क्षमता वाले एसटीपी में केवल 12.2 MLD सीवेज ही पहुंच रहा है, जबकि लगभग 10 MLD गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे बेतवा में मिल रहा है। चोरघाट, गौशाला और कब्रिस्तान नालों को प्रदूषण के मुख्य स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया है।

विदिशा की पेयजल व्यवस्था भी बेतवा पर निर्भर है। कालिदास और छोटा स्टॉप डैम पर बने 27 MLD क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से लगभग 285 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए शहर को पानी सप्लाई किया जाता है। गर्मियों में हलाली डैम का पानी भी बेतवा में छोड़ा जाता है, जिससे इस नदी का महत्व और बढ़ जाता है।

ठोस कार्रवाई की ज़रूरत

नदी में कई जगहों पर इस तरह से झाग देखने को मिलता है

कागज़ों में दर्ज सुधार और ज़मीनी हकीकत के बीच बेतवा नदी आज भी विदिशा में प्रदूषण की मार झेल रही है। BOD स्तर में गिरावट के दावे जरूर हैं, लेकिन कई घाटों पर पानी अब भी नहाने योग्य मानकों से ऊपर है। पांच बड़े नालों का गंदा पानी, अधूरी सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था और एनजीटी के निर्देशों का अधूरा पालन यह साफ दिखाता है कि समस्या की जड़ अब भी जस की तस है।

स्थानीय लोगों की चिंता इसलिए भी वाजिब है, क्योंकि बेतवा न सिर्फ आस्था की धारा है, बल्कि शहर की पेयजल व्यवस्था का मुख्य स्रोत भी है। यदि समय रहते नालों के जहरीले पानी को रोकने, एसटीपी की क्षमता बढ़ाने और नदी तल की सफाई जैसे ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।

बेतवा को बचाने के लिए अब केवल घोषणाओं नहीं, बल्कि धरातल पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई की जरूरत है, ताकि “राम की नदी” फिर से जीवनदायिनी बन सके — न कि कागज़ों में सिमटती एक प्रदूषित धारा।

भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें।

यह भी पढ़ें 

पूजनीय लेकिन ज़हरीली और प्रदूषित, यह है पन्ना की किलकिला नदी

Sehore Siwan River: हर दिन नेता इस नदी को मरता हुआ देख रहे हैं… बस देख रहे हैं…

पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुकट्विटरइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।

Authors

  • Amit Raikwar, hailing from Vidisha district in Madhya Pradesh, is a trusted face in Indian journalism with 17 years of experience. Beginning his career in 2007, he has played pivotal roles in local and national media organizations, including PTI. Known for his nuanced reporting on political developments and social transformations, Amit brings stories to the forefront with prominence and integrity.

    View all posts
  • Abdul Wasim Ansari is an independent journalist based in Rajgarh, Madhya Pradesh, bringing nearly a decade of experience in journalism since 2014. His work focuses on reporting from the grassroots level in the region.

    View all posts

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins