भोपाल के बाहरी इलाके करोंद की एक सड़क सैकड़ों लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। सड़क के ऊपर से गुज़रती हाई-टेंशन बिजली की लाइनें और ट्रांसमिशन टावर घरों और इस इकलौती आवाजाही वाली सड़क के बेहद करीब हैं, जिससे करंट लगने का गंभीर खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासी बहादुर डांगी ऊपर लटके तारों के जाल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं,
“यह हादसों को खुला न्योता है।”
सड़क की हालत भी बदतर है, न पानी निकासी की कोई व्यवस्था है, न फुटपाथ, और रुके हुए कचरे से बदबू फैलती रहती है। पानी और कचरा प्रबंधन के लिए नगरपालिका को टैक्स देने के बावजूद, लोगों का आरोप है कि बुनियादी सुविधाएँ उन तक कभी नहीं पहुँचतीं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कॉलोनी बसने से पहले यहाँ ट्रांसमिशन टावर था। धीरे-धीरे उसके आसपास प्लॉट काटे गए, संभवतः बिना उचित मंज़ूरी के, और बेच दिए गए। ज़्यादातर मूल विक्रेता तब से जा चुके हैं, जबकि अब यहाँ रह रहे लोग उनके फैसलों के नतीजे भुगत रहे हैं।
एक अन्य निवासी प्रियंका लोधी, जो अपने बच्चे को स्कूल से लेकर लौट रही थीं, बताती हैं कि हाई-टेंशन लाइन के खतरे को देखते हुए स्कूल बसें इस इलाके में आने से इनकार कर देती हैं। बारिश के दिनों में बच्चों को जलभराव वाले रास्ते से नंगे पैर, बिजली के तारों के नीचे से गुज़रना पड़ता है।
यह खतरा महज़ अंदेशा नहीं है। कुछ लोगों का दावा है कि एक मज़दूर को लाइनों के पास काम करते वक्त करंट लग चुका है, वह गिर पड़ा और अस्पताल में इलाज के बाद ही उसकी जान बच सकी।
भारत में हर साल करंट लगने से 30 से ज़्यादा मौतें होती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में एक लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
अधिकारी मानते हैं कि वैध कॉलोनियों में बिजली की लाइनों को नियमानुसार हटाया जाता है, लेकिन अनधिकृत कॉलोनियों में यह खर्च अक्सर निवासियों पर ही डाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो दशकों में उन्होंने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सीहोर बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री संजीव सिंह कहते हैं,
“जो भी प्लॉट खरीदे, उसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उस पर कोई HT या LT लाइन न हो। ऐसी लाइनों के नीचे कभी मकान नहीं बनाना चाहिए। अगर लाइन पास हो, तो उचित तरीके से आवेदन देकर उसे सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट करवाना चाहिए।”
NDTV के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को इस मामले से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि बिजली लाइनों को स्थानांतरित करना एक जटिल प्रक्रिया है और इसके लिए कई स्तरों पर मंज़ूरी ज़रूरी है।
फिलहाल, लोग हाई-टेंशन तारों के साये में जीने को मजबूर हैं और लाइनों को शिफ्ट करने तथा सरकारी नक्शे के अनुसार सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं।
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